भयावह बाढ़ और सूखे की चपेट में आने वाली है अपनी दुनिया

By: Shalini Agarwal

Updated On:
11 Jul 2019, 04:35:55 PM IST

  • 2050 तक दिल्ली का तापमान 3.5 डिग्री बढक़र कानपुर के जैसा हो जाएगा, एक नए शोध के मुताबिक, दुनिया के 80 देशों में बदल जाएगा तापमान और उनमें होगा भयावह बदलाव

आने वाले तीन दशकों में लंदन की आबोहवा बार्सिलोना जैसी होने वाली है। अगर आपको लगता है कि बार्सिलोना तो सुंदर शहर है और इसमें डरने की क्या बात है तो बता दें कि यह बदलाव बहुत सारे अकाल साथ लेकर आने वाला है। मैड्रिड 2050 में माराकेश जैसा हो जाएगा और स्टॉकहोम बुडापेस्ट जैसा। यह खुलासा हाल में जलवायु संकट पर आई नई रिपोर्ट में हुआ है। दुनिया भर के वो शहर, जो अभी ठंडे प्रदेशों में आते हैं, उनका तापमान उनसे 1000 किलोमीटर दूर भूमध्यरेखा के आसपास के शहरों जैसा होने वाला है। इसका सबसे बड़ा दुष्प्रभाव सेहत और शहरों के आधारभूत ढांचे पर पड़ेगा। इस शोध के अनुसार मास्को सोफिया जैसा, सिएटल सेन फ्रांसिस्को जैसा और न्यूयॉर्क वर्जिनिया बीच जैसा हो जाएगा। इस शोध में एक नक्शा भी तैयार किया गया है, जिसमें यह बताया गया है कि कौनसा शहर, 2050 में कौनसे शहर जैसा हो जाएगा। इन शहरों में पानी की कमी एक बड़ी समस्या होगी। यूरोपीय शहरों में गर्मी में तापमान 3.5 डिग्री और सर्दी में तापमान 4.7 डिग्री बढऩे वाला है। पहले 10 शहरों में आठ में बदलाव डराने वाले होंगे। जरनल प्लोस वन में प्रकाशित शोध में दुनिया के 520 शहरों पर शोध कर यह निष्कर्ष निकाला गया है। बार्सिलोना में आने वाले 10 सालों में भयंकर सूखा पड़ेगा, जिससे वहां के कई जंतु या तो हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएंगे या फिर संकटापन्न जानवरों की श्रेणी में आ जाएंगे। यहां पीने के पानी 10 मिलियन यूरो का खर्चा अतिरिक्त होगा। वहीं लंदन और समान देशांतरों पर आने वाले शहर भी भविष्य में ऐसी ही समस्या का सामना करेेंगे। शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि दुनिया का हर पांचवा शहर जिसमें जकार्ता, सिंगापुर, यंगून और कुआलालंपुर शामिल हैं, ऐसे जलवायु परिवर्तनों का सामना करेगा, जैसे दुनिया के किसी भी देश ने अब तक नहीं किया है। स्विट्जरलैंड के क्रोथर लैब के संस्थापक और इस शोध को अंजाम देने वाले टॉम क्रोथर का कहना है कि शोध के परिणाम देखकर वह बहुत ही हैरान-परेशान हैं। ऐसे जलवायु परिवर्तनों का सामान अब तक कहीं पर इंसान ने नहीं किया है। इससे शहरों के आधारभूत ढांचे तो गड़बड़ाएंगे ही, वहां पर राजनीतिक अस्थिरता भी आएगी। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इन शहरों में कभी तो इतनी बारिश होगी कि बाढ़ ही जाएगी तो कभी लगातार सूखा पड़ेगा। क्रोथर के मुताबिक, हम इसके लिए तैयार नहीं हैं। जलवायु परिवर्तन के लिए योजना बनाने की आवश्यकता जल्द से जल्द है। हम जितनी जल्दी इसे शुरू करेंगे, खतरा उतना ही कम होगा।

Updated On:
11 Jul 2019, 04:35:55 PM IST

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