'आजाद समाज पार्टी' बनाकर मायावती की मुश्किलें बढ़ाने को तैयार चंद्रशेखर

By: Hariom Dwivedi

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Updated: 15 Mar 2020, 03:06 PM IST

Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

लखनऊ. अभी तक आंदोलनों तक सीमित रहे भीम आर्मी प्रमुख चन्द्रशेखर ने सक्रिय राजनीति में उतरने का ऐलान कर मायावती की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। चंद्रशेखर ने रविवार को नोएडा में 'आजाद समाज पार्टी' नाम से नये दल की घोषणा कर दी। दलित युवाओं के बीच खुद को नायक के तौर पर पेश करने वाले चन्द्रशेखर उसी जाटव जाति से हैं, जिससे मायावती आती हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मायावती ने लंबे राजनीतिक करियर में दलितों के बीच जो पैठ बनाई है, उसे हिला पाना इतना आसान नहीं होगा। चन्द्रशेखर बसपा की जगह तो नहीं ले सकते, लेकिन अपनी अलग पार्टी की पहचान से बसपा को नुकसान जरूर पहुंचा सकते हैं। यही कारण है कि चंद्रशेखर के राजनीतिक उभार ने बसपा प्रमुख को थोड़ा चिंतित जरूर कर दिया है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में दलित और ठाकुरों में टकराव के बाद से चर्चा में आये चंद्रशेखर खुद को दलित हितैषी के तौर पर पेश करते रहे हैं। चंद्रशेखर आजाद ने भीम आर्मी संगठन को राजनीतिक रूप देने के लिए 15 मार्च की तारीख सोच समझकर तय की थी। 15 मार्च को बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की जयंती है। 90 के दशक में वह देश में दलितों के प्रमुख नेता और चेहरा माने जाते थे। बसपा प्रमुख मायावती आज भी कांशीराम के वसूलों पर चलने का दावा करती हैं और उन्हें अपना राजनीतिक गुरू मानती हैं।

मायावती की दलित राजनीति में सेंधमारी को उतावले चंद्रशेखर न केवल दलितों के बीच सक्रिय हैं, बल्कि वह खुद को दलित हितैषी के तौर पर पेश करते रहे हैं। मायावती पर निशाना साधते हुए उन्हें कांशीराम की विरासत और बहुजन समाज आंदोलन के खिलाफ बता रहे हैं। यूपी में दलितों का नया तारणहार बनने की कोशिश में लगे चंद्रशेखर अब तक बसपा के एक दर्जन से अधिक नेताओं को संगठन में शामिल करा चुके हैं। सूत्रों की मानें तो बसपा के कई और बड़े नेता जल्द ही 'आजाद समाज पार्टी' में शामिल हो सकते हैं।

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'आजाद समाज पार्टी' बनाकर मायावती की मुश्किलें बढ़ाने को तैयार चंद्रशेखर

पांच अप्रैल को मायावती ने बुलाई बसपा की बैठक
बीते दिनों में जिस तरह से भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर का राजनीतिक उभार हुआ है, वैसे ही उनकी महात्वाकांक्षा भी बढ़ गई है। इससे कतई इनकार नहीं किया जा सकता है। मायावती को हमेशा बहनजी कहकर संबोधित करने वाले चंद्रशेखर अब खुलकर विरोध कर रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में वह मायावती के दलितों वोटबैंक में सेंधमारी कर सकते हैं। हालांकि, संसाधनों और संगठनात्मक पहुंच की कमी के चलते यह कर पाना इतना आसान नहीं होगा। बावजूद, मायावती उनकी बढ़ती महात्वाकांक्षा से आने वाले संभावित खतरे के प्रति सजग हैं। चंद्रशेखर पर भाजपा के इशारों पर चलने का आरोप लगा चुकीं मायावती कई बार मीडिया में आकर सफाई दे चुकी हैं कि उनका भीम आर्मी से कुछ भी लेना-देना नहीं है। सूत्रों की मानें तो चंद्रशेखर के नई पार्टी बनाने के ऐलान के बाद मायावती ने लखनऊ में पांच अप्रैल को दिग्गज बसपा नेताओं की बैठक बुलाई है। इस बैठक में चंद्रशेखर के राजनीतिक नुकसान की संभावनाओं को कम करने की रणनीति पर मंथन किया जाएगा।

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