सबसे महंगी बिजली - बिल चुकाने में ही चली जाती है आधी कमाई

By: deepak deewan

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Published: 24 Aug 2019, 07:43 PM IST

Harda, Harda, Madhya Pradesh, India

खंडवा. खानशाहवली अहमद नगर के 200 परिवारों को पिछले 5-6 साल से अस्थाई कनेक्शन देकर बिजली दी गई है। विद्युत वितरण कंपनी द्वारा इन उपभोक्ताओं को औसत व मनमाने तरह से 3 हजार से 10 हजार रुपए तक बिल थमाए जा रहे हैं। बिलों के भार से इन गरीब उपभोक्ताओं की कमर टूट रही है। बिजली कटने के डर से उपभोक्ता हर माह बिल जमा कर रहे। कुछ उपभोक्ता अस्थाई कनेक्शन लेने में सक्षम नहीं हैं। अधिक बिल, अस्थाईमीटर की परेशानी झेल रहे उपभोक्ताओं का सब्र का बांध शुक्रवार को टूट पड़ा। अहमद नगर व आसपास के क्षेत्र के 70 महिला-पुरुष एकत्रित होकर दोपहर 12 बजे आनंदनगर स्थित मप्र विद्युत वितरण कंपनी शहर संभाग पहुंचे। अवकाश होने से दफ्तर बंद था। इससे उपभोक्ता आधे घंटे से ज्यादा देर तक बिजली कंपनी के अधिकारी का इंतजार करते रहे। सूचना मिलने पर दोपहर 12.30 बजे एग्जीक्यूटिव इंजीनियर मनेंद्र गर्ग अपने दफ्तर पहुंच गए। उनके सामने उपभोक्ताओं ने अपनी समस्या रखी।

बिल भरने में जा रही आधी कमाई
इन पीडि़तों ने बताया, हम लोग गरीब परिवार से हैं। कोई हम्माली करता है तो किराए के ऑटो चलाता है। महिलाएं घर-घर जाकर बर्तन धोती हैं। हमारी कॉलोनी के 90 फीसदी लोगों के घर अस्थाई बिजली कनेक्शन है। पिछले कुछ माह से बिलों की राशि भी 2-3 गुना बढ़ गई। आधी कमाई बिल भरने में जा रही। हम गरीबों का कुछ करें। स्थाई मीटर लगाएं। पीड़ा सुनने के बाद एई बोले कि आईपीडीएस योजना के तहत खंबे व केबल डालने थे। ठेकेदार आधा-अधूरा काम छोडकऱ चला गया। कुछ पोल खड़े कर केबल भी डाली, लेकिन लाइन चालू नहीं की। इससे अभी तक स्थाई मीटर कनेक्शन नहीं हो पाए। समस्या के निराकरण के लिए ठेकेदार व इंदौर ऑफिस को लिखा है। एई ने 27 अगस्त को खुद मौके पर जाकर स्थिति देखने का आश्वासन दिया।

ये आती है परेशानी
300 से 400 मीटर दूर से केबल डाल अस्थाई बिजली कनेक्शन मिला। केबल का खर्च ज्यादा हुआ।
लंबी दूरी की केबल को लाने के लिए बीच-बीच में लकड़ी या लोहे के पोल लगाए। जो हर कभी गिर जाते। जिससे करंट का डर रहता है।

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