राजस्थान विधानसभा चुनाव : कहना पड़ेगा, इस बार मुकाबला अच्छा रहा!

By: Harshwardhan Singh Bhati

Updated On:
12 Dec 2018, 03:31:45 PM IST

  • जातिवाद और पार्टीवाद से ऊपर उठ जन ने राजनीति की नई पौध को मतों से सींचा है। ऐसे में वे ‘फल’ की तो उम्मीद करेंगे ना!

आशीष जोशी/जोधपुर. पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव अशोक गहलोत के घर में इस बार मुकाबला अच्छा रहा। बेशक, कांग्रेस की हवा थी लेकिन लहर नहीं थी। कांग्रेस भी हवा को लहर में बदल नहीं पाई, लेकिन ये हवा है, इसका रुख कोई नहीं भांप पाया। और हवा स्वत:स्फूर्त ही लहर में तब्दील हो गई। हालांकि कई सीटों पर मुकाबला कांटे का रहा। खास बात यह भी रही कि पिछले पांच चुनावों में पहली बार किसी ‘अन्य’ का जिले में खाता खुला। चुनाव नतीजों में तीन शुभ संकेत भी निकले। पहला, युवाओं और नए चेहरों पर भरोसा जताना। दूसरा, ‘आधी दुनिया’ पर पूरा विश्वास। केवल कमसा मेघवाल को छोड़ चारों महिला जनप्रतिनिधियों को जनता ने चुना। कमसा भी दो बार से विधायक थीं। वयोवृद्ध सूर्यकांता व्यास को भी लगातार चौथी बार विधानसभा में भेजा। ...और तीसरा यह कि दो बड़ी पार्टियों के बीच तीसरे मोर्चे की आमद भी हुई। जातिवाद और पार्टीवाद से ऊपर उठ जन ने राजनीति की नई पौध को मतों से सींचा है। ऐसे में वे ‘फल’ की तो उम्मीद करेंगे ना!

भाजपा ने जहां लगभग सभी वे ही पुराने चेहरे जनता के सामने रखे जिन्हें वे कई सालों से देख रहे थे। वहीं कांग्रेस ने नए और युवा चेहरों पर दावं खेला। कांग्रेस के टिकटों की घोषणा के बाद राजनीतिक हल्कों में कई तरह की चर्चाएं भी चली, लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू भी था। जनता अब स्मार्ट है। सोचा, क्यों ना इन्हें भी आजमाया जाए। जनता ने नए चेहरों को भी स्वीकारा। नतीजा आपके सामने है। कांग्रेस का केवल एक युवा चेहरा फलोदी से महेश कुमार नहीं जीत पाया। बाकी सभी को सदन में पहुंचाया। इस उम्मीद से कि वे जन के मन की बात सुनेंगे, युवा सोच के साथ विकास के एजेंडे पर काम करेंगे और सदन में उनके मुद्देे उठाएंगे।

मतदान से पहले और बाद में चर्चाएं तो कई चली, लेकिन इस बार जन के मन को समझना जरा मुश्किल था। दोनों ही पार्टियों ने जातिगत गणित बिठाते हुए कई समीकरणों पर काम किया। कई स्टार प्रचारक भी यहां आए। आरोप-प्रत्यारोपों के साथ अपनी बात कह गए। क्या असर पड़ा, वो परिणामों में दिख रहा है। सालों बाद गहलोत के घर में कांग्रेस का गढ़ फिर स्थापित हुआ। पिछले चुनाव में मोदी लहर के बीच जहां केवल गहलोत अपनी सीट बचा पाए थे, इस बार दस में से सात सीट देकर जनता ने उनकी झोली भर दी है। अब जनता की उम्मीदों की झोली भरने की बारी है। गांवों में बीमार अस्पतालों की सेहत सुधारना, कई गांवों में नहरी पानी पहुंचाना, कॉलेजों में शिक्षकों के रिक्त पद भरना, ओसियां में पर्यटन विकास, बिलाड़ा में औद्योगिक विकास, लूणी में नदियों को प्रदूषण मुक्त करना और शहर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने जैसे ऐसे कई ऐसे मुद्दे हैं, जिनका सालों से समाधान नहीं हुआ। जनता इनसे त्रस्त है। अब इनसे राहत की आस है। ये तो मूलभूत प्राथमिकताएं हैं, इससे आगे भी उम्मीदों की फेहरिस्त लम्बी है। उम्मीद है जनता की उम्मीदों पर आप खरा उतरेंगे...।

Updated On:
12 Dec 2018, 03:31:45 PM IST

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