शिक्षकों ने अभद्रता कर छात्र को जमकर पीटा, पुलिस कहती है अभी हांथ नहीं टूटा

By: Neeraj Patel

Published On:
Apr, 06 2019 03:01 PM IST

  • अध्यापकों ने हैवानियत की सारी हदें की पार, छात्र को कमरे में बंधक बनाकर अभद्रता कर जमकर की मारपीट, पुलिस ने नहीं लिखी रिपोर्ट

ललितपुर. हमारे देश में स्कूल, कॉलेज को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है और इस शिक्षा के मंदिर में जो अध्यापक शिक्षा देते है वह बहुत ही शालीन एवं व्यवहारिक होकर छात्रों को अच्छे बुरे का पाठ पढ़ाते हैं। मगर जिस कॉलेज में शिक्षक ही हैवान बन कर छात्रों की छोटी सी गलती की बड़ी खौफनाक सजा दे दें तो फिर ऐसे अध्यापकों को क्या कहा जाए।

ये है पूरा मामला

मामला सदर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पनारी स्थित पहलवान गुरुदीन प्रशिक्षण केंद्र कॉलेज का है, जहां पर परीक्षा दे रहे छात्र के साथ वहां पर उपस्थित अध्यापकों ने हैवानियत की हदें पार कर कमरे में बंधक बनाकर जमकर मारपीट की और वह भी केवल इसलिए कि छात्र ने स्कूल में लगे पौधे से सिर्फ एक फूल तोड़ लिया था। जिस पर वहां उपस्थित अध्यापकों ने छात्र से अभद्रता की और जब छात्र ने उनकी अभद्रता का विरोध किया तो उन्होंने उसे घसीट कर कमरे में ले जाकर उसके साथ जमकर मारपीट की।

इस मामले में पीड़ित छात्र आकाश रजक पुत्र अरुण कुमार रजक ने बताया कि वह केपीएस डिग्री कॉलेज ककरुआ का छात्र है और परीक्षाओं के लिए पहलवान गुरुदीन प्रशिक्षण कॉलेज परीक्षा केंद्र में वह परीक्षा दे रहा था। परीक्षा देने के बाद जब वह केंद्र से बाहर निकला तो ग्राउंड में अपने जूते पहनने लगा वहीं पर एक पेड़ लगा था जिससे उसने एक फूल अनजाने में तोड़ लिया। बस इसी बात को लेकर जैसे ही गेट से बाहर जाने लगा वहां मौजूद 3 शिक्षकों ने उसे घेर लिया और अभद्रता करने लगे। मैंने जब उनकी अभद्रता का विरोध किया तब उन तीनों टीचर मुझे पकड़ कर खींच कर कालेज के अंदर प्रिंसिपल अलका मैडम के कमरे में ले गए जहां पर उन्होंने अभद्रता पूर्ण बातें कर पकड़कर जमकर बेसबॉल के डंडों से मारपीट की। जहां पर उन्होंने मेरा मोबाइल भी छीन लिया और लगभग आधे घंटे तक मुझे कमरे में बंधक बनाए रखा।

साथ ही मुझे किसी से बात भी नहीं करने दी यहां तक कि मेरे पापा से भी फोन पर बात नहीं करने दी। किसी तरह माफी मांग कर में छूट कर बाहर निकला और मैंने कोतवाली पुलिस को एक प्रार्थना पत्र दिया मगर कोतवाली पुलिस ने भी मुझे यह कह कर चलता कर दिया कि अभी तुम्हारा हाथ नहीं टूटा है। इसलिए तुम्हारी रिपोर्ट नहीं लिखी जाएगी। जबकि मेरे हाथ और पैरों में मारपीट के निशान मौजूद हैं। उसके बाद मैंने पुलिस अधीक्षक को एक प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की। इस मामले में जब विद्यालय प्रबंधन तंत्र से बात की गई तो उन्होंने इस पूरे वाक्य से इनकार कर दिया।

Published On:
Apr, 06 2019 03:01 PM IST

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