जहां थे सरताज, वहां क्या है आज?

shivmangal singh

Publish: Sep, 12 2018 11:27:38 AM (IST)

पांच सालों बाद भी स्थिति जस की तस

मंडला @ मंगल सिंह की रिपोर्ट

बूथ क्रमांक 84
मतदान केन्द्र प्राथमिक शाला भवन सिंघनपुरी
2013 में भाजपा को मिले 500 वोट
नारायणगंज. निवास विधानसभा का बूथ क्रमांक 84 भाजपा को सर्वाधिक मिलने वाली लिस्ट में टॉप 5 में शामिल हैं। लेकिन विकास की बात करें तो यहां पूर्व में जो मुख्य समस्याएं थी वह आज भी बनी हुई है। भाजपा को समर्थन देने के बाद भी लोग मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। ग्राम पंचायत रतनपुर चौकी के अंतर्गत आने वाले पोषक ग्राम सिघनपुरी के पास सहे बालई नदी निकलती है। गांव को मुख्या मार्ग से जोडऩे के लिए यहां पूर्व में स्टॉप डेम बना हुआ है। जो कि बारिश के दौरान कई बार डूब जाता है। ग्रामीणों द्वारा वर्षों से स्टॉप डेम के स्थान पर ऊंचे पुल की मांग की जा रही है। ग्रामीण राजकुमार धुर्वे का कहना है कि गांव से बाहर आने जाने के लिए स्टॉप डेम ही एकमात्र सहारा है। गर्मी के दिनों में तो काम चल जाता है लेकिन बारिश के बाद कभी पुल डूबने से आवागमन अवरूद्ध हो जाता है जिससे दुर्घटना की आशंका भी बनी रही है। इसी मार्ग से गांव के मवेशी भी जंगल चरने के लिए जाते हैं लेकिन जब कभी लौटते वक्त डेम में पानी अधिक हो जाता है तो मवेशियों पूरी रात बरसते पानी में गुजारनी पड़ती है। मवेशियों के आश्रय के लिए भी डेम के दूसरी ओर कोई साधन नहीं है।
विधायक ने भुलाए वादे
गांव के छात्र-छात्राओं को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के लिए भी मोहताज होना पड़ रहा है। वर्तमान विधायक रामप्यारे कुलस्ते निवास विधानसभा में तीन पंजवर्षीय में जीत हासिल कर विधायक रह चुके है। ग्रामीणेां की मांग के बाद 2011 में प्राथमिक शाला प्रारंभ की गई थी। 2013 में स्कूल को भवन उपलब्ध कराना भी चुनाव का मुदï्दा रहा है। लेकिन जीत के बाद विधायक वादे इरादे सब भुला दिए। 7 साल बीत जाने के बाद भी भवन की व्यवस्था नहीं हो पाई। आज भी बच्चे किराये के छोटे-छोटे कमरे में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
बारिश के दिनों में गांव में अक्सर दूषित पानी पीने से बीमार होते हैं। जिसकी वजह एक टोले जिसमें 60 लोगों की आबादी है वहां शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं होना है। यहां के लोग वर्षों से कुंए का पानी ही उपयोग में ला रहे हैं। जिसकी सफाई भी वर्षों नहीं की जाती है। यहां तक इस कारण टोले का नाम ही कुंआ टोला रख दिया गया है। ग्रामीण धनीराम परते, रामचरण धुर्वे का कहना है कि लोग वर्षों से यहां समस्याओं को दूर करने जनप्रतिनिधियों से आग्रह कर रहे हैं लेकिन कोई विशेष कार्य गांव में नहीं कराए जा रहे हैं। 15 साल से भाजपा विधायक को समर्थन देने के बाद भी गांव की समस्या दूर नहीं हो सकी है। वर्तमान स्थाति भाजपा की उम्मीदों के उल्ट दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जो पार्टी गांव की गंभीर समस्याओं को दूर करेगी मतदान उसी को करेंगे।

बूथ क्रमांक 218
मतदान केन्द्र माध्यमिक शाला भवन बकौरी
2013 में कांग्रेस को मिले थे 569 वोट
बकौरी. निवास विधानसभा क्षेत्र व मंडला राजस्व क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बकौरी के लोगों को कांग्रेस को समर्थन देना भारी पड़ रहा है। हालांकि कांग्रेस कार्यकर्ता समय-समय पर क्षेत्रीय मुदï्दों को लेकर प्रदर्शन करते हैं विधायक व सांसद से भी क्षेत्रीय समस्याओं को दूर करने की मांग की जाती रही है। लेकिन बकौरी वासियों को राहत नहीं मिली है। लगभग २४ गांव के मुख्यालय होने ेके कारण सुविधाओं की जरूरत भी बढ़ गई है। यहां रामप्यारे कुलस्ते के खिलाफ पतिराम पन्द्रे को अधिक मत मिले थे। जो कि कांग्रेस को मिलने वाले अधिक मतो के टॉप ५ में शामिल हैं। 2008 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बकौरी में 30 बिस्तरीय अस्पताल की घोषणा की थी। जिसके बाद कागजी कार्रवाई पूर्ण होते-होते 2013 से बकौरी में अस्पताल के लिए भवन का निर्माण शुरू किया गया। जो कि अगामी विधानसभा चुनाव के पूर्व तक प्रारंभ होने की उम्मीद नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है। जिसके कारण लोगों को समय पर उपचार नहीं मिल रहा है। स्थानीय लोग झोला छाप के चंगुल में फंस रहे हैं। दुर्गाप्रसाद शुक्ला, गणेश पांडे, महेन्द्र मरावी आदि का कहना है अस्पताल भवन के निर्माण में दूर दृष्टि सोच नहीं रखी गई है। भवन का निर्माण मंडला-निवास मुख्य मार्ग से काफी निचले क्षेत्र में किया गया है। जिससे कुछ दिन पूर्व हुई बारिश में अस्पताल के अंदर घूटने तक पानी भर गया था। अभी अस्पताल चालू होने में काफी समय लगने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके साथ ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर प्रदान नहीं किए जा रहे हैं। २४ गांव के शिक्षित युवा बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। जबकि बकौरी के आसपास पास फैक्ट्री आदि खोलने के लिए पर्याप्त शासकीय जगह उपलब्ध है।
मंडला से निवास मार्ग में भारी वाहनो का अवागमन भी मुख्य समस्याओं में से है। यहां प्रतिबंध के बाद भी ट्रक, ट्राला, टे्रलर आदि निकल रहे हैं। जिससे आए दिन दुर्घनाएं भी हो रही है। कांग्रेस पदाधिकारियों द्वारा मार्ग से भारी वाहनों के प्रवेश में प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की गई थी। जिसके बाद जिला प्रशासन द्वारा प्रतिबंध लगा दिया गया है लेकिन उसका पालन नहीं हो पा रहा है।
समीपी ग्राम सागर में कन्या छात्रावास का निर्माण चुनावी मुदï्दा हो सकता है। यहां खुक्सर, डोंगरिया, सिंगारपुर, मुढ़ाडीह, जुझारी, फुलसागर आदि गांव के विद्यार्थी हायर सेकंडरी स्कूल सागर में पढऩे आते हैं। छात्र तो किसी तरह आना कर लेते हैं लेकिन छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिसको लेकर क्षेत्रीय लोगों ने सागर में कन्या छात्रावास की मांग पर जोर दिया है।

Where was Sartaj, what is there today?
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