शुभ संयोग लेकर आ रही निर्जला एकादशी, छह साल बाद बना है ऐसा योग

By: Pushpendra Singh Shekhawat

Published On:
Jun, 11 2019 09:19 PM IST

  • दिनभर श्रद्धालुगण करेंगे भगवान विष्णु की पूजा अर्चना, दीर्घायु और मोक्ष प्राप्ति के लिए रखेंगे व्रत

हर्षित जैन / जयपुर। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी निर्जला एकादशी गुरुवार को है। ज्योतिषाचार्य पंडित पुरुषोत्तम गौड़ के मुताबिक गुरुवार होने से इस दिन विशेष महत्व बढ़ गया है, क्योंकि गुरुवार भगवान विष्णु की पूजा अर्चना का दिन है। अब से पहले निर्जला एकादशी और गुरुवार का शुभ संयोग वर्ष 2013 में बना था।

 

स्कंद पुराण के अनुसार इस एकादशी पर व्रत करने से सालभर की सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य फल मिलता है। दीर्घायु और मोक्ष प्राप्ति के लिए इस दौरान लोग भीषण गर्मी में 24 घंटे निर्जल व्रत रखकर, कठिन साधना के साथ दान पुण्य करेंगे। एकादशी व्रत जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु के निमित्त किया जाता है। वर्षभर में कुल 24 एकादशियों में से निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

 

मंदिरों में होंगे कार्यक्रम
मंदिरों में ठाकुर जी के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगेगा। भक्त शक्कर युक्त जल से भरे मिट्टी के घड़े, आम, खरबूज, कमल ककड़ी, पंखी मंदिरों में चढ़ाकर दान पुण्य कमाएंगे। साथ ही शहर आराध्य देव गोविंद देव जी मंदिर में शाम को जल विहार झांकी, आनंद कृष्ण बिहारी मंदिर, सरस निकुंज दरीबा पान में महंत अलबेली माधुरी शरण के सान्निध्य में शाम सात बजे से फूल बंगला झांकी सजेगी। वहीं विभिन्न जगहों पर सामाजिक संस्थाओं, संगठनों की ओर से छबील लगाकर लोगों को शर्बत, मिल्करोज, नींबू पानी पिलाया जाएगा। इसके साथ ही गलता, पुष्कर, गंगा नदी सहित अन्य तीर्थ स्थलों में पहुंचकर श्रद्धालु डुबकी लगाएंगे।

 

जल संरक्षण का संदेश
गौड़ ने बताया कि ज्येष्ठ मास में भीषण गर्मी में पडऩे वाला यह व्रत जल संरक्षण का संदेश भी देता है। यदि एकादशी का व्रत न कर सकें तो इस दिन अपनी सामथ्र्य के अनुसार दान विशेष तौर पर जल का दान सबसे सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस एकादशी को निर्जला, पांडव और भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। द्वादशी तिथि को ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए।

 

यह करें
व्रत रखने के साथ ही ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: का 108 बार जप करने से अक्षय पुण्य मिलता है। गौड़ ने बताया कि गुरुवार कारक ग्रह है, यह ग्रह भाग्य का कारक है और जिन लोगों की कुंडली में गुरू अशुभ स्थिति में वह भगवान विष्णु के मंत्र ऊं नारायणया विदमहेय, वासुदेवाय धीमहि, तन्नो विष्णु प्रचोदयत का जाप करें।

Published On:
Jun, 11 2019 09:19 PM IST

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