चांद तक पहुंच गया इंडिया, लेकिन अपनी मोरल वैल्यूज नहीं छोड़ी

By: Surya Pratap Singh Rajawat

Updated On: 10 Sep 2019, 07:56:57 PM IST

  • पत्रिका प्लस के कॉलम डियर जयपुर में मिलिए स्विट्जरलैंड के टॉम एकालक हॉफर से

जयपुर. बेशक आज इंडिया चांद तक पहुंच गया है, लेकिन यहां के लोग अपनी मोरल वैल्यूज नहीं भूले हैं। आज भी यहां सबसे पहले इमोशन और रिश्तों की कद्र है। पैरेंट्स बच्चों के सपने पूरे करते-करते खुद की ख्वाहिशों को तो कहीं पीछे ही छोड़ देते हैं। कम रिसोर्सेज में भी वे अपने बच्चों को बेस्ट एजुकेशन सहित सभी दूसरी चीजें देने के लिए हमेशा प्रयासरत रहते हैं। फैमिली के किसी एक मेंबर का गोल सिर्फ उसका नहीं, बल्कि पूरी फैमिली का होता है और सभी लोग इसके लिए पूरी ईमानदारी से मेहनत करते हैं। यही बात जयपुराइट्स को यूरोपियन से अलग बनाती है। पिछले २० महीनों से यहां आरएस इंडिया में प्रोजेक्ट हैड के तौर पर कार्य कर रहा हूं। जयपुर की खूबसूरती का दुनिया में कहीं कोई मैच नहीं है। यहां की हैरिटेज साइट्स इस शहर की खूबसूरती को और बढ़ाती है। पॉजिटिव एनर्जी से भरपूर जयपुर की फिजाओं में भी एक अलग सा अहसास है, जो आपको इससे जोड़े रखता है। जब स्विट्जरलैंड से जयपुर आ रहा था, तब लग रहा था कि कैसे रहूंगा, लेकिन जयपुराइट्स के सपोर्ट और प्यार से सब कुछ आसान बना दिया। यहां के लोग हार्डवर्किंग और ईमानदार है। झालाना सफारी का एक्सपीरियंस अच्छा रहा, सिटी के बिल्कुल नजदीक वाइल्ड लाइफ यहां के लोगों की केयरिंग बेहेवियर को दर्शाता है। खाने-पीने के मामले में भी जयपुराइट्स का कोई मैच नहीं है। हर काम लोग दिल खोल के करते हैं। मुझे यहां के स्ट्रीट फूड खासा पसंद हैं।

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10 Sep 2019, 07:56:56 PM IST

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