जयपुर। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में आज नया मेहमान आया है। दिल्ली जंतुआलय से बीती रात रवाना हुआ दरयाई घोड़ा ( हिप्पोपोटामस ) आज सुबह जयपुर पहुंच गया है।

जानकारी के अनुसार वन्यजीव चिकित्सक डॉ अशोक तंवर की अगुवाई में वन विभाग की टीम बीती रात दरयाई घोड़ा लेकर दिल्ली से रवाना हुई थी। आज सुबह करीब 6 बजे वन विभाग की टीम दरयाई घोड़ा लेकर नाहरगढ़ जैविक उद्यान पहुंची। इसी के साथ वन विभाग की डेढ़ दशक से चल रही वन विभाग की कोशिशें अब कामयाब हुई हैं। अब पर्यटक एग्जोटिक पार्क में दरयाई घोड़ा देख सकेंगे। एग्जोटिक पार्क में ही दरयाई घोड़ा के रहने और खाने के इंतजाम किए गए हैं। हिप्पोपोटामस को जयपुर की गर्मी और उमस से निजात दिलाने के लिए कच्ची और पक्की तलाई बनाकर उनमें पानी भरा गया है। ताकि दरयाई घोड़ा को उसकी पसंद के अनुकूल वातावरण मिल सके। बताया जा रहा है कि मादा दरयाई घोड़ा अगले सप्ताह तक जयपुर आएगी। इसके बाद यहां पर दरयाई घोड़ा प्रजाति का जोड़ा बन जाएगा। दरयाई घोड़ा भले ही आज सुबह जयपुर पहुंच चुका है, लेकिन दर्शक इसे 22 दिन बाद ही देख पाएंगे। वन विभाग की टीम फिलहाल दरयाई घोड़े को जयपुर के वातावरण में एडजस्ट करने की कोशिश में लगी है।

आते ही पानी में कूदा
दरयाई घोड़ा जैसे ही नाहरगढ़ जैविक उद्यान पहुंचा, यहां आते ही पानी की तलाश करने लगा। जैसे ही वन विभाग की टीम ने उसे पानी की तलाई के पास ले जाकर छोड़ा तो हिप्पोपोटामस तुरंत पानी में कूद गया। पानी में अठखेलियां करके दिल्ली से जयपुर तक की थकान उतारता नजर आया। वन विभाग के वन्यजीव चिकित्सक डॉ अशोक तंवर ने बताया कि दरयाई घोड़ा पानी और कीचड़ जैसी नम जगह पर रहना पसंद करता है। दरयाई घोड़ा की जरूरत को देखते हुए नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में कच्ची और पक्की दोनों तरह की तलाई बनाई गई है। दरयाई घोड़ा जयपुर के मौसम के अनुकूल खुद को ढाल ले, इसके लिए वन विभाग की टीम काम कर रही है।

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