सांभर झील में चला जेसीबी का पंजा, पुलिस और प्रशासन मौके पर

By: Hemant Kumar Joshi

Published On:
Jun, 12 2019 06:49 PM IST

  • हेमन्त जोशी. कुचामनसिटी. सांभर झील के संरक्षण का सपना अब बरसों बाद साकार होता नजर आ रहा है। दो साल पहले के एनजीटी के आदेशों की पालना अब नए सिरे से शुरु की गई है। दो साल पहले शुरु हुई कार्रवाई राजनीति की भेंट चढ गई थी, अब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आने के बाद एक बार फिर झील में जेसीबी मशीनों का पंजा चलने लगा है।


नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सितम्बर 2017 प्रशासन एवं विद्युत निगम के अधिकारियों को सांभर झील से अवैध नलकूप व अवैध विद्युत केबलें हटाने की कार्रवाई के आदेश दिए थे। एनजीटी के आदेशों पर प्रशासन के साथ-साथ नमक उद्यमियों में भी खलबली मच गई। लेकिन बैठकों के दौर के बाद महज फौरी कार्रवाई करके इतिश्री कर ली गई। भाजपा सरकार में दो साल के बीच कार्रवाई महज कागजों में दफन होकर रह गई। विद्युत निगम ने नमक उत्पादकों को सांभर झील में बिछी केबलें हटाने के नोटिस दिए। प्रशासनिक टीम ने झील में पहुंच कर कुछेक जगह कार्रवाई की। जिसकी विडियोग्राफी व फोटोग्राफी करवाई गई।

क्या है सच
एनजीटी के आदेशों के बाद अब भी ग्राम मोहनपुरा होते हुए जाब्दीनगर एवं गुढा-साल्ट तक करीब 25 किलोमीटर दूरी तक अब भी झील में तारों का जाल फैला हुआ है। कहीं जमींदोज केबलें जा रही है तो कहीं सतह पर ही बिछी हुई है। जगह-जगह नंगे तार खुले पड़े है। जिससे हरसमय करंट का अंदेशा बना रहता है। जगह-जगह खुले पड़े नलकूप हादसों को न्यौता दे रहे है। झील सूखने के बाद बारिश के दिनों में झील में प्रवास के लिए आने वाले विदेशी परिन्दें भी कम हो गए है। जबकि यहां फ्लेमिंगो, साइबेरियन सारस सहित कई प्रवासी पक्षियों का ठहराव होता है।

90 किलोमीटर में फैली है झील

नागौर जिले के नावां कस्बे से अजमेर जिले के आऊ सिनोदिया होते हुए यह झील जयपुर जिले के सांभर तक कुल 90 किलोमीटर तक फैली हुई है। लेकिन झील के नागौर व अजमेर जिले के क्षेत्र में ही अवैध रुप से नलकूप बनाकर विद्युत केबिलें बिछाई गई है। जहां अब भी हालात विकट बने हुए है।


करोड़ों का कारोबार है मुख्य कारण
सांभर झील में विद्युत निगम व प्रशासन की फौरी कार्रवाई के पीछे बड़ा कारण नावां का नमक उद्योग है। झील में यदि सख्ती से कार्रवाई कर सभी बोरवेल व विद्युत केबलें हटाई जाती है तो नावां का करोड़ों रुपए का नमक कारोबार बंद हो जाएगा। जो सीधे तौर पर झील से जुड़ा हुआ है। गौरतलब है कि नावां में करीब 2 हजार नमक उत्पादकों की ओर से सांभर झील के पानी से 30 हजार मेट्रिक टन नमक का उत्पादन किया जाता है। जो रिफाइनरियों पर पिसाई व आयोडीन मिलाकर शुद्ध करने के बाद मालगाडिय़ों व ट्रकों के माध्यम से दूसरे राज्यों में भिजवाया जाता है।

पहले भी आ चुके कई आदेश
एनजीटी से पहले सुप्रीम कोर्ट की ओर से भी झील सरंक्षण को लेकर आदेश दिए जा चुके है। जिस पर पिछली सरकार कांग्रेस सरकार ने प्रयास भी किया। सरकार के आदेशों पर प्रशासनिक अधिकारी दल बल के साथ झील में कार्रवाई के लिए पहुंचे।लेकिन नमक उद्यमियों के विरोध और बाद में सरकार के हस्तक्षेप से कोई कार्रवाई नहीं हो सकी और दल को बैरंग ही लौटना पड़ा।


अब फिर से शुरु हुई कार्रवाई

एनजीटी के आदेशों की अनुपालना प्रशासनिक टीम में तहसीलदार ओमप्रकाश शर्मा, सांभर साल्ट लिमिटेड के डी डी मीना, मुख्य प्रबंधक खिलसिंह, इन्द्रसिंह मीणा, विद्युत निगम के कर्मचारी, नगरपालिका की टीम एवं पुलिस की टीम झील क्षेत्र में पहुंची। जहां करीब एक दर्जन ट्यूबवैल नष्ट किए गए और विद्युत केबलें, पाइप, मोटरें जब्त की गई।

ठोस कार्रवाई से लगेगी रोक

झील में अवैध नलकूपों एवं विद्युत केबलें हटाने को लेकर एसडीएम ब्रह्मलाल जाट ने नावां तहसीलदार शर्मा को कार्रवाई के आदेश दिए हैं। प्रशासनिक कार्रवाई पर सांभर साल्ट की ओर से जेसीबी सहित अन्य संसाधन उपलब्ध करवाए गए। प्रशासन की ओर से पूरे झील क्षेत्र में कार्रवाई किए जाने पर ही नलकूपों एवं विद्युत केबलों का जाल हटाया जा सकेगा।

इनका कहना
एसडीएम के आदेशों पर सांभर झील में अवैध नलकूप, विद्युत केबलें हटाने की कार्रवाई शुरु की गई है। यह कार्रवाई आगामी दिनों में भी जारी रहेगी।
ओमप्रकाश शर्मा
तहसीलदार, नावां

Published On:
Jun, 12 2019 06:49 PM IST

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