जिले में 1 लाख 2 हजार किसानों का फसल बीमा, अभी तक सर्वे 300 का ही

By: Hari Singh Gujar

Updated On:
11 Sep 2019, 11:38:01 AM IST

 
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    -फसलों में सत्तर फीसदी से अधिक खराबा


    -मौसम की मार से कर्ज में दबे अन्नदाता

झालावाड़.जिलेभर में अतिवृष्टि ने फसलें बर्बाद कर किसानों को कर्ज में डूबो दिया। खेतों में पानी भरने से प्रमुख फसल मक्का व सोयाबीन सहित खरीफ की फसलों में नुकसान का आंकड़ा करीब सत्तर फीसदी से अधिक पहुंच गया है। उधार लाकर बंपर उत्पादन के लिए बुवाई करने वाले किसानों की उम्मीदों को बारिश के पानी ने धो दिया। रही कसर जिम्मेदार विभाग पूरी कर रहे हैं। जिले में करीब 1 लाख 2 हजार किसानों ने फसल बीमा करवा रखा है,लेकिन फसल बीमा कपंनी व कृषि विभाग के कर्मचारी अभी तक मात्र 300 किसानों के ही खेतों तक पहूंचा पाए है। आश्चर्य की बात तो ये है कि जिले में 7200 किसानों ने तो कृषि विभाग के दफ्तर में जाकर लिखित में सूचना दी है। ऐसे में किसानों के खेतों में नुकसान का समय पर सर्वे नहीं होने से खराबे की भरपाई किसान भगवान भरासे ही मान रहे हैं। जिले के किसानों के साथ 2015-16 में भी कुछ ऐसा ही हुआ था, कि समय पर सर्वे रिपोर्ट नहीं जाने से किसानों को उस साल सोयाबीन में भारी खराबा होने के बाद भी मुआवजा समय पर नहीं मिल पाया था। ऐसे में जिम्मेदार विभागों को धरतीपुत्रों के दर्द का समझ कर अपनी जिम्मेदारी से काम करना चाहिए। प्रथम चरण में विभाग के अधिकारी करीब 16 हजार हैक्टेयर से अधिक में खराब मान चुके है, ये आंकड़ा अब दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है।
किसानों का कहना है कि करोड़ों रुपए का प्रीमीयम लेने वाली कंपन को जिले में तहसीलवार सर्वे कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर सर्वे का कार्य युद्धस्तर पर किया जाना चाहिए।
झालावाड़ जिले में इसबार कृषि विभाग के लक्ष्य के अनुसार सवा 3 लाख हैक्टेयर से अधिक हैक्टेयर में खरीब फसलों की बुवाई हुई है। जिसमें सोयाबीन की बुवाई 2 लाख 24 हजार 300 हैक्टेयर में की गई है। जबकि की उड़द 39 हजार 664 व मक्का की 36 हजार 802 हैक्टेयर में हुई है।

उम्मीदों पर फिर गया पानी-
इस बार किसानों को बंपर उत्पादन की उम्मीद थी और इसी के चलते कई किसानों ने रुपए उधार लाकर बुवाई कर दी लेकिन इस मानसून में बारिश की अधिकता के चलते खेतों में पानी भर गया। शुरुआती दौर में कृषि विभाग के अधिकारियों और किसानों को उम्मीद थी कि खेतों से पानी निकल जाएगा और फसलें प्रभावित नहीं होगी, लेकिन लगातार हो रही बारिश ने खेतों से पानी की निकासी नहीं होने दी, इससे मक्का और सोयाबीन सहित खरीफ की फसलें खेतो में ही गल गई। कई खेतों में तो फसलें गलने से सडांध भी आने लगी है। ऐसे में किसानों के साथ प्रकृति के रुठने के बाद एक मात्र बीमा कंपनी से ही किसानों को आस बची है।

80 फीसदी तबाह हो गई फसले-
किसान मनोहरलाल दांगी ने बताया कि जिले में कृषि विभाग ने खरीफ की फसलों में 60-70 प्रतिशत तक नुकसान होना माना है और उच्च स्तर पर भी यही रिपोर्ट भेजी जाएगी। लेकिन रिपोर्ट के इत्तर जिले में कई क्षेत्रों में 90 फीसदी से अधिक नुकसान हुआ है।

अभी तक 300 किसानों का ही हुआ सर्वे-
सूत्रों ने बताया कि जिले में 90 फीसदी से अधिक नुकसान वाले किसानों की संख्या हजारों में है। लेकिन अभी बीमा कंपनी व कृषि विभाग के कर्मचारियों ने मात्र 300 किसानों के खेतों पर ही जाकर सर्वे का काम पूरा किया है। ऐसे में अन्य किसानों का समय पर सर्वे नहीं होता है तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा।

ऐसे मिलेगा नुकसान का बीमा-
जिले में फसलों में हुए नुकसान का आकलंन के लिए जिन किसानों ने फसलों का बीमा करवाया हुआ है, उन्हें फसलें खराब होने के 72 घंटे के भीतर संबंधित बीमा कंपनी को टोल फ्री नंबर पर सूचना देनी होगी। कृषि विभाग में भी इसके लिए आवेदन किए जा रहे हैं। खेतों में पानी भरने सेखराब हुई फसलों को भी बीमा में कवर किया हुआ है। इस बार फसलों में हुए नुकसान का आंकलन करने के लिए फसल कटाई प्रक्रिया में मोबाइल एप का भी उपयोग किया जाएगा। फसल कटाई प्रयोगों के आधार पर प्रभावित किसानों को क्लेम राशि दी जाएगी।


एक्सपर्ट व्यू-
उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय के पूर्व डीन डॉ.एमएस आचार्य का कहना है कि अब फसलें रिकवर नहीं हो सकती है। फसलों में गलन ज्यादा हो गई, पत्ते पीले पड़ गए है, सोयाबीन में काफी नुकसान है। मक्का, उड़द पहले ही गल चुके हैं। करीब डेढ़ माह से धूप नहीं निकलने से फसलों में काफी नुकसान हुआ है। अब कीट आदि भी हो रहे है, लेकिन खेतों में कीचड़ होने से स्प्रे भी नहीं कर पा रहे हैं। जिन पौधों में बीज पड़ गया लेकिन वह भी फुलने की स्थिति में नहीं है। फसले भगवान भरोसे ही है।


अभी 300 सौ किसानों के खेतों में ही सर्वे-
जिले में खानुपर,बकानी, रायुपर आदि क्षेत्रों में करीब 300 किसानों का सर्वे कर लिया गयाहै। अभी और चल रहा है। किसानों को दबाव ज्यादा है इससे काम नहीं कर पार हैं। फिर भी सर्वे कर रहे हैं। शेष का क्राप कटिंग के दौरान ही पुरा आंकलन होगा।
जुगल किशोर मीणा, जिला समन्वयक, एग्रीकल्चर बीमा कंपनी,झालावाड़।

Updated On:
11 Sep 2019, 11:38:01 AM IST

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