नई करेंसी पर भी जालसाजी जोरों पर, नकली नोट खपाने वाले राज्यों में यूपी पांचवे नंबर पर

कानपुर। दावा किया जा रहा था कि नोटबंदी के बाद नकली नोटों का कारोबार पूरी तरह से ठप हो जाएगा, मगर हालत यह है कि नई करेंसी भी नकली नोटों में खो गई है। नकली नोटों के मामले में उत्तरप्रदेश ऐसा पांचवा राज्य है, जहां भारी मात्रा में नकली नोट बाजार में खपाए जा चुके हैं। कानपुर निवासी राज्यसभा सांसद चौधरी सुखराम सिंह ने जब सदन में नकली नोटों को लेकर सवाल उठाया तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए।

यूपी देश में पांचवे नंबर पर
नकली नोटों के मामले में उत्तरप्रदेश देश के टॉप पांच राज्यों में शामिल है। देश की राजधानी दिल्ली नकली नोटों की भी राजधानी है और पहले नंबर पर है। दूसरे नंबर पर गुजरात, तीसरे नंबर पर तमिलनाडु, चौथे नंबर पर महाराष्ट्र और पांचवें नंबर पर उत्तरप्रदेश है। चौधरी सुखराम सिंह ने सदन में गृह मंत्रालय से पूछा था कि हाल में सीमा से लगे राज्यों में नकली नोटों की संख्या बढऩे की खबरों में कितनी सच्चाई है। उन्होंने अलग-अलग मूल्यवर्ग की पकड़ी गई नकली करेंसी का ब्योरा मांगा था। साथ ही सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी।

दो हजार के नकली नोट सबसे ज्यादा
दो हजार के नोटों की नकली खेप बाजार में सबसे ज्यादा है। दरअसल दो हजार के नकली नोट लाने-ले जाने में आसानी होती है। एक ही बार में दो हजार का नोट बाजार में तुड़वाकर छोटे असली वाले नोट मिल जाते हैं। बड़े व्यापारी भी थोक में कैश का लेन-देन करते हैं और असली नोटों की गड्डियों में नकली नोट आसानी से खपाए जा सकते हैं। दो हजार के नोट व्यापारी बैंक में जमा करने की बजाय कैश लेन-देन में ज्यादा इस्तेमाल करतें हैं, इसलिए ये पकड़ में भी कम आते हैं। दूसरे नंबर पर 500, तीसरे नंबर पर 100 और चौथे नंबर पर 200 रुपए के नोट हैं।

नकली नोट रोकने को सख्त हुई सरकार
नकली करेंसी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र और राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करने के लिए भारतीय करेंसी नोट समन्वय समूह बनाया गया है। जाली करेंसी के मामलों की जांच के लिए एनआईए ने टेरर फंडिंग और फेक करेंसी सेल का गठन किया गया है। जाली करेंसी की तस्करी रोकने के लिए भारत-बांग्लादेश के बीच समझौता किया गया है। निगरानी के लिए बेहद अत्याधुनिक टेक्नोलाजी का प्रयोग किया गया है।

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