स्वाइन फ्लू और डेंगू के बाद जयपुर में आई अब यह जानलेवा बीमारी, 200 मामले आए सामने

By: Pushpendra Singh Shekhawat

Updated On:
25 Aug 2019, 07:45:00 AM IST

  • मच्छरों से रहें सावधान, बारिश का दौर थमते ही मौसमी बीमारियों ( Seasonal Diseases ) का बढने लगा ग्राफ, डेंगू ( Dengue ) और स्वाइन फ्लू ( Swine Flu ) के बाद बढ रहा स्क्रब टाइफस ( Scrub Typhus ), राजस्थान ( Rajasthan ) में अब तक इस साल 500 मरीज चिन्हित, जयपुर में कुल आए 200 मामले, जयपुर में हर अस्पताल में सामने आ रहे मरीज

विकास जैन / जयपुर। प्रदेश में स्वाइन फ्लू ( Swine Flu ), डेंगू ( Dengue ) के कहर के बाद अब स्क्रब टाइफस ( Scrub Typhus ) का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। बरसात और इसके बाद जहां स्वाइन फ्लू बढ़ने की रफ्तार जहां धीमी पड़ी है, वहीं अब डेंगू और मलेरिया ( Malaria ) के साथ स्क्रब टाइफस का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। हालांकि, चिकित्सा विभाग का दावा है कि स्क्रब टाइफस की रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। कहने को तो चिकित्सा विभाग ( Health Department ) इन बीमारियों की रोकथाम के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है, लेकिन हर साल ये मौसमी बीमारियां ( Seasonal Diseases ) आमजन पर मौत बनकर कहर बरपा रही है।

 

राजस्थान ( Rajasthan ) में अब तक इस साल 500 मरीज स्क्रब टाइफस के चिन्हित किए जा चुके हैं। जिसमें से अकेले जयपुर जिले में ही 200 मरीज हैं। वहीं इस बारे में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जयपुर प्रथम डॉ. नरोत्तम शर्मा का कहना है कि जयपुर जिले में र्सिवलांस सिस्टम बेहतर होने से मरीजों की संख्या अधिक रहती है।

 

क्या है स्क्रब टाइफस
आजकल स्क्रब टाइफस नामक बीमारी के भी कई मामले सामने आ रहे हैं। पिस्सुओं के काटने से होने वाली इस बीमारी में भी डेंगू की तरह प्लेटलेट घटने लगते हैं। यह खुद तो संक्रामक नहीं है, लेकिन इसके कारण शरीर के कई अंगों में संक्रमण फैलने लगता है। पहाड़ी इलाके, खेतों और जंगल के आस पास पिस्सु अधिक पाए जाते हैं। लेकिन शहरों में भी बारिश के मौसम में जंगली पौधों या घनी घास के आस पास काटने का अधिक खतरा रहता है।

 

काली पपड़ी जैसा निशान आता है नजर
— पिस्सु के काटने के दो तीन हप्ते के बाद तेज बुखार 102 या 103 डिग्री तक
— सिर दर्द, खांसी, मांसपेशियों में दर्द, शरीर में कमजोरी
— पिस्सु के काटने पर फोलेनुमा काली पपड़ी जैसा निशान दिखाई देता है
— कुछ मरीजों में लिवर व किडनी काम नहीं कर पाते, जिससे वह बेहोशी की स्थिति में चला जाता है
— बीमारी की गंभीरता के अनुसार प्लेटलेट भी कम होने लगते हैं

 

इस साल में मौसमी बीमारियां
- स्वाइन फ्लू : 5042 मरीज, 206 मौतें
- डेंगू : 507 मरीज, जयपुर में करीब 287 मरीज
- स्क्रब टाइफस : 500 मरीज, जयपुर में अब तक 200 से अधिक मरीज
- मलेरिया : 782 मरीज, एक मौत
- चिकनगुनिया : 12 मरीज

 

पायरेथ्रम का स्प्रे करने के निर्देश
स्क्रब टाइफस के बढ़ रहे मामलों को देखते हुए पशुपालन विभाग के अधिकारियों को पायरेथ्रम का स्प्रे करने के निर्देश दिए गए हैं। जयपुर के अलावा,अलवर, उदयपुर, कोटा, झालावाड़, भरतपुर, अजमेर, करौली, टोंक, करौली, दौसा, सवाईमाधोपुर, सीकर, झुंझुनूं, बारां, झालावाड़, चित्तौडगढ़़ व राजसमंद आदि जिलों में सर्वाधिक केस सामने आ रहे हैं।

Updated On:
25 Aug 2019, 07:45:00 AM IST

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