पिता पूछ रहे : कैसे गई बेटे की जान, मुझे सिर्फ यही है जानना, बहन बोली अब किसे बांधूं राखी, मां का हाल बेहाल

By: pushpendra shekhawat

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Published: 13 Aug 2019, 07:45 AM IST

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

अविनाश बाकोलिया / जयपुर। मेरा बेटा कैसे मरा यह तक मुझे नहीं पता। मुझे सिर्फ यह जानना है वह कैसे मरा। यह कहते-कहते ब्रजगोपाल सिंघल फफक-फफक कर रोने लगे। जेएलएन मार्ग ( JLN Marg ) स्थित तिमूर्ति सर्किल ( Trimurti Circle ) पर रविवार तड़के हुए हादसे ने उनके बेटे वैभव सिंघल (17) की जान चली गई थी। वैभव की मां का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा था। वहीं वहीं बड़ी बहन खुशबू गमगीन है और रक्षाबंधन ( RakshaBandhan ) के लिए लाई राखियों को निहार रही है। मानो सूनी आंखें कह रही हो जब इकलौता भाई ही चला गया तो किसे राखी बाधूंगी। घर के इस माहौल को देख हर आने-जाने वाले और वहां से गुजरने वाले की आंखें नम हो रही थी।

 

मोहन नगर नाहरगढ़ निवासी ब्रजगोपाल सिंघल ने बताया कि वैभव कैसे मरा यह तक मुझे नहीं पता। मुझे सिर्फ यह जानना है वह कैसे मरा। यह कहते-कहते ब्रजगोपाल फफक-फफक कर रोने लगे। उन्होंने बताया कि शुरू से उसे सीए बनने का सपना था। वह हमेशा कहता था पापा सीए बनकर एक दिन अच्छी गाड़ी लाऊंगा। वह घर से जब भी निकलता था, तब बाय करके जरूरत जाता था। इस बार बाय करके नहीं गया बेटा और....। इतना कहते ही वह चुप हो गए।


रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार
मृतक के पिता ब्रजगोपाल सिंघल ने बताया कि वैभव और प्रज्ज्वल सीए की तैयारी कर रहे थे। 14 अगस्त को सीए फाउंडेशन का परिणाम आने वाला था। वैभव का सैकंड अटैम्प्ट था। उसे परिणाम का बेसब्री से इंतजार था कि इस बार पास हो जाएगा।

 

अब किसे बाधूंगी राखी

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पिता ब्रजगोपाल सिंघल ने बताया कि अपने इकलौते भाई वैभव को खोकर बड़ी बहन खुशबू गमगीन है। खुशबू बीटेक की छात्रा है, जिसने बड़ी बेसब्री से अपने भाई को राखी बांधने के लिए सुंदर सुंदर राखियां जमा करके रखी हुई थी। बहन की आंखों में आसूं है कि अब किसे राखी बाधूंगी। घर का लाडला तो चला गया।

 

ताकि देख सके दुनिया, आंखें की दान
चाचा राजकुमार ने बताया कि वैभव की आंखें दान कर दी है, ताकि उसकी आंखों से कोई और दुनिया देख सके। और हमारा लाडला जिंदा रह सके।

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