'ओम द्यौ: शांति' कार्यक्रम से दिया पर्यावरण का संदेश

By: Mohan Murari

Updated On:
12 Jun 2019, 08:30:15 AM IST

 
  • — आध्यात्म रश्मियों से जगमगा उठा पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश
    — उम्दा नाट्य मंचन ने किया दर्शकों को भावविभोर
    - दिव्य ज्योति जागृति संस्थान का ओम द्यौ: शांति कार्यक्रम

जयपुर/डूंगरपुर। आध्यात्म के पथ पर मंगलवार की सांझ कभी न मिटने वाली याद लेकर आई। यह पहला ऐसा अवसर रहा जब आध्यात्म की सुनहरी रश्मियों के बीच पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश जगमगाया। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से नया चिकित्सालय मार्ग पर स्थित विजयाराजे सिंधिया ऑडिटोरिम भवन में 'ओम द्यौ: शांति' अनूठा कार्यक्रम हुआ। इसमें प्रकृति के अप्राकृतिक हनन से सामने आ रहे भयावह दुष्परिणामों को बखूबी अंदाज में इंगित किया। 'जनजागृति का बिगुल बजाएं' कार्यक्रम में जनजागृति का बिगुल हम बजाएं, इंसा में इंसानियत को जगाएं, समधुर भजन के साथ ही आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी मणिमाला भारती ने कहा कि मन अक्सर नकारात्मकता में घिर जाता हैं। विध्वंस विकारों में लिप्त हो जाता है। सभी चाहते हैं कि मन सकारात्मक सृजन की ओर आरूढ़ हो। लेकिन, उसकी युक्ति बहुत कम जानते हैं। उसकी युक्ति हैं। ब्रह्मज्ञान। ब्रह्मज्ञान के माध्यम से ही हम अंर्तज्ञान को समझ सकते है। विश्व बंधुत्व की भावना को समझ सकते हैं। नाट्यमंचन से समझाया पर्यावरण का महत्व कार्यक्रम में आकर्षण का केन्द्र रहा पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर कलाकारों की ओर से दी गई नाट्य प्रस्तुति रही। इसमें बताया कि सूखाग्रस्त क्षेत्र में कैसे पानी की कमी से लड़ाई और रोग फैल रहे हैं। भगवान इन्द्र ब्रह्मदेव से प्रार्थना करते हैं और वह युक्ति बताते हैं। मां जगदम्बा को प्रसन्न करने की। वह वर्षा एवं वनस्पतियों की सौगात देते हुए प्रकृति के संरक्षण का संदेश भी देती हैं।

सब बन गए चित्रकार कार्यक्रम में सभी को अंदर प्रवेश करने के साथ ही स्क्रेच कलर एवं ड्राइंग शीट दी गई। कार्यक्रम दौरान सभी को पर्यावरण विषय देते हुए ड्राइंग करने को कहा। इस पर सभी ने अपने-अपने हिसाब से पर्यावरण संबंधित पेड़-पौधे, जल-जीव, नदियां-पहाड़ आदि बनाए।

Updated On:
12 Jun 2019, 08:30:15 AM IST

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