मानवीय मूल्यों को बचाने के लिए संस्कृत को अपनाएं

  • हमारा देश पुराणों का देश है लेकिन अब पुराणों को लोग भूल गए हैं। जिससे गुरु और शिष्य के बीच दूरी बढ़ती जा रही है। 30 साल के लड़के को धोती कुर्ता पहने देखकर आप थोड़ा अचरज में होंगे ।
लखनऊ.  हमारा देश पुराणों का देश है लेकिन अब पुराणों को लोग भूल गए हैं। जिससे गुरु और शिष्य के बीच दूरी बढ़ती जा रही है। 30 साल के लड़के को धोती कुर्ता पहने देखकर आप थोड़ा अचरज में होंगे। पुराणों का लेखन संस्कृत में किया गया है और संस्कृत मात्रा एक भाषा ही नहीं है बल्कि ये हमारे डीएनए में भी है। जो भाषा आज हम बोलते हैं वो संस्कृत का अपभ्रंश रूप है।ये बात उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हो रहे राजस्थान पत्रिका के की -नोट कार्यक्रम 2016 में देश के पहले ध्रुव संस्कृत रॉक बैंड के संयोजक संजय द्विवेदी ने कही। इस सत्र को मॉडरेट मशहूर रेडियो जॉकी पारुल शर्मा ने किया।

सत्र के दौरान संजय द्विवेदी ने बताया कि संस्कृत भाषा हमारी संस्कृति का महत्वपूर्ण अंश है।इसके ह्यास के कारण समाज में मानव मूल्यों में तेजी से गिरावट आ रही है। गुरु और शिष्य के बीच संवाद ख़त्म हो गया है। संजय ने बताया कि उन्होंने  संस्कृत में परास्नातक और पीएचडी की है।पहले वह संस्कृत के गीतों का प्रयोग पारंपरिक संगीत के कार्यक्रमों में किया करते थे। जिसमें वह लोग ही भाग लेते थे जो बुद्धिजीवी, ज्ञानी और  संस्कृत को समझने वाले होते थे। जिनकी संख्या बेहद कम होती है।ऐसे में संजय को ये आइडिया आया कि संस्कृत भाषा में इस तरह से गीतों को प्रस्तुत किया जाये। जो युवाओं के बीच रुचिकर हो और उनकी समझ में भी आए।

(फोटो क्रेडिट- रितेश सिंह)


जिसके बाद उन्होंने देश के पहले ध्रुव संस्कृत रैप बैंड का निर्माण किया । इसमें वह संस्कृत में गीत के कुछ अंतरों को गाकर और उसका अर्थ हिंदी में उसी गाने में जोड़कर गाते है। जो युवाओं को बहुत लुभा रहा है। एंकर पारुल के प्रश्नों का जवाब देते हुए संजय ने बताया कि आज भारतीय समाज को संस्कृत की बहुत आवश्यकता है। परीक्षा में कम नंबर आने पर सुसाइड, रिश्तों में बढ़ती दूरियों और मानव मूल्यों के बढ़ते ह्वास के लिए संस्कृत का विकास करना आवश्यक है।

ध्रुवा बैंड के बारे में

आपने हिन्दी और अंग्रेजी जैसी दूसरी भाषाओं का संगीत रॉक बैंड को तो सुना होगा, लेकिन भोपाल संगीत रॉक बैंड ‘ध्रुवा’ संस्कृत के लिए प्रसिद्ध है। इस बैंड के कलाकार संस्कृत के श्लोक और मंत्रों को संगीत में ढाल लेते हैं। साल 2015 में शुरू हुए ‘ध्रुवा’ संगीत बैंड के संस्थापक भोपाल में रहने वाले डॉ. संजय द्विवेदी है। संस्कृत में पीएचडी डॉ. संजय खुद भी संस्कृत के विद्वान हैं। उन्होंने संस्कृत में कई नाटक भी लिखे हैं। पूरे देश के बड़े शहरों में कई शो कर चुके हैं। अब यह बैंड दुनिया में अपनी धाक जमाने की तैयारी में जुटा है।

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आरजे पारुल के बारे में


पारुल लखनऊ की मशहूर रेडियो जॉकी हैं। यह ऑल इंडिया रेडियो से जुड़ी हैं। यह लखनऊ लिट्रेचर फेस्टिवल की फाउंडर टीम की भी सदस्य हैं और मशहूर होस्ट हैं।