राजस्थान के बाद अब पश्चिम बंगाल में एंटी सीएए प्रस्ताव पारित

कोलकाता

पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार को एंटी सीएए प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित किया गया। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा कि सीएए जनविरोधी है। इस कानून को फौरन निरस्त किया जाना चाहिए।

विरोधी पार्टियों से प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि ''तुच्छ मतभेदों को दूर रखने और देश को बचाने के लिए एकजुट होने का वक्त आ गया है।'' वे इस कानून को राज्य में लागू नहीं करने देंगी। इसके लिए विपक्ष के सहयोग की जरूरत है। लम्बी चली चर्चा के बाद प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
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क्या है प्रस्ताव में?

सीएए के खिलाफ पारित प्रस्ताव में केंद्र सरकार से सीएए को रद्द करने, राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की योजनाओं को निरस्त करने की अपील की गई है।

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एंटी सीएए प्रस्ताव पास करने वाला चौथा राज्य

एंटी सीएए प्रस्ताव पारित करने वाला पश्चिम बंगाल चौथा राज्य बन गया है। इससे पहले केरल, पंजाब और राज्यस्थान की सरकारें एंटी सीएए प्रस्ताव पारित कर चुकी हैं। केरल में 31 दिसंबर को, पंजाब में 17 जनवरी को और राजस्थान में 25 जनवरी को एंटी सीएए प्रस्ताव पारित किया गया था।
पश्चिम बंगाल से पहले केरल में 31 दिसंबर को, पंजाब में 17 जनवरी को और राजस्थान में 25 जनवरी को यह प्रस्ताव पारित हो चुका है। केरल में वामदलों की सरकार है। वहीं पंजाब और राजस्थान में कांग्रेस सत्ता में है।

गैर-बीजेपी शासित राज्यों के कदम को केंद्र सरकार ने असंवैधानिक बताया है। केंद्र सरकार का कहना है कि कोई भी राज्य संसद से पारित कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित नहीं कर सकती है।

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