प्रथम कक्षा से 'अहं संस्कृत भाषी' का पाठ

  • संस्कृत दिवस : ब्रह्मर्षि आश्रम के नि:शुल्क स्कूल में संस्कृत को रखा गया है बरकरार
जबलपुर। इस तरह के श्लोकों से ही इस स्कूल की शुरुआत होती है। आमतौर पर स्कूलों में छठी कक्षा से संस्कृत पढ़ाए जाने का काम शुरू किया जाता है, लेकिन शहर के एक एेसा स्कूल भी जहां पहली क्लास के बच्चे भी संस्कृत भाषी बन रहे हैं। आज के दौर में जहां अभिभावक और बच्चों का पूरा ध्यान सिर्फ अंग्रेजी भाषी बनने की तरफ रह गया है, वहीं दूसरी तरफ शहर का नि:शुल्क चलने वाला संस्कृत स्कूल सभी के लिए मिसाल है। यहां बच्चों को पहली कक्षा से ही संस्कृत का पाठ पढ़ाया जाता है, ताकि उनके इसके प्रभाव को बरकरार रखा जा सके। 

ब्रह्मर्षि आश्रम नर्मदा विद्या मंदिर उन स्कूलों में से एक हैं, जहां गरीब और असहाय बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने के साथ संस्कृत को विशेष तौर पर संस्कृत भाषी बनाने पर काम किया जा रहा है। स्कूल प्राचार्य दीदी अंजलि ने बताया कि स्कूल कई वर्षों से नि:शुल्क संचालित किया जा रहा है। इसमें आसपास के क्षेत्र के साथ अन्य क्षेत्रों से भी बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करने का काम किया जाता है। यह स्कूल एमपी बोर्ड की तर्ज पर ही चलाया जाता है। बस संस्कृत के प्रभाव को विद्यार्थियों को अलग रूप से परिचित करवाने के लिए उन्हें पहली कक्षा से संस्कृत पढ़ाई जाती है। 
उन्होंने बताया कि वर्तमान संस्कृत की स्थिति नाजुक होती जा रही है। एेसे में इसके प्रभाव को बरकरार रखने के लिए स्कूल द्वारा इस तरह की विशेष पहल की गई है। स्कूल में जितने भी कार्यक्रम होते हैं, वे सभी संस्कृत में करवाए जाते हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम और नाट्य प्रस्तुतियां भी संस्कृत में भी मंचित करवाई जाती हैं। कक्षा शुरू होने के पहले बच्चों को संस्कृत में श्लोक और बात करने की सलाह भी दी जाती है। 

शहर में संस्कृत संस्थान 
वर्तमान में भले ही संस्कृत की स्थिति नाजुक है, लेकिन इसके बाद ही शहर के कई संस्कृत शिक्षण संस्थान हैं, जहां संस्कृत के अस्तित्व को जीवित रखने की कवायद भी की जा रही है।