पहले प्रभावित फिर अपने ही कर्मचारियों से घिरे अफसर

By: Editorial Khandwa

Published On:
Apr, 01 2017 04:24 AM IST

  • मंडलेश्वर में आयोजित लैंडर्स की बैठक में महेश्वर परियोजना के प्रभावितों ने रखी मांग, परियोजना के कर्मचारियों ने रुके हुए वेतन और वेतन बढ़ाने की मांग रखी

खरगोन.
शुक्रवार को मंडलेश्वर में आयोजित परियोजनाकर्ताओं की बैठक की जानकारी लगते ही वहां बांध से प्रभावित हो रहे लोगों को जमावड़ा लग गया। जैसे ही अफसर परियोजना स्थल का निरीक्षण कर बैठक के लिए रेस्ट हाउस की ओर बढ़े प्रभावितों ने उन्हें सात नंबर गेट पर रोक लिया। करीब दस मिनट तक प्रभावितों ने पीएफसी के अफसरों को घेरे रखा। जिसपर उन्हें आश्वस्त किया गया कि फंड रिलीज होते ही पहली प्राथमिकता पुनर्वास का काम होगा, लेकिन यह नहीं बताया गया कि पुनर्वास के लिए कितना फंड रिलीज किया गया है।
सीईओ से एमडी बनाए गए पीसी पंकज के नेतृत्व में महेश्वर परियोजना स्थल पर आयोजित लैंडर्स की दूसरी बैठक काफी हंगामेदार रही। हालांकि बैठक को हंगामे से बचाने के लिए ऐसे लैंडर्स को दूर रखा गया जो यहां मुश्किल पैदा कर सकते थे, लेकिन अफसर परियोजना से प्रभावित हो रहे लोगों के हंगामे से नहीं बच पाए। अफसरों की ताक में खड़े प्रभावितों ने अफसरों का काफिला देखते ही हमला बोल दिया। सभी अफसरों को घेरकर करीब दस मिनट तक जमकर बहस हुई। सुलगांव, पथराड़, भट्टयाण, मर्दाना, ससाबड़, अमलाथा, नगावां आदि गांवों से आए प्रभावित कैलाश पाटीदार, अंतरसिंह पटेल, महादेव पाटीदार, नाना उमरावसिंह, भगवान बिल्लौरे, संजय निगम, राधु पाटीदार एवं नत्थू कोचले के साथ करीब 40 प्रभावितों ने घेरकर कहा कि परियोजना शुरू करने से पहले प्रभावितों को पुनर्वास करो। प्रभावितों ने यह सवाल भी किया कि पुनर्वास के लिए कितनी राशि आरक्षित की गई है इसका जवाब दो। प्रभावितों से घिरे एमडी पीसी पंकज ने कहा कि फंड रिलीज होते ही सबसे पहली प्राथमिकता से परियोजना के पुनर्वास कार्यों को पूर्ण किया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि पुनर्वास के लिए कितनी राशि स्वीकृत की गई है। न ही यह बताया कि मुआवजा पुराने या नए कानून के तहत दिया जाएगा।


एक इंच पानी नहीं आने देंगे
परियोजना से प्रभावित हो रहे  सुलगांव, पथराड़, भट्टयाण, मर्दाना, ससाबड़, अमलाथा, नगावां के ग्रामीणों ने कहा कि जब तक इन गांवों के पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती तब तक इन गांवों में एक इंच पानी नहीं आने देंगे। इस मामले में गांव के अंतरसिंह पटेल ने ग्रीन ट्रिब्यूनल में एक याचिका भी लगा रखी है। पटेल के अनुसार मुआवजा और विस्थापन में भारी अनियमितताएं हैं। जब तक इन्हें दुरुस्त नहीं कर लिया जाता तब तक हम लोग गांव खाली नहीं करेंगे।
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कर्मचारियों को भी आश्वासन
कंपनी में कार्यरत स्टाफ  व एक्जेक्यूटिव्स ने भी 19 माह के बकाया वेतन की मांग पावर फायनेंस कार्पोरेशन के जीएस पात्रा व निदेशक वित्त पीके वाजपेयी के समक्ष रखी। इस मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने अफसरों को दोनों अफसरों के साथ एमडी पंकज को भी ज्ञापन सौंपा। इसके साथ ही संविदा आधार पर काम कर रहे कर्मचारियों ने भुगतान कलेक्टर दरों के आधार पर करने की मांग भी रखी। हालांकि अफसर कलेक्टर दर को नकार गए और कहा कि निर्माण व पुनर्वास कार्यो के लिए वित्त उपलब्ध  होते ही प्राथमिकता से बकाया वेतन का भुगतान किया जाएगा।


विरोधियों को भगाने के बादभी कोरम पूरा

परियोजना का विरोध आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता और प्रभावित ही नहीं कर रहे थे। इसके विरोध में परियोजना से जुड़े लैंडर्स भी थे। यह लैंडर्स में बैठक में शामिल होकर विघ्न उत्पन्न करने वाले थे। अफसरों ने इन लैंडर्स को कर्मचारियों के दम पर यहां से खदेड़ दिया। दो लैंडर्स के खदेड़े जाने के बाद भी बैठक के लिए जरूरी कोरम पूरा हो गया। कोरम पूरा होते ही कामन लोन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हो गए।

आगे क्या
बैठक में कामन लोन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर होने का अर्थ है कि पीएफसी ने परियोजना में राशि लगाने वाली सभी एजेंसियों को अपने पक्ष में कर लिया है। इस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर के बाद परियोजना को शुरू करने के लिए फंड रिलीज कर दिया जाएगा। कंपनी के पास अपने कर्मचारियों को उनके रुके वेतन देने के साथ काम को शुरू करने की प्राथमिकता है। परियोजना में अब भी सबसे बड़ा काम पुनर्वास और विस्थापन होगा। पुनर्वास में जहां प्रभावित दो हजार करोड़ की राशि बता रहे हैं वहीं परियोजना से जुड़े अफसर 900 करोड़ रुपए की राशि बता रहे हैं।

Published On:
Apr, 01 2017 04:24 AM IST

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