सावधान... बच्चों के भविष्य की करो चिंता

By: Abhishek Gupta

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Updated: 16 May 2021, 01:42 PM IST

Kota, Rajasthan, India

कोटा. पहली व दूसरी लहर में जरुर बच्चे बच गए, लेकिन अब इन बच्चों को तीसरी लहर में भी बचाने की सख्त जरुरत है। इसके लिए हमें अभी से सावधान रहना होगा। बच्चों के भविष्य की चिंता करनी होगी, नहीं तो हालात विकट होंगे। क्योंकि दूसरी लहर में तो पूरा मेडिकल सिस्टम ही ध्वस्त हो गया। चारों तरफ हाहाकार मच गया। चीत पुकार सुनाई दिया। ऑक्सीजन, बेड्स, दवाइयां व अन्य उपकरण कम पड़ गए। हालात यह हो गए कि मरीजों को अस्पतालों में जगह नहीं मिली।

घरों व अस्पतालों में ही मरीजों ने दम तोड़ दिया। ऐसे में प्रशासन को बच्चों की भविष्य की चिंता को लेकर अभी से तैयारियां शुरू करनी होगी, तभी हम इस महामारी का मुकाबला कर सकेंगे। दरअसल, वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों की सीएचसी-पीएचसी व जिला अस्पताल रामपुरा में भी बच्चों के लिए कई जरुरी संसाधन नहीं है। डॉक्टर्स के पद रिक्त है। वेन्टिलेटर व ऑक्सीजन बेड्स नहीं है। गंभीर बच्चों के लिए पूरे जिले में एक मात्र जेके लोन अस्पताल है। सभी उस पर निर्भर है। हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने तीसरी लहर की तैयारियां शुरू कर दी है, लेकिन चिकित्सा विभाग सुस्त बैठा है।

अब तक 50 बच्चे भर्ती
कोरोना की दूसरी लहर में शिशुओं के संक्रमित होने के मामले भी आए है। हालांकि यह काफी कम रहे। जेके लोन अस्पताल में 18 बेड का कोविड-19 वार्ड अलग से बना हुआ है। इसमें करीब अब तक 50 से ज्यादा बच्चों को भर्ती किया जा चुका है। वर्तमान में यहां पर 8 बच्चे भर्ती हैं। मेडिकल कॉलेज में हो रही कोविड-19 जांच के अनुसार अब तक करीब 400 बच्चे कोविड-19 संक्रमित सामने आ चुके हैं। हालांकि लक्षण नहीं होने के चलते अधिकांश को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया है।

यहीं है हमारी ताकत
जेके लोन अस्पताल- 114 बेड्स का न्यूनेटल आईसीयू - 12 बेड का पीआईसीयू- 9 बेड्स का इमरजेंसी- 40 वेन्टिलेटर- 18 बेड का कोविड वार्ड-156 बेड्स का नया भवन बन रहा, सितम्बर तक कार्य होगा पूरा

पदों की यह स्थिति - 3 प्रोफसर में से 1 प्रोफेसर कार्यरत- 10 असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत- 9 मेडिकल ऑफिसर कार्यरत- 6 सीनियर रेजिडेंट कार्यरत- 16 में से 15 रेजिडेंट कार्यरत- 5 लो कम रेजिडेंट, सभी भरे

रामपुरा जिला अस्पताल- 3 बेड का एनबीएसयू, तीन वार्मर- 10 बेड का पीडियाट्रिक वार्ड - 2 डॉक्टर पद स्वीकृत- दोनों कार्यरत - 2 वेन्टिलेटर- ऑक्सजीन बेड्स नहीं- 16 ऑक्सीजन सिलेण्डर- वार्ड में सेन्ट्रल ऑक्सीजन लाइन नहीं

ग्रामीण क्षेत्र - 16 सीएचसी- 13 शिशु रोग विशेषज्ञ के पद स्वीकृत,10 कार्यरत- हर सीएचसी पर 20-25ऑक्सीजन सिलेण्डर की व्यवस्था- हर सीएचसी पर 10 कंसंट्रेटर- किसी में भी वेन्टिलेटर की व्यवस्था नहीं- नीकू-पीकू अलग से वार्ड नहीं - सामान्य जनरल वार्डों में इलाज की व्यवस्था- जिले में करीब 6 लाख बच्चे- 200 बच्चों को संभालने की व्यवस्था, ज्यादा में बिगड़ेंगे हालात- जेके लोन अस्पताल में 78 बेड्स को ऑक्सीजन में तब्दील कर रहे- 18 बेड्स के कोरोना वार्ड को ऑक्सीन बेड्स में तब्दील होगा।- करीब 80 सिलेण्डर की व्यवस्था- रेमडेसिविर व अन्य जरुरी दवाइयों की डिमांड भेजी

इनका यह कहना
तैयारियां शुरू तीसरी लहर की हमने तैयारियां शुरू कर दी है। जेके लोन अस्पताल में एसडीआरफ फंड से 2 करोड़ 80 लाख की स्वीकृति मिल चुकी है। यह राशि आ भी चुकी है। इससे अस्पताल में गायनिक, पीडियाट्रिक व अन्य सभी वार्डों में सेन्ट्रल ऑक्सीजन लाइन डाली जाएगी। इसी राशि में ऑक्सीजन प्लांट व एमजीपीएस सिस्टम लगेगा। इसके टेंडर जल्द जारी करेंगे। इसके अलावा यूडीएच मिनिस्ट्री से 100 सिलेण्डर का ऑक्सीजन प्लांट व डीआडीओ से 90 सिलेण्डर का अलग से ऑक्सीजन प्लांट लगेगा।
डॉ. विजय सरदाना, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज

तीसरी लहर में बच्चों को बचाने के लिए सबसे पहले बच्चों व उनकी माताओं को वैक्सीनेशन होना चाहिए। इसके लिए जल्द ट्रायल होना चाहिए। घर के सदस्यों को कोविड की पालना करनी होगी। मास्क पहनकर रखें। बच्चों की इम्युनिटी पर ध्यान रखें। शारीरिक श्रम के लिए उन्हें घर पर ही खेलने के लिए प्रेरित करें। करीब 30 से 40 प्रतिशत आबादी को वैक्सीनेशन होना चाहिए, तभी हम लहर से मुकाबला कर सकेंगे।

डॉ. गोपीकिशन शर्मा, शिशु रोग विशेषज्ञ, जेके लोन अस्पताल

सीएचसी व पीएचसी पर पुख्ता प्रबंध कर रहे है। ऑक्सीजन सिलेण्डरों की व्यवस्था की गई और कंसंट्रेटर भी लगाए गए है। डॉक्टर्स के पद लगभग भरे हुए है, फिर भी सभी जगहों की पूरी व्यवस्थाओं को रिव्यू कर प्लान बनाएंगे और उनके अनुसार व्यवस्था करेंगे। जिससे मरीजों को प्राथमिक तौर पर सीएचसी व पीएचसी पर ही उपचार मिल सके।

डॉ. बीएस तंवर, सीएमएचओ, कोटा

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