मरीज बैठे रहे, डॉक्टर ओपीडी से गायब रहे

By: Mangal Singh Thakur

Updated On:
25 Aug 2019, 05:55:29 PM IST

  • जिला अस्पताल के चिकित्सकों की मनमानी से मरीज परेशान

मंडला. जिला अस्पताल के चिकित्सकों की लगातार बढ़ती मनमानी से मरीजों का बुरा हाल है। अस्पताल में चिकित्सक न ही समय पर आते हैं और न ही निर्धारित समय तक रुकते हैं। शासन के निर्देशों की धज्जियां उड़ाई जा रही है और मरीजों को भगवान भरोसे छोड़ा जा रहा है। शासन के निर्देशानुसार, ओपीडी में चिकित्सकों के उपलब्ध रहने का समय सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक निर्धारित किया गया है लेकिन ड्यूटी पर अधिकांश चिकित्सक न ही 9 बजे अस्पताल पहुंच रहे हैं और न ही शाम 4 बजे तक रुक रहे हैं। इसका खामियाजा अंतत: जिले भर के ग्रामीण अंचलों से आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। चिकित्सक का इंतजार करते करते सुबह से शाम बीत जाती है और मरीज बीमारी की हालत में छटपटाते रह रहे हैं।
एक ओर संक्रामक रोगों का प्रकोप चारों ओर फैला हुआ है हर परिवार में कोई न कोई सदस्य बीमार हो रहा है। सारे शहरवासी प्रथम प्राथमिकता जिला अस्पताल के चिकित्सकों को ही देते हैं। इसके अलावा हर दिन ग्रामीण अंचलों से सैकड़ों मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। मरीजों की अस्पताल में भरमार है, इस बात का अंदाजा महज इस बात से लगाया जा सकता है कि शनिवार की दोपहर तक अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों का आंकड़ा 800 को पार कर चुका था। दोपहर चार बजे तक पूरी ओपीडी मरीजों, उनके परिजनों से खचाखच भरी हुई थी लेकिन ओपीडी के अधिकांश चिकित्सक कक्ष खाली पड़े हुए थे।
ओपीडी के हाल
कक्ष -01
जानकारी के अनुसार, कक्ष क्रमांक एक आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी कक्ष में डॉ गौरव जेटली और डा आरके बघेल को उपस्थित होना था लेकिन कक्ष में उपस्थित मरीजों ने बताया कि वे दोपहर 1 बजे से कक्ष में चिकित्सक का इंतजार कर रहे हैं लेकिन कोई चिकित्सक वहां उपलब्ध नहीं था।
कक्ष-03
कक्ष क्रमांक-3 में अस्थि रोग का निरीक्षण किया जाता है। बम्हनी से आए मरीज ने बताया कि वह पिछले डेढ़ घंटे से कक्ष-3 के सामने चिकित्सक इंतजार कर रहा था। उसके बाद डॉ तेजा महज पांच मिनट के लिए आए और दवाई का पर्चा लिखकर पुन: चले गए।
नहीं हुआ सबका इलाज
कल घुघरी विकासखंड से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं सहायिकाएं अपने साथ लगभग 60-70 बच्चों को उपचार के लिए लेकर पहुंची थी। बताया गया है कि उक्त सभी बच्चे दस्तक अभियान के अंतर्गत चिन्हित किए गए थे। ये सभी बच्चे दोपहर 2.30 बजे जिला अस्पताल पहुंचे। इन्हें जीप एवं अन्य छोटे यात्री वाहनों की बुकिंग करके लाया गया था। इतनी दूर से आने के बावजूद सभी बच्चों को पूर्ण उपचार नहीं मिला क्योंकि अधिकांश बच्चों के कोई भी बायोकैमिस्ट्री टेस्ट नहीं हो पाए। शासकीय पैथोलॉजी में 1.00 बजे तक सैंपल लिए जाते हैं और उसके बाद लिए गए सैंपल का परीक्षण शुरु किया जाता है क्योंकि मरीजों को टेस्ट रिपोर्ट भी देनी होती है। इतने कम समय में सभी बच्चों के सैंपल लेना और रिपोर्ट सौंपना नामुमकिन होता, इसीलिए अधिकांश बच्चों को अति साधारण उपचार देकर लौटाना पड़ा।
घर छोड़ जाते हैं मोबाइल
चिकित्सकों के ओपीडी में उपस्थित नहीं होने के कारणों का पता लगाने के लिए जब जिला अस्पताल के आरएमओ डॉ आरके बघेल से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो पता चला कि वे अपना मोबाइल घर अस्पताल छोड़कर जाते हैं। ओपीडी टाइम में डॉ बघेल न ही ओपीडी में मरीजों को उपलब्ध रहे और न ही अस्पताल भवन में मरीजों को कहीं दिखे।

Updated On:
25 Aug 2019, 05:55:29 PM IST

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