रेगिस्तान में बदल सकता पंजाब

By: Hanuman Ram Galwa

Updated On:
10 Sep 2019, 06:27:49 PM IST

  • Punjab Convert in Desert : पारंपरिक फसलों धान और गेहूं की खेती अत्याधिक जल दोहन से पंजाब में भूमिगत जल (ground water) का स्तर प्रति वर्ष औसतन आधा मीटर की दर से नीचे गिर रहा है। इससे राज्य का दोआबा क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित है। हालात यही रहे तो पंजाब के रेगिस्तान में बदल जाने का खतरा पैदा हो जाएगा।

रेगिस्तान में बदल सकता पंजाब

- भूजल स्तर हर साल आधा मीटर नीचे
- नहरों से पंजाब में 27 प्रतिशत खेती
- भूजल से 72 प्रतिशत खेती की सिंचाई
- केवल एक प्रतिशत खेती बारिश पर निर्भर
- प्रति वर्ग किलोमीटर में 138 नलकूप
- कुल चौदह लाख 19 हजार नलकूप
- जल दोहन से भूजल रीतने का खतरा
- रेगिस्तान में बदल सकता नखलिस्तान
- 7823 हजार हेक्टेयर जमीन खेती योग्य
- 3046 हजार हेक्टेयर में धान की खेती
- 1980-81 में थे केवल छह लाख नलकूप
- 2016-17 में हो गए 14 लाख 19 हजार नलकूप
- 12.54 लाख नलकूप बिजली चालित
- 1. 65 लाख नलकूप डीजल चालित
- 85 प्रतिशत क्षेत्र में भूजल स्तर नीचे

पारंपरिक फसलों धान और गेहूं की खेती अत्याधिक जल दोहन से पंजाब में भूमिगत जल (ground water) का स्तर प्रति वर्ष औसतन आधा मीटर की दर से नीचे गिर रहा है। इससे राज्य का दोआबा क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित है। हालात यही रहे तो पंजाब के रेगिस्तान में बदल जाने का खतरा पैदा हो जाएगा। पंजाब में एक अच्छी तरह से विकसित ङ्क्षसचाई प्रणाली है। वर्तमान में नहर के पानी के माध्यम से लगभग 27 प्रतिशत खेती वाले क्षेत्र की ङ्क्षसचाई की जा रही है। राज्य में 72 प्रतिशत भूजल के माध्यम से ङ्क्षसचाई की जा रही है। कंडी बेल्ट में लगभग एक प्रतिशत खेती वाले क्षेत्र में बारिश से ङ्क्षसचाई की जाती है।
पंजाब में जल संसाधनों का दोहन ज्यादा हो रहा है। भूजल पर निर्भरता के कारण राज्य में ट््यूबवेलों का विकास हो रहा है। इससे राज्य भूजल के साथ-साथ ऊर्जा की खपत पर और बोझ बढ़ा है। राज्य में इस समय प्रति वर्ग किलोमीटर में 138 नलकूप के हिसाब से कुल चौदह लाख 19 हजार नलकूप चल रहे हैं। ये धरती के नीचे से पानी का अत्याधिक दोहन कर रहे हैं। इन नलकूपों को पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन से 12,008.98 लाख किलोवाट बिजली दी जा रही है। बिजली का बिल माफ होने के कारण भी किसान लापरवाह हो रहे हैं। किसान बिना जरूरत के भी नलकूप चाल रहे हैं। कुप्रबंधन के कारण राज्य में भूमिगत जल का स्तर 20 से 30 मीटर तक नीचे चला गया है। संगरूर और पातड़ा में यह स्तर 40 मीटर तक नीचे चला गया है। संगरूर, पटियाला, लुधियाना, मोगा, बरनाला, जालंधर और कपूरथला में धान की खेती होने के कारण इन क्षेत्रों में जलस्तर 200 मीटर तक नीचे चला गया है। भूजल पर अत्यधिक निर्भरता से राज्य में भूजल स्तर में जबर्ददस्त गिरावट आई है। भूजल मूल्यांकन रिपोर्ट 2017 के मसौदे अनुसार पिछले 35 साल में राज्य के 85 प्रतिशत क्षेत्र में भूजल स्तर नीचे चला गया है। शेष लगभग 15 प्रतिशत क्षेत्र में सुधार आया है। यह देखा गया है कि महत्वपूर्ण भूजल स्तर गिरने के क्षेत्र में, औसत भूजल स्तर में गिरावट प्रति वर्ष लगभग 0.40 मीटर है। भूजल स्तर में गिरावट के पूरे क्षेत्र को लेते हुए भूजल स्तर गिरने की दर प्रति वर्ष लगभग 0.50 मीटर है। वर्तमान समय में राज्य के पास वार्षिक रूप से 21 लाख 65 हजार 27 हेक्टेयर मीटर पानी उपलव्ध है। ङ्क्षसचाई के लिए 34 लाख 59 हजार 415 हेक्टेयर मीटर तथा घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए एक लाख 21 हजार 772 एचएएम पानी का इस्तेमाल किया जाता है। यह कुल पानी का 165 प्रतिशत है।

Updated On:
10 Sep 2019, 06:27:49 PM IST

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