अब मलेरिया नहीं मार सकेगा डंक,डेंंगू से भी राहत

By: Deepak Vyas

Updated On: 25 Aug 2019, 06:28:39 PM IST

  • पर्याप्त बारिश नहीं होने, तालाबों, खड़ीनों, टांकों व जलग्रहण भराव क्षेत्रों में पानी की आवक नहीं होने के कारण जहां लोगों को परेशानी हो रही है तथा किसान भी बुआई व फसलों को चिंतित है। दूूसरी तरफ बारिश नहीं होने के कारण इस वर्ष मलेरिया का प्रकोप भी दिखाई नहीं दे रहा है, ऐसे में लोगों व चिकित्सा विभाग ने राहत की सांस ली है।

जैसलमेर. पर्याप्त बारिश नहीं होने, तालाबों, खड़ीनों, टांकों व जलग्रहण भराव क्षेत्रों में पानी की आवक नहीं होने के कारण जहां लोगों को परेशानी हो रही है तथा किसान भी बुआई व फसलों को चिंतित है। दूूसरी तरफ बारिश नहीं होने के कारण इस वर्ष मलेरिया का प्रकोप भी दिखाई नहीं दे रहा है, ऐसे में लोगों व चिकित्सा विभाग ने राहत की सांस ली है। गौरतलब है कि पोकरण क्षेत्र मलेरिया के दृष्टिकोण से अतिसंवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। यहां कस्बे के आसपास पोकरण रिण, बड़े तालाबों तथा लवां, डिडाणिया व पुरोहितसर के पास पुरोहितसर व धूड़सर रिण, माड़वा, जैमला, गुड्डी, ऊजला, थाट के पास गुड्डी रिण में मीठे पानी का भराव हो जाता है तथा यहां कई महिनों तक पानी जमा रहता है। ऐसे में यहां जमा शुद्ध व मीठे पानी में मलेरिया के मच्छर पैदा होते है। जिससे आसपास क्षेत्र में निवास कर रहे लोगों को मलेरिया का प्रकोप झेलना पड़ता है। यहां जब-जब भी अच्छी बारिश होती है तथा पानी जमा होता है, तब-तब मलेरिया फैल जाता है तथा मलेरिया से यहां कई बार मौतें भी हो चुकी है, लेकिन इस बार बारिश नहीं होने से मलेरिया व डेंगू जैसे रोग से लोगों को राहत मिली है।

्गत वर्ष भी मलेरिया ने नहीं पसारे पांव
पोकरण राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी डॉ.बाबूलाल गर्ग ने बताया कि गत वर्ष भी बारिश नहीं होने से मलेरिया नहीं बराबर था। पूरे वर्ष भर में मात्र तीन मलेरिया पीएफ के रोगी पाए गए थे। जबकि डेंगू का एक भी मरीज नहीं पाया गया था। उन्होंने बताया कि मलेरिया मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर अच्छे व साफ बारिश के पानी अथवा जहां स्थाई रूप से साफ पानी जमा पड़ा है, जैसे टांका, तालाब, रिण, खड़ीन आदि में जमा पानी में ही लार्वा पैदा होता है तथा लार्वा से मच्छर बनकर लोगों को काटते है। जिससे मलेरिया फैल जाता है। इस वर्ष क्षेत्र में अच्छी बारिश नहीं होने के कारण कहीं पर भी पानी जमा नहीं है। ऐसे में मलेरिया के रोगियों की संख्या अभी तक शून्य है। उन्होंने बताया कि बारिश होने के डेढ़ माह बाद लार्वा पैदा होता है। अब यदि बारिश होती है, तो डेढ़-दो माह बाद अक्टूबर माह तक सर्दी शुरू हो जाएगी। जिससे मच्छर भी पैदा नहीं होंगे और लोग घरों में ओढक़र सोने लगेंगे। ऐसे में इस वर्ष मलेरिया फैलने की आशंका नहीं के बराबर है।

Updated On:
25 Aug 2019, 06:28:38 PM IST

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