ले डूबा लालच ! तत्कालीन एसआई सुगना ने दलाल से साध रखा था संपर्क , दस दिन में फोन पर की 576 बार बात,

By: Rajesh Tripathi

Updated On: 04 Jun 2019, 10:48:21 PM IST

 
  • एसीबी के जाल में कैसे फंसी ये महिला पुलिस अफसर..जानिए पूरा मामला

कोटा. एसीबी कोटा ने 20 हजार रुपए की रिश्वत लेने के मामले में करीब 53 दिन पहले गिरफ्तार जवाहर नगर की तत्कालीन महिला एसआई सुगना वर्मा व दो दलालों के खिलाफ जांच में दोषी मानते हुए मंगलवार को एसीबी न्यायालय में चालान पेश किया।

एसीबी के ठाकुर चन्द्रशील ने मंगलवार को न्यायालय में तत्कालीन सुगना वर्मा व दो दलालों के खिलाफ मामले की जांच पूरी कर 150 पेजों का चालान एसीबी न्यायालय में पेश किया। चालान 53 दिन में प्रस्तुत कर दिया गया। इसके साथ बातचीत की सीडी भी प्रस्तुत की गई। एसीबी ने चालान में बताया कि सुगना वर्मा का डॉ.राकेश से परिचय महिला थाने में हुआ था। जहां डॉ.राकेश से छोटे भाई पर उसकी पत्नी द्वारा किए केस के सिलसिले में उससे मिलना था। इसके बाद दोनों में खूब बातचीत होती थी।

जेठ के खाते में पहले ही डलवा दी रकम
सुगना ने 20 हजार रुपए डॉ. राकेश को दिए तथा अपने जेठ के एसबीआई खाते में 45,500 जमा करवाने को कहा। उसने कहा शेष रकम बाद में देगी। राकेश ने 25,500 रुपए मिलाकर पूरनमल के खाते में जमा करवाए थे।

मुकेश से भी था सम्पर्क
एसीबी ने बताया कि सुगना व डॉ. राकेश के बीच मोबाइल पर 1 से 11 अपे्रल के मध्य 576 बार बातचीत हुई। वहीं 4 से 11 अपे्रल तक मुकेश से सुगना की 13 बार बात हुई।

जमानत खारिज
एसीबी की ओर से ट्रेप के बाद कोटा एसीबी अदालत के बाद तीनों आरोपियों की हाईकोर्ट से भी जमानत खारिज हो गई। ऐसे में चालान 60 दिन में प्रस्तुत नहीं होता तो आरोपियों को जमानत मिल सकती थी, सात दिन पहले मंगलवार को न्यायालय में चालान पेश कर दिया।

नहीं दी स्वीकृति
एसीबी द्वारा ट्रेप की कार्रवाई की जाने के बावजूद भी फिलहाल एसीबी को पुलिस विभाग से अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली। अभियोजन स्वीकृति पुलिस के डीजी स्तर के अधिकारी द्वारा जारी की जाती है।

यह है मामला
जवाहर नगर निवासी मुकेश अरोड़ा ने 9 अपे्रल 2019 को एएसपी देहात को दी शिकायत में बताया कि उसकी तलाकशुदा पत्नी मीनाक्षी जैन ने उसके व उसके परिजनों के खिलाफ जवाहर नगर थाने में चोरी का झूठा मुकदमा दर्ज करवाया है। इससे बाहर निकालने के लिए जांच अधिकारी तत्कालीन एसआई सुगना वर्मा 2 लाख रुपए रिश्वत मांग रही है। उसने असमर्थता जताई तो एक लाख और बाद में 50 हजार पर सहमति जताई। उसने 20 हजार रुपए सुगना को 10 अपे्रल 2019 को थाने में दिए तो मामले का सत्यापन हो गया। इसी दिन शाम को सुधा हॉस्पिटल के सामने पुलिया के नीचे एसीबी ने छावनी निवासी फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. राकेश कुमार महावर व सकतपुरा पुरानी चंबल कॉलोनी निवासी आकाश राठौड़ को 30 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया, जबकि सुगना वर्मा को कोटा सिटी एसपी ऑफिस से चुनाव मीटिंग में भाग लेते हुए गिरफ्तार किया था।

एसीबी की ओर से ट्रेप के बाद कोटा एसीबी अदालत के बाद तीनों आरोपियों की हाईकोर्ट से भी जमानत खारिज हो गई। ऐसे में चालान 60 दिन में प्रस्तुत नहीं होता तो आरोपियों को जमानत मिल सकती थी, सात दिन पहले मंगलवार को न्यायालय में चालान पेश कर दिया।

नहीं दी स्वीकृति
एसीबी द्वारा ट्रेप की कार्रवाई की जाने के बावजूद भी फिलहाल एसीबी को पुलिस विभाग से अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली। अभियोजन स्वीकृति पुलिस के डीजी स्तर के अधिकारी द्वारा जारी की जाती है।

यह है मामला
जवाहर नगर निवासी मुकेश अरोड़ा ने 9 अपे्रल 2019 को एएसपी देहात को दी शिकायत में बताया कि उसकी तलाकशुदा पत्नी मीनाक्षी जैन ने उसके व उसके परिजनों के खिलाफ जवाहर नगर थाने में चोरी का झूठा मुकदमा दर्ज करवाया है। इससे बाहर निकालने के लिए जांच अधिकारी तत्कालीन एसआई सुगना वर्मा 2 लाख रुपए रिश्वत मांग रही है। उसने असमर्थता जताई तो एक लाख और बाद में 50 हजार पर सहमति जताई। उसने 20 हजार रुपए सुगना को 10 अपे्रल 2019 को थाने में दिए तो मामले का सत्यापन हो गया। इसी दिन शाम को सुधा हॉस्पिटल के सामने पुलिया के नीचे एसीबी ने छावनी निवासी फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. राकेश कुमार महावर व सकतपुरा पुरानी चंबल कॉलोनी निवासी आकाश राठौड़ को 30 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया, जबकि सुगना वर्मा को कोटा सिटी एसपी ऑफिस से चुनाव मीटिंग में भाग लेते हुए गिरफ्तार किया था।

Updated On:
04 Jun 2019, 10:46:29 PM IST

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