फ्लिपकार्ट-वॉलमार्ट डील से सरकार हुई मालामाल, मिले 10,000 करोड़ रुपए

manish ranjan

Publish: Sep, 10 2018 09:34:24 AM (IST)

सरकार के मंजूरी देने के बाद देश की नंबर-1 ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट को अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट इंक ने खरीद लिया।

नई दिल्ली। जहां एक आेर फ्लिपकार्ट-वॉलमार्ट डील का पूरे देश में विरोध हो रहा है वहीं दूसरी आेर कंपनी की आेर से सरकार को भारी-भरकम टैक्स देकर मालामाल कर दिया है। आपको बता दें कि सरकार की मंजूरी के बाद देश की नंबर-1 ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट को अमरीकी कंपनी वॉलमार्ट ? इंक ने खरीदा था। यह डील 1,500 करोड़ डॉलर यानी करीब 1 लाख करोड़ रुपए में हुआ। इस डील को दुनिया की सबसे बड़ी र्इ-काॅमर्स डील भी कहा गया था। इस सौदे के तहत वॉलमार्ट ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट में 77 फीसदी हिस्सेदारी का मालिक बना।

कंपनी ने किया सरकार को मालामाल
कंपनी ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को 10,000 करोड़ रुपए टैक्स दे दिया है। पेमेंट के बाद वॉलमार्ट ने सभी बकाया राशि को खत्म कर दिया, जिसे 16 बिलियन ट्रांजेक्शन से पाया गया था। इसमें 2 बिलियन फ्रैश इंवेस्टमेंट थे। इन सबका नतीजा ये हुआ कि टैक्स का भुगतान शेयर सेल के आधार पर किया गया जो करीब 14 बिलियन था। अब कंपनी को रन करने में किसी तरह की कोर्इ परेशानी का सामना नहीं करना होगा।

सरकार ने नहीं दी टैक्स में छूट
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को टैक्स भरने के बाद वॉलमार्ट कंपनी के एक अधिकारी ने कहा कि वो इस सौदे से जूड़े सभी कानून को गंभीरता से ले रहे हैं। जिसमें कंपनी जहां काम कर रही है वहां की सरकार को टैक्स भरना शामिल है। फ्लिपकार्ट इंवेस्टमेंट को देखते हुए हमने भारतीय टैक्स डिपार्टमेंट की सभी गाइडेंस में अपना दायित्व पूरा किया। बता दें की सरकार ने इस सौदे में टैक्स में किसी भी तरह की छूट देने से पूरी तरह से इंकार कर दिया था और कहा था कि कंपनी 7 सितंबर तक सारी बकाया राशि का भुगतान करे।

झेलना पड़ रहा है विरोध
व्यापारी संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट)जमकर इस सौदे का विरोध कर रही है। हाल ही में इस संगठन ने कहा था की वो फ्लिपकार्ट-वॉलमार्ट के सौदे के खिलाफा 90 दिन का देशव्यापी आंदोलन करेगी। लेकिन इन सब विरोधों के बाद भी इस सौदे पर कोई फर्क पड़ता नजर नहीं आ रहा हैं। संगठन का मानना है कि देश के कर्इ व्यापारियोें को इससे सीधा नुकसान होगा।

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Web Title "Walmart pay government 10,000 crore rupees as tax"