न्यायिक अधिकारियों के आवास और अदालत परिसर में सुरक्षा इंतजाम के निर्देश

By: Ranveer Choudhary

Updated On:
10 Jul 2019, 11:04:16 PM IST

  • -सरकार को अदालतों में बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए रोडमैप बनाने को कहा

 


जोधपुर.

राजस्थान हाईकोर्ट ने अधीनस्थ न्यायालयों में सुरक्षा व्यवस्था में खामियों पर चिंता प्रकट करते हुए राज्य सरकार को सभी जिला न्यायाधीशों के आवास पर पुलिस गार्ड तैनात करने और न्यायिक अधिकारियों के लिए तुरंत उचित सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। सरकार को उचित आकलन के आधार पर न्यायालय परिसरों में सुरक्षा के लिए शीघ्र उपयुक्त प्रबंध सहित न्यायिक अधिकारियों के लिए सुरक्षा गार्ड तैनात करने को कहा गया है।
मुख्य न्यायाधीश एस. रविंद्र भट्ट और न्यायाधीश डॉ.पुष्पेंद्रसिंह भाटी की खंडपीठ ने राजगढ़ बार एसोसिएशन की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के बाद राज्य सरकार को सभी अदालतों के परिसरों में समयबद्ध तरीके से सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के लिए रोड मैप तैयार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक अदालत परिसर में अधिवक्ताओं के चैंबर्स, पर्याप्त पानी की आपूर्ति (पीने और अन्य उपयोग के लिए), सार्वजनिक शौचालय (पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग), लिटिगेंट्स शेड और कैंटीन जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करना चाहिए, क्योंकि अदालतों के सुचारू संचालन के लिए ये सुविधाएं आवश्यक हैं। खंडपीठ ने कहा कि इन सुविधाओं के लिए सरकार को एक महीने के भीतर स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से जरूरत का आकलन करना होगा, जिसे स्थानीय बार व जजों से विचार-विमर्श के आधार पर अंतिम रूप दिया जाएगा। प्रत्येक सुविधा का उपलब्धता, स्वच्छता और उचित रखरखाव के दृष्टिकोण से आकलन किया जाए। खंडपीठ ने इसके साथ ही प्रत्येक जिला न्यायाधीश को समय-समय पर और महीने में कम से कम दो बार अदालत परिसर और उसके वातावरण में न्यूनतम स्वच्छता तथा कार्यदक्षता सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। जिला न्यायाधीश को बार के सदस्यों से भी इनपुट लेने को कहा गया है, ताकि जहां भी हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता हो, स्थानीय अधिकारियों और राज्य सरकार को उसके लिए सूचित किया जा सके। सरकार को ऐसी कमियां तीन महीने के भीतर दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। याची की ओर से अधिवक्ता विकास बिजारणिया, हाईकोर्ट की ओर से डॉ.सचिन आचार्य तथा सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता फरजंद अली व करणसिंह राजपुरोहित ने पैरवी की। मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त को होगी।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, अधीनस्थ अदालतों के हालात चिंताजनक
मुख्य न्यायाधीश एस.रविंद्र भट्ट ने हाल ही अलवर, उदयपुर, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, चित्तौडगढ़़, गंगापुर (जिला भीलवाड़ा) तथा राजसमंद में जिला न्यायालय परिसरों का औचक निरीक्षण किया था। भट्ट ने आदेश में कहा, जिला न्यायालय परिसर भरतपुर और जिला न्यायालय परिसर अजमेर में आधारभूत सुविधाओं का अभाव है। इनमें से कुछ स्थानों (अलवर, चित्तौडगढ़़, अजमेर) में नए कोर्ट भवन निर्माणाधीन हैं, लेकिन मौजूदा बुनियादी ढांचे को पर्याप्त बनाने की बहुत आवश्यकता है। कुछ जगहों को छोडकऱ सार्वजनिक सुविधाएं जैसे शौचालय और पीने का पानी (वादियों और वकील के लिए) उपलब्ध नहीं है। राजसमंद और अजमेर कोर्ट परिसर में शौचालय अनुपयोगी थे, जबकि लगभग सभी जगहों पर महिलाओं के शौचालयों की संख्या बहुत कम या बहुत सीमित है।

सालाना 4.5 करोड़ लोगों की आवाजाही
खंडपीठ ने कहा कि हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से पेश स्टेटस रिपोर्ट और जमीनी हकीकत बदतर हालात का इशारा करती है। कोर्ट ने कहा कि अदालत परिसरों में आगंतुकों की संख्या की कोई गणना नहीं की गई है, लेकिन मोटे तौर पर रोजाना मुकदमे से जुड़े लोग और वकीलों की संख्या करीब डेढ़ लाख होती है। यदि ये आंकड़े सालाना लिए जाते हैं, तो अदालतों का दौरा करने वालों की कुल संख्या 4.5 करोड़ से अधिक होती है, जो राज्य की आधी से अधिक आबादी होती है। ऐसे में यह सरकार का दायित्व है कि ऐसे परिसरों में न्यूनतम स्वच्छता और सुविधाएं सुनिश्चित की जाए।

अदालतों की बदहाल सूरत

अदालतों की संख्या-330
अदालत परिसर में अधिवक्ता कक्षों की उपलब्ध्ता नहीं - 217 परिसर

बार कक्ष की अनुपलब्धता - 114 परिसर
कैंटीन सुविधा का अभाव -218 परिसर

प्रतीक्षा कक्ष नहीं - 126 परिसर
लॉकअप सुविधा की कमी:171 परिसर

टॉयलेट नहीं - 65 परिसर
वाटर कूलर की अनुपलब्धता -118 परिसर

पार्किंग सुविधा नहीं -159 परिसर

Updated On:
10 Jul 2019, 11:04:16 PM IST

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