यहां प्रकृति खुद करती है शिव का अभिषेक

रावतभाटा रोड पर रथ कांकरा के समीप कराइयों में भगवान गेपरनाथ का मंदिर है। भीलों के शैव मतावलंबी गुरु ने मंदिर की स्थापना करवाई। क्षेत्र में प्रचीन काल से ही भील समाज के लोग निवास करते रहे हैं। 


कहा जाता है कि पूर्व में यह क्षेत्र भील राजाओं के अधीन था। यहां स्थापित शिवलिंग की यह विशेषता है कि यह दोहरी योनी में स्थापित है। इस तरह के शिवलिंग के उदाहरण यदा-कदा ही देखने को मिलते हैं। 


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गेपरनाथ के दर्शन के लिए 300 के करीब सीढि़यां उतरकर जाना पड़ता है।  मंदिर में बारह माह झरना बहता है। यह  भगवान शिव पर गिरता है तो एेसा लगता है मानो प्रकृति खुद भगवान शिव का अभिषेक कर रही हो। श्रद्धालुओं के अनुसार यह स्थान  साधु-संतों की तपस्थली भी रही है। यहां पर सीढि़यां नहीं थी, इन्हें बाद में बनवाया गया। इस स्थान को पर्यटन स्थल के रूप में भी देखा जाता है। 


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2008 में एक हादसे के बाद यह स्थान देशभर में चर्चा का विषय बन गया। मंदिर के रास्ते की सीढि़यां  ढहने से कराई में 35 महिलाएं व 20 बच्चे फंस गए थे। इन्हें मुश्किल से बाहर निकाला गया था। घटना में एक जने की मौत हो गई थी। यहां शिवरात्रि पर मेला लगता है।


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अघोरी रूप में होंगे महाकाल के दर्शन

सावन के दूसरे सोमवार पर रेतवाली स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर में  भंग शिवलिंग मंे महाकाल के अघोरी रूप के दर्शन करवाए जाएंगे। शाम को 7 बजे भस्म आरती होगी। 

इसी तरह कंसुआ स्थित कर्णेश्वर महादेव मंदिर में शाम को 4 बजे से विशेष झांकी के दर्शन होंगे। मंदिर के पुजारी श्याम गिरी ने बताया कि दूसरे सोमवार को भात व पंचमेवे से झांकी सजाई जाएगी। सुबह अभिषेक पूजन का दौर चलेगा। रामतलाई स्थित जगतमाता मंदिर में सुबह अभिषेक पूजन व शाम को बाबा अमरनाथ की गुफा में बर्फानी बाबा के दर्शन करवाए जाएंगे। 


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श्रद्धालु नंदी के मुख में प्रवेश कर बाबा अमरनाथ की गुफा को पार करते हुए बाबा के दर्शन करेंगे। तलवंड़ी स्थित राधाकृष्ण में भंग व पंचमेवे से शृंगार किया जाएगा। शाम को 6.30 बजे शृंगार के दर्शन करवाए जाएंगे। टिपटा स्थित गोकर्णेश्वर महादेव मंदिर में अजय भट्ट के सान्निध्य में आयोजन होंगे। घनश्याम सोरल ने बताया कि शाम को 7.30 बजे से भात से शृंगारित भगवान शिव की झांकी के दर्शन करवाए जाएंगे। 

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