मरुस्थलीकरण की मार: गोडावण और गुलाबी बत्तख लुप्त होने के कगार पर

By: Gajendra Singh Dahiya

Updated On:
10 Sep 2019, 11:00:00 PM IST

  • - दिल्ली में चल रहे 14वें संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने जताई चिंता

जोधपुर. राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण सहित देश में पिंक हेडेड बत्तख अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। इनकी संख्या पूरे देश में 150 से भी कम रह गई है। जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जेडएसआइ) के अनुसार मरुस्थलीकरण और अ-वनीकरण के कारण जीव विलुप्त होते जा रहे हैं। वर्तमान में देश में इन जीवों को बचाना अनिवार्य है ताकि आने वाली पीढ़ी अभी इन्हें देख सके।
जेडएसआइ के वैज्ञानिकों ने यह रिपोर्ट नई दिल्ली में चल रहे चल 14वे संयुक्त राष्ट्र कांबेक्ट डेजर्टिफिकेशन (यूएनसीसीडी कॉप-14) कन्वेंशन में दी। इस कन्वेंशन में विश्व के कई देशों के वैज्ञानिक डेजर्टिफिकेशन और डिफोरेस्टेशन के कारण लुप्त हो रही प्रजातियों पर चर्चा कर रहे हैं। जेडएसआइ के वैज्ञानिकों ने बताया कि उनके पास आजादी से पहले से लेकर अब तक 56 लाख प्रजातियों के स्पेसीमेन हैं। पिछले 100 साल के डाटा बताते हैं कि पेस्टिसाइड, इंसेक्टिसाइड के अत्यधिक उपयोग, कृषि भूमि का बदलाव, उद्योग लगने और रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से मरुस्थलीकरण बढ़ रहा है। इससे 30 प्रतिशत से अधिक भूमि क्षरित हो चुकी है।


केवल जैसलमेर में बचा है गे्रट इंडियन बस्टर्ड
वर्तमान में केवल जैसलमेर के सुधासरी, पोकरण फायरिंग रेंज और रामदेवरा के पास राज्य वन विभाग के एनक्लोजर में ही 40 से कम गोडावण रह गए हैं। जोधपुर स्थित जेडएसआइ के मरुस्थलीय केंद्र ने गोडावण का सर्वे व अध्ययन करके इसकी रिपोर्ट केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को अपनी सिफारिशों के साथ भेजी है। गोडावण को बचाने के लिए 200 से 300 किलोमीटर का वृहद क्षेत्र पूर्णतया मानवरहित करके गोडावण को अकेला छोडऩे की सलाह दी गई है। भारत में एक समय में 13 राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, छतीसगढ़, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडू के शुष्क क्षेत्रों में गोडावण था लेकिन वर्तमान में राजस्थान के पाकिस्तान से लगते क्षेत्र और गुजरात के नलिया में ही गोडावण रह गया है। नलिया में करीब 10 गोडावण रिपोर्ट किए गए हैं। महाराष्ट्र्र आंध्रप्रदेश व कनार्टक प्रत्येक राज्य दो-चार गोडावण हैं।

गोडावण को बचाना होगा
‘गोडावण को बचाने के लिए 200 से 300 वर्ग किलोमीटर का मानवरहित क्षेत्र बनाना होगा। हमने गोडावण का अध्ययन कर उसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी है।
डॉ. संजीव कुमार, प्रभारी, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण जोधपुर

Updated On:
10 Sep 2019, 11:00:00 PM IST

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