आज है Sakat Chauth 2019 : जाने संकष्टी गणेश चतुर्थी की व्रत कथा, पूजा विधि, मुहूर्त, व्रत कथा और मंत्र

By: suchita mishra

Updated On: Jan, 24 2019 12:43 PM IST

  • माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के व्रत को लोक प्रचलित भाषा में सकट चौथ या संकष्टी गणेश चतुर्थी कहा जाता है। इस वर्ष सकट चौथ 24 जनवरी 2019 (बृहस्पतिवार) को है

     

माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के व्रत को लोक प्रचलित भाषा में सकट चौथ कहा जाता है। इसे संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं। इस दिन संकट हरण गणेशजी तथा चंद्रमा का पूजन किया जाता है। यह व्रत संकटों तथा दुखों को दूर करने वाला तथा सभी इच्छाएं व मनोकामनाएं पूरी करने वाला है। इस दिन स्त्रियां निर्जल व्रत करती हैं। गणेशजी की पूजा की जाती है। कथा सुनने के बाद चंद्रमा को अर्ध्य देकर ही व्रत खोला जाता है| इस वर्ष सकट चौथ २४ जनवरी २०१९ (बृहस्पतिवार) को है। यह व्रत स्त्रियां अपने संतान की दीर्घायु और सफलता के लिये करती है। इस व्रत के प्रभाव से संतान को रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है तथा उनके जीवन में आने वाली सभी विघ्न –बाधायें गणेश जी दूर कर देते हैं।

कैसे करें पूजन

संतान की कुशलता की कामना व लंबी आयु हेतु भगवान गणेश और माता पार्वती की विधिवत पूजा अर्चना करनी चाहिए। व्रत का आरंभ तारों की छांव में करना चाहिए। व्रतधारी को पूरा दिन अन्न, जल ग्रहण किए बिना मंदिरों में पूजा अर्चना करनी चाहिए और बच्चों की दीर्घायु के लिए कामना करनी चाहिए। इसके बाद संध्या समय पूजा की तैयारी के लिए गुड़, तिल, गन्ने और मूली को उपयोग करना चाहिए। व्रत में यह सामग्री विशेष महत्व रखती है, देर शाम चंद्रोदय के समय व्रतधारी को तिल, गुड़ आदि का अ‌र्घ्य देकर भगवान चंद्र देव से व्रत की सफलता की कामना करनी चाहिए। यह श्लोक पढ़कर गणेश जी की वंदना करें :-

गजाननं भूत गणादि सेवितं,कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्।
उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्॥

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सकट चौथ की पहली कथा

एक गाव में एक माँ और बेटे रहते थे। वे बहुत गरीब थेष किसी तरह वे अपना जीवन निर्वाह करते थे। उसकी मां हर वर्ष सकट चौथ का व्रत किया करती थी। पर इस वर्ष उसके पास तिल का लड्डू बनाने के लिये सामान नहीं था। इसलिये उसने अपने बेटे से कहा कि कुछ इंतजाम करो. तब उसके बेटे ने कहा- “ओ माँ! तुम तब तक खप्पर ( मिट्टी का बर्तन) गर्म कर तब तक मैं सामान लेकर आता हूँ।” उसके बाद बेटा एक सेठ के घर में चोरी करने के लिये गया। तभी सेठ की नजर उस पर पड़ी और सेठ ने उसे पकड़ कर रस्सी से बांध दिया। घर पर उसकी माँ ने खप्पर गर्म कर उसका इंतजार करने लगी। जब वह नहीं आया तब माँ ने कहा- “ख़प्पर धीके पूँ- पाँ ” इधर बेटा सेठ के घर बँधा हुआ था और वहीं से कहने लगा- “बँधा हूँ। करू क्या? ”
सेठ ने जब यह आवाज सुनी तो वह बेटे के पास आकर बोला- “यह तुम क्या बोल रहे हो? ” तब बेटे ने अपनी सारी व्यथा सुनाई और कहा कि मेरी माँ मेरा इंतजार कर रही होगी। यह सुनकर सेठ ने उसे तिल और गुड़ देकर छोड़ दिया जिससे वह अपनी माँ के पास जा सके। तिल- गुड़ पाकर उसकी माँ ने सकट चौथ का व्रत पूर्ण किया. सकट चौथ की कृपा से उनका घर धन-धान्य से भर गया।

 

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सकट चौथ की दूसरी कथा

किसी नगर में एक कुम्भकार रहता था। एक बार उसने बर्तन बनाकर आंवा लगाया तो आंवा पक ही नहीं। हारकर वह राजा के पास जाकर प्रार्थना करने लगा। राजा ने राजपंडित को बुलाकर कारण पूछा तो उसने कहा कि हर बार आंवा लगते समय बच्चे की बलि देने से आंवा पक जाएगा। राजा का आदेश हो गया। बलि आरम्भ हुई। जिस परिवार की बारी होती, वह परिवार अपने बच्चों में से एक बच्चा बलि के लिए भेज देता। इसी तरह कुछ दिनों बाद सकट के दिन एक बुढ़िया के लड़के की बारी आयी। बुढ़िया के लिए वही जीवन का सहारा था। । राजा की आज्ञा कुछ नहीं देखती। दुखी बुढ़िया सोच रही थी की मेरा तो एक ही बेटा है, वह भी सकट के दिन मुझसे जुदा हो जाएगा। बुढ़िया ने लड़के को सकट की सुपारी और दूब का बीड़ा देकर कहा "भगवान का नाम लेकर आंवा में बैठ जाना । सकट माता रक्षा करेंगी। " बालक आंवा में बिठा दिया गया और बुढ़िया सकट माता के सामने बैठकर पूजा करने लगी। पहले तो आंवा पकने में कई दिन लग जाते थे, पर इस बार सकट माता की कृपा से एक ही रात में आंवा पाक गया था। सवेरे कुम्भकार ने देखा तो हैरान रह गया । आंवा पाक गया था। बुढ़िया का बेटा एवं अन्य बालक भी जीवित एवं सुरक्षित थे। नगरवासियों ने सकट की महिमा स्वीकार की तथा लड़के को भी धन्य माना । सकट माता की कृपा से नगर के अन्य बालक भी जी उठे ।

Published On:
Jan, 24 2019 07:58 AM IST

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