ये है सभी भाषाओं की जननी, यहां शुरू हुए केंद्र में मिलेगी शिक्षा

By: Brij Kishore Gupta

Published On:
Oct, 16 2018 10:06 PM IST

  • ये है सभी भाषाओं की जननी, यहां शुरू हुए केंद्र में मिलेगी शिक्षा

झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो.वी के सहगल ने कहा कि संस्कृत देवभाषा है। यह सभी भाषाओँ की जननी है। विश्व की समस्त भाषाएं इसी के गर्भ से उद्भूत हुई हैं। अतः आज आवश्यकता इस बात की है कि हम देवभाषा संस्कृत का प्रचार एवं प्रसार करें। वह यहां विश्वविद्यालय परिसर में संचालित जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान के सभागार में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली के तत्वावधान में औपचारिक संस्कृत शिक्षण केन्द्र के सत्रारम्भ के उद्घाटन के अवसर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान द्वारा संचालित औपचारिक संस्कृत शिक्षण केन्द्रों के संचालन की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके इस प्रयास से जन सामान्य में संस्कृत का अधिक से अधिक प्रचार प्रसार होगा।
संस्कारित भाषा भी है संस्कृत
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि वीरांगना लक्ष्मीबाई महिला महाविद्यालय के संस्कृत के विभागाध्यक्ष डा.बी.बी.त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत केवल स्वविकसित भाषा नहीं, बल्कि संस्कारित भाषा भी है। अतः इसका नाम संस्कृत है। संस्कृत का तात्पर्य परिष्कृत, परिमार्जित, पूर्ण एवं अलंकृत है। डा.त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत भाषा अति परिष्कृत एवं परिमार्जित है। इस भाषा में भाषागत त्रुटियां नहीं मिलती हैं जबकि अन्य भाषाओँ के साथ ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है संस्कृत के विभिन्न आयामों पर फिर से नवीन ढंग से अनुसन्धान करने की, इसके प्रति जनमानस में जागृति लाने की, क्योंकि संस्कृत हमारी संस्कृति का प्रतीक है। डा.त्रिपाठी ने संस्कृत में स्वरचित एक श्लोक का पाठ भी किया।
संस्कृत एक विचार है
संस्कृत भारती, कानपुर प्रान्त के प्रकाश झा ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा ही नहीं है अपितु संस्कृत एक विचार है। संस्कृत एक संस्कृति है, एक संस्कार है। उनका मानना था कि यद्यपि आजकल संस्कृत भाषा आज प्रचलन में नहीं है परन्तु इसकी अगणित विशेषताओं के कारण ही संस्कृत का कम्प्यूटर क्षेत्र में भी अनुप्रयोग चल रहा है। कम्प्यूटर विशेषज्ञ इस तथ्य से सहमत है कि यदि संस्कृत को कम्प्यूटर की डिजिटल भाषा में प्रयोग करने की तकनीक खोजी जा सके तो भाषा जगत के साथ-साथ कम्प्यूटर क्षेत्र में भी अभूतपूर्व परिवर्तन देखे जा सकते हैं। इस अवसर पर विषिश्ट अतिथि डा.सी.पी.पैन्यूली ने कहा कि आज सरल से सरल रूप में संस्कृत को आम लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता है जिससे अधिक से अधिक लोग संस्कृत सीखें तथा संस्कृत में ही बोलचाल करें। कार्यक्रम का संचालन योगेन्द्र कुमार ने किया, जबकि डा.बी.एस.भदौरिया ने आमंत्रित अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
ये लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर पत्रकारिता संस्थान के समन्वयक कौशल त्रिपाठी, ललित कला विभाग की समन्वयक डा. श्वेता पांडेय, डा. उमेश कुमार, राघवेन्द्र दीक्षित, सतीष साहनी, जय सिंह, अभिषेक कुमार, वीरेन्द्र कुमार साहू, वीरेन्द्र कुमार आदि उपस्थित रहे।

Published On:
Oct, 16 2018 10:06 PM IST

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।