इस वजह से डाॅक्टर भार्गव ने बीजेपी प्रवक्ता पर जूता फेंका

By: Vinod Nigam

Published On:
Apr, 19 2019 09:15 AM IST

 
  • आयकर विभाग ने डाॅक्ठर भार्गव के घर, हाॅस्पिटल और अन्य ठिकानों में छापेमारी कर पकड़ी थी करोड़ों की संपत्ति, ग्वालटोली थाने में दर्ज कराया था मुकदमा, पिछले पांच से दिल्ली को बनाया ठिकाना।

कानपुर। बीजेपी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हाराव की प्रेस काफ्रेंस में जूता फेंकने के बाद कानपुर के सिविल लाइंस निवासी डाॅक्टर शक्ति भार्गव फिर से सुर्खियों में आ गया। भार्गव टैक्स चोरी का आरोपी है। दिसम्बर 2018 में उसके घर व कई ठिकानों में आयकर विभाग ने छापेमारी की थी और करोड़ों की नकदी बरामद कर इस पर ग्वालटोली थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। आयकर विभाग के हाथ कई दस्तावेज लगे। जिसमें खुलाशा हुआ था कि कांग्रेस की सरकार के कार्यकाल के दौरान भार्गव ने भार्गव नाम से हाॅस्पिटल खोला और फिर ब्रिटिश इण्डिया काॅरपोरेशन के तीन बंगले, 5 करोड़, 2.40 करोड़ और 4.10 करोड़ रुपये यानि कुल साढे ग्यारह करोड में खरीदे थे। जिनकी कीमत उस वक्त कई गुना अधिक थी। साथ ही इसके पास से एक लाख से ज्यादा की पुरानी करेंसी मिली थी। डाॅक्टर भार्गव पांच माह पहले दिल्ली चला गया था और वहीं रह रहा था। डाॅक्टर की मां ने बताया कि आईटी की रेड के बाद बेटा मानसिक तौर पर बीमार है और अपनी बर्बादी के पीछे भाजपा को मानता है।

ग्वालटोली में दर्ज है मुकदमा
भाजपा प्रवक्ता पर जूता फेंकने के बाद डाॅक्टर शक्ति भार्गव फिर से सुर्खियों में आ गया। दिसबंर 2018 में आयकर विभाग की टीम ने इसके घर, फार्महाउस और हाॅस्पिटल में छामा मारा था। जहां से टीम को नकदी के अलावा करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज मिले थे। भार्गव ने अधिकारियों को मिलाकर करीब 30 करोड़ कीमत के तीन बंगलों को महज 11 करोड़ में खरीदी थी। आयकर विभाग से बचने के लिए भार्गव ने बंगलों की रजिस्ट्री अपनी पत्नी व बच्चों के नाम कराई थी। इसको लेकर आयकर विभाग डॉक्टर भार्गव के खिलाफ ग्वालटोली और इनकी मां डॉक्टर दया भार्गव के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट भी दर्ज करा चुकी है।

पुरानी करेंसी बरामद
आयकर विभाग की टीम को डॉक्टर शक्ति भार्गव के तिलक नगर स्थित आवास व सिविल लाइंस स्थित भार्गव हास्पिटल छापे के दौरान एक लाख रुपये की पुरानी करेंसी मिली थी वहीं सिविल लाइंस में डॉक्टर दया भार्गव की अलमारी से 42 हजार रुपये की पुरानी करेंसी मिली थी। जांच में आयकर अधिकारियों के हाथ डॉक्टर. शक्ति भार्गव के आठ करोड़ रुपये के निवेश के कागज लगे। अधिकारियों के अनुसार यह निवेश रीयल इस्टेट से जुड़ी स्काईलाइन प्राइवेट लिमिटेड में किया गया था। इसमें अनूप अग्रवाल उनके सहयोगी थे। आयकर अधिकारियों ने पता किया था तो जानकारी मिली थी कि अनूप अग्रवाल रीयल इस्टेट के कारोबार से जुड़े रुद्रा ग्रुप के प्रबंध निदेशक थे। आयकर उनके तिलक नगर स्थित आवास के साथ ही लखनऊ और वाराणसी आफिस में भी छापा मारा था।

सात लाॅकर मिले
आयकर विभाग को दोनों भाइयों के सात लॉकर मिले थे। इसमें दो लॉकर इलाहाबाद बैंक, दो कोटक महिंद्रा, तीन बैंक आफ बड़ौदा में हैं। उस समय इन लॉकर में एक करोड़ रुपये नकदी होने की बात स्वीकार की गई थी। आयकर विभाग के इस छापे में किसी ने भी कोई अघोषित धन सरेंडर नहीं किया था। इस छापे के दौरान आयकर ने कुल सात स्थानों पर कार्रवाई की थी। इस मामले की जांच के लिए आयकर अधिकारियों ने दिल्ली तक को खंगाल लिया था। कुछ कनेक्शन को तलाशने के लिए वहां तक की टीम का सहारा लिया था। नोटिस के जरिए विभाग ने डाॅक्टर भार्गव से इस संपत्ति के बारे में जाकनारी मांगी, पर उन्होंने नहीं दी।

भाजपा का सबसे बड़ा विरोधी
कंग्रेस और समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान सफेदपोशों की मदद से डाॅक्टर भार्गव ने कानपुर की सरकारी जमीनों को अनौ-पौने दामों में खरीदा। हाॅस्पिटल से लेकर आॅलीशान बंगले कानपुर के अलावा देश के कई शहरों में बनवाए। 2014 में सत्ता परिवर्तन के बाद डाॅक्टर भार्गव आयकर की रडार पर आए और उन पर कार्रवाई हुई। इसी के बाद डाॅक्टर भार्गव भाजपा से रंजिश माननें लगे। डाॅक्टर शक्ति भार्गव की मां दया भार्गव ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उनका बेटा मानसिक रूप से बीमार है और उन्होने पिछले एक साल से उसका चेहरा भी नहीं देखा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से उसने भाजपा के प्रवक्ता पर जूता फेंका, इससे के कारण हमने उसे सारे रिश्ते तोड़ लिए हैं।

Published On:
Apr, 19 2019 09:15 AM IST

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