जातीय हिंसा की आग में झुलसा मेरठ, खूनी संघर्ष में अब तक एक दलित युवक की मौत व दर्जनों घायल

By: Iftekhar Ahmed

Published On:
Aug, 09 2018 05:29 PM IST

  • मेरठ में दलित और राजपूतों में खूनी संघर्ष, 8 थानों का पुलिस फोर्स मौके पर तैनात

मेरठ. उत्तर प्रदेश में जातीय संघर्ष रुकने का नाम नहीं ले रहा है। सहारनपुर के बाद अब मेरठ में जातीय विद्वेष ने खूनी संघर्ष का रूप लेना शुरू कर दिया है। मेरठ शहर में गुरुवार को दलित और ठाकुरों के बीच जमकर खूनी खेल खेला गया। इस दौरान दलित समाज के एक युवक की मौत हो गई। एसएसपी राजेश कुमार पांडेय के मुताबिक संघर्ष के दौरान सिर में ईंट लगने से युवक रोहित की मौत हो गई। युवक की मौत के बाद दलित समाज के लोगों में आक्रोश भड़क गया। दलितों ने राजपूत समाज के लोगों पर हत्या का आरोप लगाया है। इसके बाद दोनों तरफ से जमकर लाठी-डंडे और धारदार हथियार चले। इसमें दर्जनों लोग घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी भारी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। फिलहाल, इस मामले में पुलिस ने आरोपी पक्ष के चार व दूसरे पक्ष के 3 लोगों को गिरफ्तार किया है।

meerut violence

 

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युवक की मौत के बाद एक पुलिस कॉंस्टेबल भी फूट-भूटकर रोता हुआ दिखा। बताया जा रहा है कि मृतक युवक रोहित कांस्टेबल योगेंद्र का भतीजा है। योगेंद्र सिंह शामली में तैनात हैं। घटना की जैसी ही सूचना मिली योगेंद्र सिंह घटनास्थल पर पहुंच गए। अपने भतीजे की हत्या के बाद योगेंद्र सिंह सिर पीट-पीटकर रोने लगे। उनका कहना है कि मेरे भतीजे का कोई कसूर नहीं था, लेकिन उसे पीट-पीटकर मार डाला। मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

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बताया जाता है कि गंगानगर थाना क्षेत्र के ऊलदेपुर गांव में बुधवार शाम को कांवड़ यात्रा देखने को लेकर ठाकुर और दलित समाज के लोगों में मामूली कहा सुनी के बाद संघर्ष हो गया था। इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने मामले को शांत करा दिया था, लेकिन लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। इसके बाद गुरुवार की सुबह फिर से दोनों पक्षों के लोगों में खूनी संघर्ष हो गया। आरोप है कि इस दौरान ठाकुर समाज के लोगों ने दलित समाज के लोगों की पिटाई कर दी थी, जिसको लेकर दोनों समुदायों में बवाल हो गया।

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बता दें कि तनाव को देखते हुए मौके पर करीब 8 थानों की पुलिस फोर्स तैनात की गई है। इसके अलावा आरपीएफ को भी बुला लिया गया है। युवक की मौत के बाद दलित समाज के लोगों ने सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर गांव के मुख्य चौराहे पर शव रखकर जाम लगा दिया। मामले को शांत करने के लिए पुलिस ने ठाकुर समाज के चार और दलित समाज के तीन लोगों को हिरासत में ले लिया है। जानकारी के मुताबिक दलित समाज के तीन युवक बुधवार रात कांवड़ देखने मोदीपुरम गए थे। इसी दौरान रास्ते में गांव के ही ठाकुर समाज के युवकों के साथ उनकी मारपीट हो गई। इस घटना के बाद देर रात गांव में तनाव फैल गया, हालांकि कुछ लोगों और पुलिस के दखल के बाद मामला शांत हो गया था। लेकिन, सुबह होते ही मामला फिर भड़क गया। इस घटना से गुस्साए दलित समाज के लोग ठाकुरों की बस्ती में पहुंच गए। इस दौरान कृष्ण चौहान के घर के बाहर दोनों समुदायों के लोगों के बीच जमकर संघर्ष हुआ। करीब 20 मिनट तक लाठी-डंडे और धारदार हथियार चले, जिसमें एक युवक की मौत हो गई। गौरतलब है कि ऊलदेपुर गांव में ठाकुर और दलित समाज के लोगों के बीच करीब तीन साल से जातीय विवाद चला आ रहा है। दोनों बिरादरी में संघर्ष की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं।

 

इस घटना में दलित समाज के देवेंद्र के पुत्र रोहित के अलावा विनोद, अनुज, रवि आदि दलित समाज के लोग बुरी तरह घायल हो गए। सभी घायलों को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने रोहित को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद दलित समाज के लोग एक बार फिर से भड़क गए। उन्होंने जमकर हंगामा करते हुए गांव के मुख्य चौराहे पर शव रखकर जाम लगा दिया। इस घटना की सूचना मिलते ही सीओ दौराला और सीओ सदर देहात आठ थानों की फोर्स, पीएसी और आरएएफ की टीम को लेकर मौके पर पहुंचे। इस दौरान पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने की कोशिश की, लेकिन दलित समाज के लोगों ने ठाकुर समाज के सभी आरोपियों की गिरफ्तारी होने तक शव उठने देने से इनकार कर दिया। इस वक्त पुलिस और दलित समाज के लोगों के बीच जद्दोजहद चल रही है। इसके अलावा सरधना के कसार गांव में भी ठाकुर और दलित समाज के लोगों में बुधवार को हुए संघर्ष के बाद गुरुवार को भी तनाव की स्थिति रही। तनाव को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी सुबह से ही कसार गांव में मौजूद हैं।

Published On:
Aug, 09 2018 05:29 PM IST

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