क्या है ज्ञान और विज्ञान, समझ लीजिए

By: Sikander Pareek

Updated On:
24 Aug 2019, 09:21:36 PM IST

  • अमृत से मृत्यु की ओर आना है विज्ञान
    पं. मधुसूदन ओझा की 153 वीं जयंती पर संगोष्ठी

जोधपुर. पं. मधुसूदन ओझा शोध प्रकोष्ठ, जेएनवीयू संस्कृत विभाग तथा महिला पीजी महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को पं. मधुसूदन ओझा की 153 वीं जयंती पर संगोष्ठी हुई। मुख्य वक्ता प्रकोष्ठ के पूर्व निदेशक प्रो. गणेशीलाल सुथार ने कहा कि पं. ओझा की ओर से प्रतिपादित विज्ञान केवल भौतिक ही नहीं अपितु परा भौतिक है। अध्यात्म, आदिदैविक तथा आदिभौतिक तीनों स्तरों पर पं. ओझा ने वेद, उपनिषद तथा ब्राह्मण ग्रंथों के आधार पर विवेचन किया है। अतिथि प्रो. नरेन्द्र अवस्थी ने कहा कि पं. ओझा ने पांच प्रकार के साम्यवाद के माध्यम से दार्शनिक व्याख्या की है। शोध प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. सत्यनारायण दुबे ने बताया कि शोध प्रकोष्ठ की ओर से २० ग्रंथों का हिन्दी भाष्य तथा अनुवाद सहित प्रकाशन किया गया है। संस्कृत विभाग अध्यक्ष प्रो. सरोज कौशल ने कहा कि पं. ओझा ने विज्ञान तथा ज्ञान की विशिष्ट व्याख्या की है। उनके अनुसार ब्रह्म से यज्ञ की ओर आना, आत्मा से विश्व की ओर आना तथा अमृत से मृत्यु की ओर आना विज्ञान है। प्रारंभ में महिला पीजी महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मनोरमा उपाध्याय ने स्वागत उद्बोधन दिया। संस्कृत के सहायक आचार्य डॉ. नीतेश व्यास ने संचालन किया। प्रो. एसपी व्यास ने आभार जताया। डॉ. मोनिका, डॉ. शरदचन्द्र, डॉ. छैलसिंह राठौड़, सीमा सोनगरा, राजू, रामदयाल, डॉ. कपिल, डॉ. माधविका माथुर, राजू, डॉ. इश्राकुल माहिर आदि उपस्थित थे।

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24 Aug 2019, 09:21:36 PM IST

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