नहीं रहे बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के पूर्व कन्वीनर डॉ. रजवी

Alok Pandey

Publish: Sep, 12 2018 01:12:48 PM (IST)

बेकनगंज के आयशा सिद्दीका गर्ल्‍स इंटर कॉलेज के प्रबंधक डॉ. मोहम्‍मद वसीम रजवी 74 का मंगलवार तड़के 5.30 बजे पेंचबाग स्‍थित उनके आवास पर निधन हो गया. वह लंबे समय से लिवर के कैंसर से जूझ रहे थे. शाम 5.30 बजे बेनाझाबर स्‍थित बड़ी ईदगाह में उनकी तदफीन भी हुई.

बेकनगंज के आयशा सिद्दीका गर्ल्‍स इंटर कॉलेज के प्रबंधक डॉ. मोहम्‍मद वसीम रजवी 74 का मंगलवार तड़के 5.30 बजे पेंचबाग स्‍थित उनके आवास पर निधन हो गया. वह लंबे समय से लिवर के कैंसर से जूझ रहे थे. शाम 5.30 बजे बेनाझाबर स्‍थित बड़ी ईदगाह में उनकी तदफीन भी हुई. उनकी नमाज ए जनाजा में बड़ी संख्‍या में लोग मौजूद रहे. यतीमखाना प्रबंध समिति के सदस्‍य रहे डॉ. रजवी का मुस्‍लिम समाज में खासा प्रभाव रहा है. वे हलीम मुस्‍लिम डिग्री कॉलेज के सेक्रेटरी भी रह चुके हैं.

आईएमए से भी जुड़े रहे
वह पेशे से चिकित्‍सक थे और आईएमए से भी जुड़े रहे. 1992 93 में डॉ. रजवी बाबरी मस्‍जिद एक्‍शन कमेटी के कन्‍वीनर भी बनाए गए थे. उनके निधन पर तहारत मंच की चमनगंज में एक बैठक हुई, जिसमें डॉ. वसीम को खिराज ए अकीदत पेश की गई. इसमें संयोजक डॉ. मुस्‍तफा इस्‍लाम, तौहीदआलम बरकाती, मोहम्‍मद शारिक नक्‍शबंदी, नफीस नूरी रहे. इसके अलावा मोहम्‍मद सलीम, मोहम्‍मद शमीम, आलम, अशरफ समेत कई लोग मौजूद रहे.

बेहद मिलनसार और तार्किक थे डॉ. रजवी
डॉ. मोहम्‍मद वसीम रजवी बेहद मिलनसार और तार्किक स्‍वभाव के थे. वे बिना किसी ठोस सबूत के कोई बात न तो कहते थे और न ही किसी दूसरे की बात को बिना तथ्‍यों के आधार पर सुनते थे. स्‍थानीय लोगों से बातचीत के दौरान हर कोई डॉ. रजवी को याद करते हुए उनकी सादगी और जीवटता के बारे में बताने को आतुर दिखा. मुस्‍लिम समुदाय में काफी लोकप्रिय रहे डॉ. वसीम रजवी के इंतकाल से लोगों में मायूसी का माहौल रहा. मोहम्‍मद सलीम ने बताया कि अगर कोई भी व्‍यक्‍ति मदद के लिए डॉ. रजवी के पास जाता था तो वो कभी भी खाली हाथ नहीं लौटा. डॉ. साहब ने हमेशा जरुरतमंद की मदद की और बेसहारा लोगों को सहारा दिया. इसके अलावा उन्‍होंने कई साल तक गरीब व असहाय लोगों को निशुल्‍क इलाज भी किया.

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Web Title "Babri Mosque action committees past convinar Dr. Rajvi is no more"