ये हैं विचित्र बजरंगी बाबा, एक कथा सुनने पर भर देते हैं गोद 

By: Akansha Singh

Published On:
Sep, 13 2016 08:46 AM IST

  • मंदिर के पुजारी ने बताया कि जब कोई दंपति भगवान बजरंगबली के दरबार पर हाजिरी लगाने के लिए आता है तो उसे पहले सत्यनारायण की कथा मंदिर परिसर पर जोड़े से सुननी होती है।
विनोद निगम 
कानपुर। शहर से 40 किमी की दूरी पर स्थित कुड़नी गांव में प्राचीन हनुमान मंदिर है। मान्यता है कि जिस दंपति की गोद सूनी हो वह आकर यहां मंगलवार को सत़्यनारायण की कथा सुन ले तो उसकी गोद भर जाती है। मंदिर के पुजारी आदित्य शुक्ला ने बताया कि दंपति सिर्फ एक मंगलवार को आकर तालाब में स्नान करने के बाद सत्यनारायण भगवान की कथा निर्जला होकर सुने तो बजरंगबली के आर्शीवाद से उसके घर में पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। इतना ही नहीं दंपति भक्त को अपने पुत्र का नाम महाबीर प्रसाद रखना होता है। इस एतिहासिक मंदिर पर बुढ़वा मंगल के दिन कुश्ती का आयोजन भी किया जाता है। कुश्ती का आयोजन लगभग दो सौ साल से बदस्तूर चला आ रहा है। मंदिर की स्थापना के बारे में पुजारी का कहना था कि पांच सौ साल पहले तालाब में एक मूर्ति जल पर तैर रही थी। लोगों ने तालाब से मूर्ति को बाहर निकाला और तालाब से कुछ दूर एक नीम के पेड़ पर सटाकर रख दिया। दूसरे दिन ग्रामीण को मूर्ति लेने के लिए आए, लेकिन वह टस से मस नहीं हुई। कई दिनों तक लोगों ने मूर्ति को गांव ले जाने के लिए प्रयास किए, पर वह असफल रहे। बाद में गांव वालों ने चंदा लेकर वहीं नीम के पास मंदिर का निर्माण करवा दिया। तभी गांव के माली राधेश्याम को भगवान ने दर्शन दिया और कहा कि जिन भक्तों के घर में बालक न हो वह मंगलवार को मंदिर परिसर पर श्री सत्यनारायण भगवान की कथा सुने उसके घर में बालक जन्म लेगा। पुजारी के मुताबिक अभी तक जो दस्तावेज मंदिर प्रबंधक के पास हैं, इसमें 1946 से लेकर 2016 तक एक लाख लोगों के घर में भगवान हनुमान के प्रसाद से महाबीर पैदा हो चुके हैं। 


जन्म के बाद बेटे का नाम रखें महाबीर
मंदिर के पुजारी ने बताया कि जब कोई दंपति भगवान बजरंगबली के दरबार पर हाजिरी लगाने के लिए आता है तो उसे पहले सत्यनारायण की कथा मंदिर परिसर पर जोड़े से सुननी होती है। बजरंगबली के प्रसाद से उनके घर में महाबीर जन्म लेते हैं। पुजारी के मुताबिक दंपति को बता दिया जाता है कि आप घर के लिए चाहे जो नाम चुन लें, लेकिन कुंडली और लिखापढ़ी में महाबीर प्रसाद लिखवाना अनिवार्य होता है। इसके अलवा पहला मुंडन मंदिर परिसर पर ही होता है। साथ ही विवाह के फेरे लेने के बाद नवदंपति को घर की दहलीज पर कदम रखने से पहले कुड़नी मंदिर पर आकर भगवान बजरंगबली का आर्शीवाद लेना होता है। 


worship


राजा, रंक और फकीर की सुनते बजरंगी
मंदिर के पुजारी ने बताया कि यहां पर राजा रंक और फकीर की फरियाद राम भक्त हनुमान सुनते हैं। बुड़वा मंगल पर कुड़नी में एक से दो लाख भक्त भगवान हनुमान के दर्शन करने को आते हैं। चुनाव से पहले कानपुर के सांसद डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी गए थे और लोकसभा चुनाव जीतने के बाद बजरंगबली के दर पर जाकर माथा टेका था। 1989 को पूर्व सीएम कल्याण सिंह भी कुड़नी गए थे और भगवान राम के मंदिर के लिए मुराद मांगी थी। इसके अलवा बिठूर से पेशवा के साथ ही लक्ष्मी बाई भी यहां आकर अंग्रेजों से जीत के लिए मन्नत मांगी थी। 


यहां जटिल से जटिल रोग भी होते हैं दूर 
जो भक्त बुड़वा मंगल के दिन कुड़नी के भगवान बजरंगबली के दरबार पर आकर हाजिरी लगाते हैं, वह सब दुख हर लेते हैं। कुड़नी में आने वाले भक्त उन्हें अब भगवान डॉक्टर के नाम से भी पुकारते हैं। हनुमान मंदिर बगल में रोगियों के ठहरने के लिए घर हैं। उनके घर पर रोगी अपने हर प्रकार के रोगों के निवारण के लिए जुटते हैं। प्रत्येक मंगलवार को यहां तमाम रोगियों का जमावड़ा लगता है। भक्त अब तो उन्हें  डॉक्टर हनुमान का नाम इतनी तेजी से लोगों के बीच मशहूर होता जा रहा है कि लोग दूर-दराज से पूजा के लिए यहां आने लगे हैं। यहां तक कि पड़ोसी राज्यों में भी इस नाम की धूम मची है। कई बार स्थिति ऐसी बन जाती है कि श्रद्धालुओं के जत्थों को संभाल पाना पुलिस के आपे से बाहर हो जाता है। 

Published On:
Sep, 13 2016 08:46 AM IST

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