'वन स्टॉप सेंटरÓ पर एक ही छत के नीचे मिलेंगी हर प्रकार की सहायता, अब पीडि़तों को यहां-वहां नहीं भटकना पड़ेगा

By: Hari Singh Gujar

Published On:
Aug, 13 2019 11:17 AM IST

 
  • -बजट में हुई थी घोषणा
    - 16 लाख रुपए होंगे खर्च

 

झालावाड़. जिले में अब उत्पीडि़त महिलाओं को आश्रय स्थल व सभी प्रकार की कानूनी व घरेलू सहायता देने के लिए करीब 16 लाख रुपए की लागत से 'वन स्टॉप सेंटरÓखोला जाएगा। इसके लिए महिला एवं बाल अधिकारिता विभाग ने भवन का चयन कर अन्य सभी आवश्यक तैयारी पूर्ण कर ली है। सब कुछ सही रहा तो इसी महीने इस सेंटर के चालू होने की पूरी उम्मीद है। इस सेंटर की घोषणा बजट में की गई थी।


इस सेंटर में उत्पीडि़त महिलाओं के लिए करीब पांच बैड का आश्रय स्थल भी बनाया गया है। इसमें दुष्कर्म सहित अन्य कारणों से पीडि़त महिलाओं का मेडिकल टीम, महिला एवं बाल विकास अधिकारी पुलिसकर्मियों की देखरेख में पीडि़त महिलाओं की काउंसलिंग इलाज और बयान दर्ज आदि कार्य होंगे। यह सारा काम इस सेंटर में होगा और पीडि़त को यहां-वहां नहीं ले जाया जाएगा।

चिकित्सा, विधि व पुलिस तीनों की सुविधा एक ही छत के नीचे मिलेगी-

हिंसा से पीडि़त महिलाओं के लिए वन स्टॉप क्राइसेस मैनेजमेंट सेंटर खोला जाएगा, यहां हर समस्या का समाधान करने के लिए स्पेशलिस्ट मौजूद रहेंगे। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय,भारत एवं राजस्थान सरकार के निर्देशानुसार संचालित इस सेंटर पर पीडि़त महिलाओं को अविलंब राहत एवं सहायता प्रदान की जाएगी। महिलाओं को एक ही छत के नीचे परामर्श चिकित्सा, विधिक व पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। केन्द्र का संचालन फिलहाल अस्थाई रूप से पुराने सीडीपीओ कार्यालय में किया जाएगा, जहां सभी प्रकार की सुविधाएं महिलाओं व बालिकाओं को मिल को मिल सकेंगी। यह शहर के बीच में होने से सिटी डिस्पेंसरी के निकट होने से यहां आने वाली पीडि़त महिलाओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।

 

इतना मिला बजट-
केन्द्र के संचालन के लिए करीब 16 लाख रुपए का बजट आंवटित हुआ है, इस बजट से महिला एवं बाल अधिकारिता विभाग द्वारा इस केन्द्र का सुचारु रुप से संचालन किया जाएगा। इसमें करीब 13 कर्मचारी लगाए जाएंगे। जो हर प्रकार की सुविधाएं पीडि़तों को मुहैया करवाएंगे।

 

24 घंटे मिलेगी सुविधाएं-
वन स्टॉप सेन्टर में महिला उत्पीडऩ एवं घरेलु हिंसा से पीडि़त महिला, बलात्कार की शिकार को मनौवेज्ञानिक परामर्श, पुलिस सहायता, कानूनी सलाह, आश्रय सुविधा एवं चिकित्सकीय सुविधा को एक ही स्थान पर नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जाएगी। वन स्टॉप सेन्टर पर परामर्श दाताओं की 24 घण्टे सेवाएं उपलब्ध रहेगी। इसमें दो महिला अधिवक्ता, पुलिस विभाग की एक नोडल अधिकारी, एक हैड कानिस्टेबल एवं 3 महिला कानिस्टेबल समाजशास्त्री आदि इस सेंटर में लगाई जाएंगे। वन स्टॉप सेन्टर पर सेवाएं देने वाले सभी अधिकृत कार्मिकों के नाम,पद एवं मोबाईल नं. का बोर्ड बनाकर सेंटर के बाहर लगाया जाएगा ताकि आने वाले प्रत्येक पीडि़त को संपर्क करने में कोई असुविधा न हो।

केन्द्र पर इन्हें दी जाएगी सहायता-
हिंसा से पीडि़त महिलाएं, जिसमें 18 वर्ष से कम आयु की बालिकाएं भी सम्मिलित है, को सहायता प्रदान करना। तथा 18 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं की सहायता के लिए लैंगिंक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 एवं किशोर न्याय,बालकों की देखरेख और संरक्षण अधिनियम 2015 के अंतर्गत गठित संस्थाओं को सेन्टर से जोडऩा।

ये होंगे प्रबंधन कमेटी में-
महिला अधिकारिता विभाग की ओर से संचालित किए जाने वाले वन स्टॉप सेंटर की प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष जिला कलक्टर सहित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व पुलिस विभाग, महिला एवं अधिकारिता विभाग व समाजशास्त्री आदि इसके सदस्य बनाए जाएंगे।

तैयार हो रहा भवन-
वन स्टॉप सेंटर के लिए जगह का चयन कर लिया गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर आदि तैयार किया जा रहा है, कोशिश है इसी माह चालू कर दिया जाएं।
मनीषा तिवारी,उपनिदेशक महिला एवं बाल अधिकारिता विभाग, झालावाड़।

Published On:
Aug, 13 2019 11:17 AM IST

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