एयरक्राफ्ट, मिसाइल जैसी एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में विकसित होगी तकनीक

By: Gajendra Singh Dahiya

Published On:
Jul, 11 2019 11:59 PM IST

 

  • - धातु विज्ञान पर हुई 27वीं दौलत सिंह कोठारी स्मृति व्याख्यानमाला

जोधपुर. आने वाले समय में धातु विज्ञान (मैटेरियल साइंस) का भविष्य मुख्य रूप से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में रहेगा, जिसमें एयरक्राफ्ट, मिसाइल, स्पेसक्राफ्ट जैसी तकनीक तैयार की जाएगी। इसमें भी मुख्य रूप से चुनौती अब धातु विज्ञान तकनीक के विकास की समय सीमा को 15-20 साल से घटाकर पांच साल करना है, जिसके लिए कॉन्क्रिट इंजीनियरिंग तकनीक बेहतर साबित हो रही है।

यह बात रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अंतर्गत कार्यरत हैदराबाद स्थित रक्षा धातुविज्ञान अनुसंधान प्रयोगशाला (डीएमआरएल) के निदेशक डॉ. विकास कुमार ने कही। वे यहां रक्षा प्रयोगशाला जोधपुर में 27वीं प्रो. दौलतसिंह कोठारी स्मृति व्याख्यानमाला को संबोधित कर रहे थे। डॉ. विकास ने ‘एक्सीलरेटेड मैटेरियल डवलपमेंट इन डिफैंस एप्लीकेशन’ विषय पर बोलते हुए देश विदेश में धातु विज्ञान पर हो रहे अनुसंधान के बारे मे बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी तकनीक तब तक सफल नहीं होती, जब तक उसका आम जनता में उपयोग शुरू नहीं हो जाता। प्रयोगशाला में धातु विज्ञान की तकनीक विकसित करने के बाद उसे जनता द्वारा समझने में भी समय लग जाता है यानी तब जाकर वह वास्तव में कारगर साबित होती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता रक्षा प्रयोगशाला जोधपुर के पूर्व निदेशक डॉ. नरेंद्र कुमार ने की। उन्होंने अपने व्याख्यान में प्रो. कोठारी के जीवन वृत्र्तांत के बारे में बताया। स्वागत भाषण प्रयोगशाला निदेशक डॉ. रविंद्र कुमार ने दिया। अंत में आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. अजयसिंह राठौड़ ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में रक्षा प्रयोगशाला में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले 14 कर्मचारियों व वैज्ञानिकों को सम्मानित भी किया गया।

 

Published On:
Jul, 11 2019 11:59 PM IST

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