फारेस्ट गार्ड पर लगा झोपड़ियां जलाने का आरोप, पलायन को मजबूर हो रहे आदिवासी

कभी पीने के पानी के हेडपम्प को उखाड़ फेकना तो कभी झोपड़ी को आग के हवाले करना। फर्जी मुकद्दमों में फंसाकर जेल भेजना, वन विभाग द्वारा घटित आम घटनायें है।

ललितपुर। सरकार आदिवासियों के उत्थान को लेकर काफी प्रयास कर रही है और आदिवासियों के लिए नई नई योजनाओं का संचालन कर रही है लेकिन ललितपुर जनपद में आदिवासियों पर वन विभाग द्वारा क्रूरता पूर्ण कार्य किया जा रहा है, उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। जनपद में आदिवासी परिवारों का उत्पीड़न कोई नई घटना नही है। वन विभाग दुवारा पूर्व में अनेको बार वन भूमि खाली कराने के नाम पर किया जाता रहा है।

ऐसे होता है उत्पीड़न 

कभी पीने के पानी के हेडपम्प को उखाड़ फेकना तो कभी झोपड़ी को आग के हवाले करना। फर्जी मुकद्दमों में फंसाकर जेल भेजना, वन विभाग द्वारा घटित आम घटनायें है।

जनपद ललितपुर के सीमावर्ती ग्राम बालावेहट के आदिवासी जनजाति समुदाय के लोगों ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन देकर वन क्षेत्र बालाबेहट के फारेस्ट रैंजर लेख राम ओर अन्य वनकर्मियों पर अपनी झोपड़ियां जलाने का आरोप लगाया हैं। जिससे उनका राशन सामग्री और कपड़े जलकर राख हो गये हैं जिससे उनके सामने इस सर्दी के मौसम में जीवन जीने का संकट पैदा  हो गया है। आदिवासियो ने फारेस्ट रैंजर लेखराम पर जान से मारने की धमकी देने और दंबगों के दुबारा बरैना की वनभूमि पर खेती करवाने का आरोप लगाया है। 

बताते चलें कि यह वन विभाग द्वारा उत्पीड़न की कोई पहली घटना नहीं है। इसके पूर्व भी विभाग द्वारा इनकी झोपड़ियां जलाने, इनके इलाके में लगे हैंडपम्प को उखाड़ फेंकना, इन पर फर्जी मुकद्दमा दर्ज कराने जैसे कृत्य किये जा चुके हैं। 
इस बार आदिवासियों ने जिलाअधिकारी को दिये ज्ञापन में उत्पीड़न के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जाती तो वह जनपद ही नहीं प्रदेश से पलायन करने को मजबूर होंगे। वन विभाग द्वारा मनमाने तरीके से अपनी भूमि को सुरक्षित करने के नाम पर ऐसे आदिवासियों पर अत्याचार करते आ रहे हैं। 

हालांकि जब हमने DFO बी के जैन से बात की तो उन्होंने बताया कि यह आदिवासी लोग जबरदस्ती वन विभाग की भूमि पर कब्जा करते है और वहां रहकर वन सम्पदा को काफी नुकसान पहुंचाते हैं।
आकांक्षा सिंह Desk/Reporting
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Web Title: Tribal blamed to Forest guards of burning huts in Balrampur
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