#PatrikaKeyNoteLucknow का हिस्सा बन रहे ये खास मेहमान जानिए इनके बारे में

  • देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र समूह राजस्थान पत्रिका की ओर से विचारों के महाकुंभ का आयोजन इस बार लखनऊ में हो रहा है
लखनऊ. देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र समूह राजस्थान पत्रिका की ओर से विचारों के महाकुंभ का आयोजन इस बार लखनऊ में हो रहा है। 13 और 14 नवंबर को लखनऊ के एक बड़े होटल में होने वाले इस आयोजन का हिस्सा होंगी देश की प्रतिष्ठित हस्तियां। विचारों की क्रांति में निकले निष्कर्ष देश को गढ़ने का काम करेंगी।

कई सत्रों में होने वाले दो दिवसीय पत्रिका की-नोट में राजनीति, संस्कृति, सामाजिक, खेल, शिक्षा समेत तमाम क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठित वक्ता अपने विचार बेबाक तरीके से रखेंगे। डॉ. संजय द्विवेदी भोपाल के ध्रुव रॉकबैंड के संस्थापक, लखनऊ के मौलाना सैयद कल्बे जव्वाद नकवी शिया धर्मगुरु, जस्टिस सुनील अंबवानी राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, शाइस्ता अंबर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष, रविंदर सिंह व एयर मार्शल डॉ. आरसी बाजपेयी जैसी जानी मानी हस्तियां भी हमारी स्पीकर हैं। पढ़िए इनके बारे में कुछ खास बातें..


डॉ. संजय द्विवेदी



डॉ. संजय द्विवेदी भोपाल के ध्रुवा संस्कृत बैंड के संस्थापक हैं। स्वर, ताल एवं शब्द के गुंथे हुए (निबद्ध) रूप को ‘ध्रुवा’ कहते हैं। ध्रुवा-गान संगीत की सबसे प्राचीन विधाओं में से एक है, इसलिए इन्होंने अपने बैंड का नाम ‘ध्रुवा’ रखा। डॉ. संजय द्विवेदी संस्कृत में पीएचडी हैं उन्होंने संस्कृत में कई नाटक भी लिखे हैं। पूरे देश के बड़े शहरों में कई शो कर चुके हैं। एक साल के अंदर ही डॉ. संजय द्विवेदी यह बैंड देश-विदेश में अपनी पहचान बना चुका है। डॉ. संजय द्विवेदी का 'ध्रुवा संस्कृत बैंड' देश का पहला संस्कृत रॉक बैंड है। यह बैंड ऋग्वेद के मंत्रों को क्लासिकल और वेस्टर्न म्यूज़िक के साथ प्रस्तुत करता है। 10 सदस्यों वाले इस बैंड को अब देश-विदेश से कई जगह परफॉर्मेंस देने के बुलावे मिलने लगे हैं। इस बैंड को बनाने वाले डॉ. संजय द्विवेदी का मकसद संस्कृत को आम भाषा बनाना है। संजय द्विवेदी मानते हैं कि सूफी संस्कृत का ही हिस्सा है। यही वजह है कि सूफी संगीत हमारे दिल को छूता है और सुकून भी देता है। ‘ध्रुवा’ बैंड के सदस्यों में डॉ. संजय द्विवेदी के अलावा वैभव संतारे (गायक), ज्ञानेश्वरी परसाई (गायिका), सनी (ड्रमर), आदित्य (गिटार), तुशार एस घरात (पखावज), विजय मौर्या (ढोलक) भी हैं, जो संजय का साथ देते हैं।

सैयद कल्बे जव्वाद नकवी

kalve

लखनऊ के मौलाना सैयद कल्बे जव्वाद नकवी शिया धर्मगुरु हैं। वह मौलान सैयद कल्बे आबिद के बेटे हैं। वह, प्रसिद्ध विद्वानों के परिवार खानदान-ए- इज्तेहाद से आते हैं। मौलाना सैयद कल्बे जव्वाद लखनऊ की शाही अशाफी मस्जिद के इमाम -ए-जुमा हैं साथ ही ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सीनियर मेंबर भी हैं। वह लखनऊ के "शिया अनाथालय" गुलिस्तां-ए-अबुतलिब के संरक्षक और अक्ष्यक्ष हैं। 19 फरवरी 2006 में गठित जॉइंट उलेमा काउंसिल के सदस्य हैं। इनके निर्देशनमें वक्फ आंदोलन 'तहरीक-ए-अवक्फ' चल रहा है। लखनऊ में नूर हिदायत फाउंडेशन की स्थापन भी मौलाना सैयद कल्बे जव्वाद ने की। कल्बे जव्वाद ने लखनऊ में कभी सबसे बड़ी अमेरिकी / इसराइल / डेनमार्क विरोधी रैली की जिसमें  एक लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया।

सुनील अंबवानी



जस्टिस सुनील अंबवानी राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश रहे हैं। 23 अगस्त 1953 में जन्मे जस्टिस सुनील अंबवानी ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से सन् 1975 में वकालत की डिग्री ली। इसके बाद 1976 से 1985 तक इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत की बाद में 1992 से 2001 तक सुप्रीमकोर्ट में वकालत की। 24 अप्रे 2001 को जस्टिस अंबवानी परमानेंट जज के तौर पर नियुक्त हुए। जुलाई 2014 को जस्टिस अंबवानी राजस्थान हाईकोर्ट ट्रांसफर हो गए। मार्च 2015 में उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर नियुक्त किया गया। 22 अगस्त 2105 तक वह राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे।

जस्टिस सुनील अंबवानी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के अध्यक्ष थे तब इन्होंने एक दशक से बंद पड़े यूपी के राष्ट्र सिमेंट निगम के मामले का निस्तारण किया था। इससे हजारों मजदूरों को उनके बकाया राशि मिली थी।

शाइस्ता अंबर

sunil

शाइस्ता अंबर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड  का गठन 2005 में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की प्रयोज्यता जारी रखने और खासतौर पर महिलाओं के मुद्दों, विवाह, तलाक, और अन्य कानूनी अधिकारों को दिलाने के लिए किया गया। शाइस्ता अंबर लगातार मुस्लिम महिलाओं के हित के लिए आवाज उठाती रही हैं। हाल ही में ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने कहा था कि मुस्लिम मैरिज एक्ट बनाया जाना जरूरी है। हालांकि उन्होंने शरीयत में केंद्र की दखलअंदाजी बर्दाश्त के नाकाबिल बताई। शाइस्ता अंबर ने यह भी कहा है कि कॉमन सिविल कोड किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

रविंदर सिंह



रविंदर सिंह 2004 में भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के संयुक्त सचिव थे। सिंह ने शुरू में भारतीय सेना में सेवा की, मेजर के पद तक पहुंचने के बाद स्वै्चछिक तौर पर रॉ में शामिल हो गए। रविंदर सिहं विवादों में भी घिरे रहे। साल 2004 में आरोप लगा कि रविन्दर सिंह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ CIA की मदद से काठमांडू के रास्ते अमेरिका चले गए थे। साल 2006 में रविन्दर सिंह न्यूजर्सी में ट्रेस किए गए थे, एजेंसी ने कोशिश की थी कि वो प्रत्यर्पण कर दें। बाद में रविंदर सिंह कई दिनों तक गायब भी रहे।

एयर मार्शल डॉ आरसी बाजपेयी



एयर मार्शल डॉ आरसी बाजपेयी वर्ष 1960 में वायु सेना में कमीशन्ड हुए। 36 वर्षों से भी अधिक की विशिष्ट सेवा के बाद 1996 में उन्होंने  बतौर एयर मार्शल रैंक, एयर ऑफीसर कमांडिंग इन चीफ ऑफ मेंन्टेनेंस कारयभार संभाला। सेवा में रहते हुए ही डॉ. आरसी बाजपेयी ने दिल्ली आईआईटी से रडार प्रोद्योगिकी और इलेक्ट्रानिक युद्ध में एमटेक और पीएचडी की। डॉ. बाजपेयी नेशनल डिफेंस कॉलेज नई दिल्ली के स्नातक हैं और रूसी भाषा में एडवांस डिप्लोमा किया है।

पंकज पचौरी

ravindra

पंकज पचौरी एक वरिष्ठ भारतीय टेलीविजन पत्रकार एवं भारत के प्रधानमन्त्री के वर्तमान संचार सलाहकार हैं। पचौरी एनडीटीवी के साथ जुड़े हुए हैं। इससे पहले वह ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोंरेशन और इंडिया टुडे जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया घरानों एवं बर्कले स्थित कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता विभाग में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। पंकज पचौरी ने हिंदी को जनसंचार की सुगम और सुव्यवस्थित भाषा बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके लिए मीडिया के मंच के सार्थक इस्तेमाल के साथ-साथ उन्होंने बौद्धिक विमर्श के अन्य महत्वपूर्ण मंचों का भी भरपूर उपयोग किया है। हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में नए प्रतिमान स्थापित करने वाले पंकज पचौरी को 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' ने 'गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार' प्रदान किया है।

आईएएस ऑफिसर सूर्य प्रताप सिंह





आईएएस ऑफिसर सूर्य प्रताप सिंह किसी पहचान के मोहताज नहीं है। 1982 बैच के यूपी कैडर के आईएएस ऑफिसर उन अधिकारियों में से हैं जिन्होंने अपने पद और रुतबे की चिंता ना करते हुए वीआरएस ले लिया। अपनी बेबाकी के लिए मशहूर सूर्य प्रताप सिंह ने यूपी सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर मौजूद रहे। उन्होंने जब तत्कालिक मुख्य सचिव अलोक रंजन को अपना वीआरएस का पत्र भेजा था वो भी सात पन्नों का था। जिसमें उन्होंने यूपी सरकार और काम करने के तरीकों की खूब आलोचना की थी। अब भी वह अपनी बेबाक बातों से सरकार को नीतियों की आलोचना करने के साथ आम जनता को जागरूक करने में जुटे हुए हैं।

रविदेश पांडे

Sanjay

रवि देशपांडे ने अपना करियर 1985 में क्लारियोन के साथ आर्ट डायरेक्टर के तौर पर शुरू किया था। उसके बाद 1987 में उन्होंने कांट्रैक्ट जेडब्ल्यूटी कंपनी को ज्वाइन कर लिया। 10 वर्षों के अंदर ही भारत में सबसे बेहतरीन क्रिएटिव माइंड के तौर पर साबित करते हुए एजेंसी को कांस, वन शो, डीएंडएडी और और अन्य इंटरनेशनल पुरस्कार सहित रचनात्मक उत्कृष्टता के लिए 400 से अधिक स्थानीय पुरस्कार दिलाए। एक व्यक्ति के तौर पर विज्ञापन और मार्केटिंग के लिए राष्ट्रीय पुरस्कारों में वर्ष में दो बार कला निर्देशक सहित कई पुरस्कार जीते। 1999 में, रवि को रणनीतिक विपणन प्रबंधन के लिए मैकिन्से एंड कंपनी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में रचनात्मक पेशेवर के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।