Mutual fund: बेहतर रिटर्न के लिए बैलेंस एडवांटेज फंड में निवेश लाभदायक

By: Narendra Kumar Solanki

|

Published: 07 Nov 2020, 11:53 AM IST

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

जयपुर। इस दिवाली अगर आप बाजार में उतार-चढ़ाव को पीछे छोड़ एक बेहतर रिटर्न चाहते हैं तो आपको बैलेंस एडवांटेज फंड का रास्ता अपनाना चाहिए। दरअसल, बैफ म्यूचुअल फंड की एक कैटेगरी है, जो आपके निवेश को इक्विटी और डेट में निवेश करती है। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में बैफ कैटेगरी के कुल असेट अंडर मैनेजमेंट का 70 फीसदी हिस्सा देश की दो सबसे बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनी आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल और एचडीएफसी के पास है। अर्थलाभ के आंकड़े बताते हैं कि 31 अक्टूबर तक प्रदर्शन के मामले में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल टॉप पर है। इसने 5 साल में 7.93 और 10 साल में 10.53 फीसदी का रिटर्न दिया है, जबकि एचडीएफसी ने इसी अवधि में 5.15 और 7.99 फीसदी का रिटर्न दिया है। मार्च 2010 से आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल ने 11.2 फीसदी का, जबकि इसके बेंचमार्क निफ्टी-50 ने 9.3 फीसदी का रिटर्न दिया है। अगर किसी निवेशक ने आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल में 10 हजार रुपए की मासिक एसआईपी की होगी तो यह निवेश आज 20.28 लाख रुपए हो गया है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल का एयूएम 26,439 करोड़ रुपए है। इसका इक्विटी में निवेश 30 से 80 फीसदी होता है, जो बाजार के वैल्यूएशन पर निर्भर है।
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी के एमडी निमेश शाह कहते हैं कि जब भी बाजार में अवसर होते हैं, वहां पर एक जोखिम भी होता है। तमाम वैश्विक फैक्टर्स से बाजार में उतार-चढ़ाव होते रहते हैं। इसलिए हमारा मानना है कि ऐसे समय में बैलेंस एडवांटेज फंड आपको एक ऑफर देता है। हमारा यह मानना है कि हर किसी निवेशक के कोर पोर्टफोलियो में यह प्रोडक्ट होना चाहिए, क्योंकि यह सभी जोखिम प्रोफाइल में निवेशकों की जरूरतों को पूरा करता है।
इस कैटेगरी में असेट अलोकेशन का एक व्यापक वेरिएशन होता है। इसका तमाम फंड हाउस पालन करते हैं। कुछ फंड हाउस प्राइस टु अर्निंग रेशियो का पालन करते है, जबकि कुछ प्राइस टु अर्निंग और प्राइस टु बुक को मिलाकर चलते हैं। आईसीआईसीआई प्रू मॉडल का पालन करता है। इससे स्कीम का प्रदर्शन ज्यादा होता है। इस प्रकार के म्यूचुअल फंड स्कीम का अन्य फायदा यह होता है कि जब भी बाजार उतार-चढ़ाव में होता है यह उससे निपटने में सक्षम होते हैं।
अर्थलाभ के मुताबिक, उदाहरण स्वरूप मार्च 2020 में जब बाजार में भारी गिरावट आई थी तब इस स्कीम ने अच्छा काम किया था। हालांकि निवेशकों ने डर के मारे पैसा उस समय नहीं लगाया। पर बैलेंस एडवांटेज फंड ने अपनी एक्सपोजर इक्विटी में बढ़ा दिया। दिसंबर 2019 में इक्विटी में इस स्कीम का एक्सपोजर 46 फीसदी था, जो मार्च 2020 में बढ़कर 74 फीसदी हो गया। फिर जब बाजार वहां से रिकवर होना शुरू हुआ तो इक्विटी में एक्सपोजर घटकर 62 फीसदी हो गया।
अक्सर देखा जाता है कि रिटेल निवेशक शेयर बाजार में तब निवेश करते हैं जब बाजार उंचाई पर होता है। यानी निवेशक महंगे वैल्यूएशन पर खरीदी करते हैं। इसका असर यह होता है कि वे महंगे पर खरीदते हैं लेकिन बेचते सस्ते भाव पर हैं। इससे उनको घाटा होता है। बैफ यहीं पर काम करता है। बैफ सस्ते में खरीदता है और महंगे में बेचता है। जब बाजार ऊपर होता है तो वह आपका निवेश डेट में डाल देता है। जब बाजार नीचे होता है तो वह इक्विटी में खरीदी करता है।
इस साल से लेकर अब तक बेंचमार्क जहां अभी कम स्तर पर कारोबार कर रहा है, वहीं कई बैलेंस एडवांटेज फंड ने उससे ज्यादा का फायदा दिया है। यह कैटेगरी लंबे समय में भी अच्छा लाभ देती है। निवेशक इसमें एसआईपी के जरिए लंबी अवधि के लक्ष्यों जैसे शादी, शिक्षा या रिटायरमेंट के लिए निवेश कर सकते हैं। कुछ फंड हाउस ने हाल में इस स्कीम को लांच किया है, जबकि आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल इस कैटेगरी में पायनियर है।

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।