Raksha Bandhan 2019:चाइना की झोली 85 फीसदी खाली,होने लगा मोहभंग

By: Deepak Vyas

Updated On: 13 Aug 2019, 07:19:26 PM IST

  • भाई-बहिन के पवित्र प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन त्योहार अब महज दो दिन की दूरी पर है। इस बार दो दशक के अंतराल के बाद देश की आजादी का पर्व और रक्षाबंधन एक साथ मनाया जाएगा। जैसलमेर शहर समेत जिले भर में राखी की दुकानों पर महिलाओं व युवतियों की भीड़ उमड़ रही है। बाजार में इस बार 10 से लेकर 500 रुपए तक की तरह-तरह की डिजाइनों व आकार वाली राखियां बिक्री के लिए पहुंची हैं। इस बीच विगत वर्षों के दौरान बढ़-चढक़र बिकने वाली चीन में निर्मित राखियों की मांग वर्तमान सीजन में घटकर 15 फीसदी तक ही रह गई है।

जैसलमेर. भाई-बहिन के पवित्र प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन(Raksha Bandhan 2019) त्योहार अब महज दो दिन की दूरी पर है। इस बार दो दशक के अंतराल के बाद देश की आजादी का पर्व और रक्षाबंधन एक साथ मनाया जाएगा। जैसलमेर शहर समेत जिले भर में राखी की दुकानों पर महिलाओं व युवतियों की भीड़ उमड़ रही है। बाजार में इस बार 10 से लेकर 500 रुपए तक की तरह-तरह की डिजाइनों व आकार वाली राखियां बिक्री के लिए पहुंची हैं। इस बीच विगत वर्षों के दौरान बढ़-चढक़र बिकने वाली चीन में निर्मित राखियों की मांग वर्तमान सीजन में घटकर 15 फीसदी तक ही रह गई है। बाजार में कुछ दुकानदारों ने अपनी दुकानों पर हर बार की भांति चीन में बनी राखियां बेचने के लिए सजाई तो हैं, लेकिन उनकी तादाद पहले के वर्षों की तुलना में कम है और उस पर उनकी खरीद का रुझान भी अब पहले जैसा नहीं रह गया है। बड़ी तादाद में तो दुकानदारों ने चीन में बनी राखियां बिक्री के लिए रखी ही नहीं हैं।
सजावटी होती हैं चाइनीज राखियां
चीन में निर्मित राखियां दरअसल भारत की भांति रेशमी नहीं होती और वे घडिय़ां और ब्रेसलेट की जैसी दिखाई देती है। सीमावर्ती जैसलमेर जिले के शहरी व ग्रामीणांचलों में रक्षाबंधन के मद्देनजर राखी की दुकानें पूरी तरह से सज चुकी हैं। सोमवार को दिनभर इन दुकानों पर महिलाओं और युवतियों की भारी भीड़ लगी नजर आई। जैसलमेर जिले में एक अनुमान के तौर पर करीब दो करोड़ रुपए की राखियां बिकेंगी। गत वर्ष डेढ़ करोड़ की राखियों की बिक्री केवल चाइनीज राखियों की हुई थी।
बच्चों को लुभाने का लक्ष्य
चीन में बनने वाली राखियां बच्चों को लुभाने के लिहाज से बनी होती है। चीन में निर्मित राखियां प्लास्टिक और मेटल से बनी हैं। जिनकी कीमत 100 से लेकर ४00 रुपए तक है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान जैसलमेर में प्रत्येक रक्षा बंधन के त्योहार पर चीन में निर्मित राखियों का बाजार हिस्सा बढ़ता गया, लेकिन पिछले दो वर्षों से सोशल मीडिया पर इसके खिलाफ बनने वाले माहौल का ही यह असर कहा जा सकता है कि इनकी मांग में कमी आ रही है। दुकानदारों के अनुसार उनका अधिकांश माल दिल्ली और कोलकाता आदि से आता है। बच्चों की पसंद के कार्टून कैरेक्टर से संबंधित राखियों का इस बार भी बोलबाला है।

फैक्ट फाइल
- 15 अगस्त के दिन मनाया जाएगा रक्षाबंधन पर्व
- 02 करोड़ तक होगा राखियों का व्यवसाय
- 200 से अधिक दुकानों-ठेलों पर व्यवसाय

Updated On:
13 Aug 2019, 11:17:38 AM IST

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