अब भी नहीं जागे तो जवाई का पानी जालोर के लिए केवल सपना

By: Khushal Singh Bhati

Published On:
Jul, 11 2019 10:07 AM IST

  • - बाढ़ के हालातों में सबसे अधिक परेशानी जालोर जिले को झेलना पड़ता है, वर्ष 2017 की बाढ़ के बाद जवाई के पानी पर हक निर्धारण की मांग उठी थी जालोर में


जालोर. जवाई नदी पर पाली जिले के सुमेरपुर क्षेत्र में बने जवाई बांध के पानी में अब और अधिक मात्रा में सेंध के लिए कवायद चल रही है। इसका प्रारंभिक रूप मुख्यमंत्री द्वारा पेश किए गए बजट में देखने को मिल गया है। बजट घोषणा के अनुसार सिरोही जिले के शिवगंज क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पेयजल स्कीम की स्वीकृति के लिए डीपीआर बनाने के लिए स्वीकृति जारी की गई है। जिले के लिए यह घोषणा कई मायनों में नकारात्मक है, जिसके दूरगामी दुष्परिणाम देखने को मिलेंगे। इसका सीधा असर यह होगा कि डीपीआर बनने के बाद यदि इस प्रोजेक्ट पर आगामी बजट पर सरकार वित्तीय स्वीकृति जारी करती है तो जवाई बांध के पानी के एक बड़े हिस्से पर शिवगंज क्षेत्र का कब्जा हो जाएगा। दूसरी तरफ बांध बनने से लेकर अब तक पहले जोधपुर और उसके बाद पाली जिला जवाई बांध से लाभान्वित होता रहा है और इसी तरह का एक प्रोजेक्ट पूववर्ती राज्य की भाजपा सरकार में मंत्री पुष्पेंद्रसिंह भी कर चुके हैं, हालांकि सरकार बदल जाने से यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते हैं। उनके प्रोजेक्ट के अनुसार 5000 एमसीएफटी पानी से पाली जिले के विभिन्न तालाबों को पानी से भरना था। सीधे तौर पर माना जा सकता है कि पाली और सिरोही जिले से जवाई बंांध से पानी लेने के लिए एक के बाद एक प्रोजेक्ट पेश किए जा रहे हैं, जबकि जालोर के लिए न तो जनप्रतिनिधि प्रयास कर रहे हैं। न ही सरकारी स्तर पर प्रयास हो रहा है।
ये बनेंगे हालात
वर्ष 1973, 1990, 2006 और मुख्य रूप से 2017 में अतिवृष्टि के दौरान जवाई बांध लबालब भरा और उसके बाद बांध से एक साथ बड़ी मात्रा में पानी एक साथ छोड़ा गया। इन सभी वर्षों में पानी उन हालातों में छोड़ा गया, जब जवाई बांध में पानी पूर्ण भराव क्षमता तक भर चुका था और उसके बाद स्टॉक संभव नहीं था। इसके बाद एक साथ पानी छोडऩे से सबसे अधिक नुकसान जालोर जिले को भुगतना पड़ा। नदी के बहाव क्षेत्र के कृषि कुएं खाली करवा दिए गए और रास्ते बंद हो गए। बांध का दूसरा पक्ष यह भी है कि जब कभी बारिश कम होती है या औसत बारिश में पानी भराव क्षमता से कम होता है तो पानी को जवाई बांध में ही स्टॉक कर लिया जाता है और इस पानी से अब तक पूरी तरह से पाली जिला फायदा उठता है। सीधे तौर पर अधिक बारिश में पानी भराव क्षमता से अधिक होने पर जालोर जिले को खतरे में डाला जाता है और जब कभी कम बारिश होती है और जालोर जिले के किसानों को सिंचाई के लिए पानी की जरुरत होती है तो उस पानी पर केवल पाली जिला ही हक जताता है। वर्ष 2017 में तो हालात इस कदर जालोर के विपरीत रहे कि जवाई में पानी की आवक नहीं होने से आहोर क्षेत्र के जवाई कमांड के गांवों को पानी तक नहीं मिला, जिससे खेत सूखे ही रहे।
बागोड़ा तक के किसानों का अधिकार
जवाई बांध से आहोर कमांड के केवल 22 राजस्व गांवों को ही पानी मिल रहा है। चूंकि बांध निर्माण से पूर्व ही इस पानी का बहाव बागोड़ा और नेहड़ क्षेत्र तक था और बांध निर्माण के बाद ये सभी कृषि कुएं सूख चुके हैं। ऐसे में सीधे तौर पर जवाई बांध के पानी पर इन किसानों को राइपेरियन राइट के तहत सीधे तौर पर अधिकार है। राइपेरियन पानी के नेचुरल फ्लो के बीच आने वाले कृषि क्षेत्रों को पानी प्राप्त करने का अधिकार देता है।
लडऩे की जरूरत
जालोर जिले का जवाई बांध के पानी पर सीधे तौर पर हक है। केवल 22 कमांड क्षेत्र के किसानों को पानी मिल रहा है। इसलिए जिलेवासियों को संतोष करने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि जनप्रतिनिधियों, किसानों और आमजन को तटवर्ती अधिकार के तहत पानी के लिए लड़ाई लडऩे की जरुरत है ताकि नदी क्षेत्र के किसानों का भविष्य सुखद हो सके।
पानी पर हमारा हक, लेकिन जाग नहीं रहे
रायपेरियन राइट अंगे्रजों के शासन काल में इंगलैंड में प्रभावी था। लेकिन उस शासन काल में ही पूर्व नरेश गंगासिंह ने इसका अपने क्षेत्र के लिए फायदा उठाया।रायपेरियन राइट के तहत ही स्टेट टाइम में पंजाब से भाखड़ा नांगल बांध से पानी मिलना शुरू हुआ। इतिहास में यह पहला मौका है, जब भारत में इस अधिकार के तहत किसी स्टेट का पानी मिला। इसके बाद भारत में इस अधिकार का कई मौकों पर इस्तेमाल हो चुका है। इसी अधिकार के तहत जालोर को नर्मदा का पानी भी मिला है और जवाई बांध पर भी इसका अधिकार है।
पुनर्भरण तक प्रोजेक्ट पर रोक लगे
& मैंने जवाई बांध और जालेार आहोर क्षेत्र के जुड़ाव के संबध में प्रश्न सदन में रखे थे।जिसमें मुख्य रूप से जवाई कमांड क्षेत्र का विस्तार करने और जवाई बांध के पानी पर हक निर्धारण की मांग समेत जवाई पुनर्भरण की मांग मुख्य थी।शिवगंज ग्रामीण पेयजल प्रोजेक्ट की क्रियान्विति तभी होनी चाहिए, जब जवाई बांध पुनर्भरण स्कीम पर काम पूरा हो जाए। वर्तमान में जवाई बांध से बड़ मात्रा में पानी का उपयोग पाली जिला कर रहा है। बिना पुनर्भरण स्कीम हालात विकट होंगे। इसके लिए मांग उठाई जाएगी।
- छगनसिंह राजपुरोहित, विधायक, आहोर
जालोर को किया दरकिनार
बजट में जालोर की जनता के साथ छलावा किया गया है।जवाई पुनर्भरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर कोई घोषणा नहीं की गई है। जनता के विश्वास को पूरी तरह से ठेस पहुंची है, बजट निंदनीय है।
- जोगेश्वर गर्ग, विधायक, जालोर
योजनाबद्ध तरीके से कार्य जरुरी& जवाई बांध से जुड़े किसी भी नए प्रोजेक्ट को शामिल करने से पूर्व जवाई पुनर्भरण की योजना जरुरी है। पानी की पर्याप्त आवक पर ही पानी का वितरण निर्भर करेगा।सरकार को पहले इस तरफ ध्यान देने की जरुरत है।
- एसएल परमार, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता
जालोर की अनदेखी
बाढ़ के हालात हो या सूखे के हालात दोनों ही स्थिति में जवाई बांध से जालोर की जनता को ही दुखी होना पड़ता है। अधिक बारिश से जवाई बांध बाढ़ के हालात और कम बारिश से किसानों को नुकसान होता है। शिवगंज ग्रामीण के लिए पेयजल स्कीम डीपीआर की स्वीकृति जालोर की जनता के लिए नुकसान दायक साबित होगी। पहले जवाई पुनर्भरण प्रोजेक्ट पर काम जरुरी है।
- ईश्वरलाल शर्मा, संयोजक, वरिष्ठ नागरिक मंच, जालोर

Published On:
Jul, 11 2019 10:07 AM IST

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