तो यह फैसला भी अब राहुल गांधी ही लेंगे !

By: Rajesh Tripathi

Published On:
Jan, 01 2019 08:49 PM IST

 
  • अदंरखाने मामला कुछ गड़बड़ है...

     

मुख्यमंत्री के चयन , मंत्रिमंडल के गठन और फिर विभागों के बंटवारे तक के फैसलों में जो सहमति राज्य नेतृत्व पर बननी चाहिए थी उसके लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दिल्ली की राह देखनी पड़ी है। हर फैसले में कांग्रेस अध्यक्ष का दखल यह दर्शाने के लिए काफी है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर भले ही घमासान थम गया हो लेकिन इसके साइड इफेक्टस बड़े फैसलों में हो रही देरी के रूप में सरकार और जनता को भुगतने पड़ रहे हैं।

स्पीकर को लेकर नहीं बन रही सहमति
विधानसभा अध्यक्ष को लेकर अभी भी आम सहमति नहीं बन पाई है। पहले यह माना जा रहा था कि सीपी जोशी को इस पद के लिए मनाने की कोशिशे की जा रही है। लेकिन उनके न मानने पर अब दोबारा गेंद राहुल गांधी के पाले में है। यही उम्मीद जताई जा रही है कि इस मामले में भी अब कांग्रेस अध्यक्ष ही फैसला लेंगे।

Published On:
Jan, 01 2019 08:49 PM IST

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