...तो 'लेफ्टी' बच्चे होते हैं ज्यादा सफल,जाने किन वजहों से होते है खास

By: Suraksha Rajora

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Published: 13 Aug 2019, 02:42 PM IST

Kota, Kota, Rajasthan, India

कोटा. जिंदगी के इम्तहान में 'लेफ्टी' ज्यादा सफल रहते हैं। उनकी सफलता की वजह दिमाग का दायां हिस्सा है जो उन्हें ज्यादा तर्कशील और विश्लेषण क्षमता मुहैया कराता है। वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एजुकेशन में चल रहे शोध में इस बात का खुलासा हुआ है।


शोध में पता चला है कि 'लेफ्टीÓ बच्चे पढऩे-पढ़ाने में ज्यादा तेज होते हैं। बात जब किसी खास विषय पर कमांड की आती है तो उनका कोई सानी नहीं होता। शोध के शुरुआती नतीजे बताते हैं कि जिन बच्चों के दिमाग का दायां हिस्सा ज्यादा सक्रिय है वह तीक्ष्ण बुद्धि के होते हैं। उनकी तर्कशीलता, लक्षित विषय पर महारथ हासिल करने की ललक और उसे समग्रता से समझने की क्षमता आम बच्चों से खासी ज्यादा होती है। अचानक हुई घटना पर उनकी प्रतिक्रिया इतनी तेज होती है कि, जिन बच्चों का बायां दिमाग ज्यादा सक्रिय है वह तो उसे समझ ही नहीं पाते कि हुआ क्या।


जिन बच्चों का बायां दिमाग ज्यादा सक्रिय है वह हमेशा विकल्प की तलाश में जुटे रहते हैं। इंजीनियरिंग नहीं तो आईटीआई कर लेंगे, जैसे विचार मस्तिष्क में कौंधते हैं। जबकि जिन बच्चों का दायां दिमाग ज्यादा सक्रिय है उनका ध्यान इतना ज्यादा केंद्रित होता है कि जो एक बार ठान लिया उसे पूरा करके ही दम लेते हैं। उनकी सोच समग्र होती है, सहजता से कुछ भी सीख लेते हैं।


जबकि राइट हैंडर्स बच्चों का बायां दिमाग ज्यादा सक्रिय होता है, उन्हें कुछ समझाने के लिए सिलसिलेवार ही बताना पड़ेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कक्षा नौ से बारहवीं तक के दाएं और बाएं हाथ से काम करने वाले 250-250 बच्चों पर शोध शोध के बाद यह नतीजे सामने आए हैं।


क्यों पड़ी शोध की जरूरत

शायद ही कोई माता-पिता होंगे जो अपने बच्चे को डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बनाना चाहते हों, लेकिन बच्चे का दिमाग इसकी इजाजत देता है या नहीं यह कभी जानने की कोशिश नहीं करते। परिवार के दबाव में बच्चा जबरन तैयारी तो करता है, लेकिन अक्सर उसे असफलता हाथ लगती है। जबकि वह इतने ही समय में बेहतीन आर्टिस्ट, स्पोर्टसमैन या फिर दूसरी विधाओं में महारथ हासिल कर सकता है।


बच्चे का दिमाग जब दवाब में आता है तो उसका नतीजा आत्महत्या या डिप्रेशन जैसा आत्मघाती हो जाता है। वीआरएमयू के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आर.आर. सिंह और शोधार्थी प्रज्ञा त्रिपाठी, दो न्यूरोलॉजिस्ट और दो साइकोलॉजिस्ट की टीम के साथ अभिभावकों की इसी मुसीबत का हल तलाशने में जुटे हैं कि वह बच्चे की आदतें देखकर अंदाजा लगा सकें कि दिमाग का कौन सा हिस्सा उसे किस विधा में ज्यादा महारथ हासिल दिला सकता है।


ऐसे काम करता है मस्तिष्क

हमारा दिमाग दो हिस्सों (बायां गोलाद्र्ध और दायां गोलाद्र्ध) में बंटा होता है। दिमाग के दोनों हिस्से अपने अपनी दिशा के विपरीत के शारीरिक अंगों को नियंत्रित करते हैं। आमतौर पर पर दिमाग का बायां गोलाद्र्ध ज्यादा सक्रिय होता है। यही वजह है कि सामाजिक व्यवस्था से लेकर शैक्षणिक व्यवस्था तक में सीधे हाथ से काम करने वाले लोगों का बोल-बाला है और 'लेफ्टीÓ लोगों को हेय दृष्टि से देखा जाता है।

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