जैसलमेर के इस गांव के निकट गैर आबाद व निर्जन स्थल के बावजूद आबाद है गुफा व धूणा

Deepak Vyas

Publish: Sep, 12 2018 10:19:37 AM (IST)

-पोकरण क्षेत्र में पुराने केरू गांव में स्थित है भूरा बाबा की गुफा

जैसलमेर. पहाड़ी क्षेत्र हो या रेतीले टीले दुर्गम स्थलों के बावजूद देश में जगह-जगह ऐसे कई आस्था केन्द्र बने हुए है, जहां सुगम मार्ग नहीं होने के कारण पहुंच पाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसा ही एक आस्था केन्द्र प्रसिद्ध संत भूराबाबा की गुफा के नाम से पोकरण फिल्ड फायरिंग रेंज के भीतर पुराने केरू गांव में स्थित है। यहां सालभर सैंकड़ों श्रद्धालु गुफा, बाबा के धूणे व मंदिर के दर्शन करने के लिए आते है। साल में एक बार ***** सुदी एकम की रात्रि में यहां विशाल मेले व रात्रि जागरण का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु दर्शन करते है।
करीब 45 वर्ष पूर्व पोकरण उपखण्ड के अजासर गांव से पश्चिम दिशा की तरफ 16 किमी, भादरिया से उत्तर दिशा की तरफ 21 किमी एवं मोहनगढ के ताड़ाना से नौ किमी दूर दक्षिण दिशा में चौहान वंशीय राजपूतों का केरू गांव स्थित था। यह गांव 1972-1973 में संवत् 2029 पोकरण फिल्ड फायरिंग रेंज में चला गया। यहां रक्षा मंत्रालय की ओर से गांव की भूमि, भवन अवाप्त कर ग्रामीणों को उसका मुआवजा दिया गया। जिसके बाद यहां के बाशिंदे जैसलमेर तहसील के खींवसर गांव में बस गए। आज यह गांव फिल्ड फायरिंग रेंज में होने के कारण पूरी तरह से गैर आबाद है। हालांकि गांव में आबादी व मकान होने के चिन्ह, गांव का पुराना कुंआ आज भी अतीत का गवाह बने हुए है। इस गैर आबाद व निर्जन स्थल पर मात्र एक भूरा बाबा की गुफा, धूणा व मंदिर स्थित है, जो यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केन्द्र बने हुए है। इसके अलावा यहां दूर-दूर तक कहीं पर भी मनुष्य तो क्या पशु पक्षी भी दिखाई नहीं देते है। नजदीक गांव ताड़ाना से पुजारी माणकभारती दो-तीन दिन में एक बार यहां आकर पूजा-अर्चना करते है।

यह है मान्यता
पोकरण फिल्ड फायरिंग रेंज के अंदर रेतीले टीलों के बीच स्थित ऐतिहासिक भूरा बाबा की गुफा, धूणा व मंदिर देखने के लिए सोमवार को पत्रिका की टीम यहां पहुंची। यहां छायण, अजासर, ताड़ाना, घंटियाली, भादरिया आदि गांवों से आए दर्जनों श्रद्धालु बैठे थे। उन्होंने बताया कि यह एक चमत्कारिक स्थल व आस्था का केन्द्र है। यहां भूरा बाबा ने तपस्या की। ऐसी मान्यता है कि यहां स्थित भूरा बाबा की गुफा व धूणा 6 00 वर्ष पूर्व यहां आबाद हुए केरू गांव से भी पुराना है। मान्यताओं के अनुसार जब यहां केरू गांव बसने लगा, उस वक्त यहां एक बड़े गड्ढ़े को देखकर ग्रामीणों ने कुंए की खुदाई शुरू की, तो यहां किसी संत की खड़ाऊ, कमण्डल, झोली आदि वस्तुएं मिली। जिससे लोगों को लगा कि यहां किसी संत की ओर से तपस्या की गई है। यहां पर खुदाई के दौरान एक बहुत बड़ी गुफा भी मिली, जो आज भी स्थित है। उसी गुफा की लोग भूरा बाबा की गुफा के नाम से पूजा-अर्चना करते आ रहे है। यहां श्रद्धालुओं की ओर से एक पक्की धूणे, विश्राम स्थल व बाबा की मूर्ति लगाकर मंदिर का भी निर्माण करवाया गया है। उन्होंने बताया कि भूरा बाबा के अन्य भी कई जगहों पर आश्रम स्थित है। जिसमें बालेटा धाम सुधार मंडी, फलोदी स्थित भाखरिया, जैसलमेर से 30 किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित भूरा डूंगर आश्रम प्रसिद्ध है।

More Videos

Web Title "Non-populated In spite of a deserted place Underlie Baba's cave"

Rajasthan Patrika Live TV