भगोड़ा घोषित नगरपरिषद सभापति सीजेएम कोर्ट में पेश, जमानत मंजूर

By: Dharmendra Ramawat

Published On:
Jul, 11 2019 10:47 AM IST

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जालोर. मानहानि के मामले में भगोड़ा घोषित जालोर नगरपरिषद सभापति भंवरलाल माली बुधवार को जालोर सीजेएम कोर्ट में पेश हुए। जहां उनकी जमानत याचिका मंजूर कर उन्हें 30 हजार के जमानती मुचलके पर रिहा किया गया। सभापति माली के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बावजूद वे न्यायालय में हाजिर नहीं हो रहे थे। ऐसे में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जालोर पवनकुमार काला ने माली को भगोड़ा घोषित किया था। इस पर गत 4 जुलाई को सभापति माली राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में पेश हुए। जहां सभापति के खिलाफ सीजेएम जालोर कोर्ट से जारी गैर जमानती वारंट को जमानती वारंट में परिवर्तित कर सीजेएम कोर्ट जालोर में पेश होने के आदेश जारी किए। जिसके बाद बुधवार को सभापति माली की ओर से उनके अधिवक्ता कुलदीप पुरोहित व अभिमन्युसिंह ने जालोर सीजेएम कोर्ट में जमानत याचिका पेश की। जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर माली को रिहा किया। गौरतलब है कि जालोर नगरपरिषद सभापति माली की ओर से पूर्व में प्रेस नोट जारी कर उपसभापति मंजू सोलंकी पर कई आरोप लगाए थे। इसके बाद उपसभापति ने परिषद सभापति के खिलाफ सीजेएम जालोर के समक्ष मानहानि का परिवाद पेश किया। जिस पर सीजेएम जालोर ने सभापति के खिलाफ प्रसंज्ञान लेते हुए उन पर मानहानि का आरोप प्रमाणित होने पर समन वारंट से तलब किया। जिसके बाद सभापति ने उक्त आदेश के खिलाफ जिला एवं सत्र न्यायाधीश जालोर के समक्ष निगरानी याचिका पेश की, लेकिन समन वारंट पर हाजिर नहीं होने पर सीजेएम जालोर ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया। गिरफ्तारी वारंट पर भी सभापति न्यायालय में हाजिर नहीं हुए। ऐसे में थानाधिकारी बाघसिंह के न्यायालय में बयान के बाद सभापति को मफरूर भगोड़ा घोषित किया गया। आखिर में सभापति ने राजस्थान उच्च न्यायालय की शरण ली और राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर ने सभापति को राहत देते हुए न्यायालय में हाजिर होने पर जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए।
जमानत मुचलके पेश किए
नगरपरिषद सभापति माली बुधवार को सीजेएम जालोर के समक्ष पेश हुए। जहां सीजेएम जालोर ने निगरानी याचिका की पत्रावली सैशन न्यायालय से तलब करने को लेकर पत्र जारी किया। जिसके बाद सैशन न्यायालय जालोर से पत्रावली सीजेएम कोर्ट में पेश होने पर सीजेएम ने हाई कोर्ट के आदेशानुसार सभापति को जमानत पर रिहा करने के लिए जमानत मुचलके पेश करने को कहा। वहीं सभापति के अधिवक्ताओं की ओर से 30 हजार के जमानती मुचलके न्यायालय में पेश करने पर सभापति को रिहा किया गया।
दोनों ही भाजपा से
नगरपरिषद में भाजपा का बोर्ड बनने के बाद से सभापति व उपसभापति में बार-बार तकरार होती रही है। खास बात तो यह है कि दोनों ही जिम्मेदार पदों पर आसीन जनप्रतिनिधि एक ही पार्टी भाजपा से हैं। इसके बावजूद दोनों आपस में तालमेल नहीं बिठा पाए। ऐसे में शहरी विकास के मुद्दों पर कार्य करने के बजाय बोर्ड के साढ़े चार आपसी मनमुटाव में बीत गए।

Published On:
Jul, 11 2019 10:47 AM IST

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