इंदौर. पिनेकल ड्रीम्स प्रोजेक्ट में लोगों से फ्लैट की बुकिंग कर करोड़ों रुपए लेकर जेएसएम देवकॉन कंपनी के संचालक आशीष दास व पुष्पेंद्र वढेरा फरार हो गए। अब पैसा जमा कराने वाले लोग परेशान है, ऐसे में पिनेकल संघर्ष समिति ने प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए अपनी ओर से एक प्रोजेक्ट तैयार कर रेरा व मुंबई हाइ कोर्ट में पेश किया है। लोगों की शेष रकम से ही करीब 340 फ्लैट्स का निर्माण कर उनके घर का सपना पूरा करने का दावा समिति ने किया है।

पिनेकल ड्रीम्स व पिनेकल डिजायर प्रोजेक्ट लाने वाली कंपनी के संचालकों के खिलाफ अब तक 5-6 केस दर्ज हो चुके हैं। इन पर इनाम भी घोषित हुआ, लेकिन अब तक आरोपित नहीं मिले। कई लोगों ने फ्लैट की पूरी राशि जमा कर दी है तो कई ने कुछ रकम जमा की है। पीडि़तों ने पिनेकल संघर्ष समिति बनाई है, जिसने पिछले दिनों रेरा में अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। रेरा अधिकारियों ने समिति के पदाधिकारियों से प्रोजेक्ट पूरा करने को लेकर कार्ययोजना बनाने के लिए कहा था। समिति के अध्यक्ष डॉ. एसएल शर्मा व अन्य पदाधिकारियों ने रेरा के सामने अपनी योजना पेश की है।
डॉ. शर्मा के मुताबिक, गुरुवार को इस मामले में मुंबई हाइ कोर्ट में सुनवाई थी, वहां भी अपना प्रस्ताव रखा है। प्रोजेक्ट को 38 करोड़ रुपए का लोन देने वाली कंपनी ने हाइ कोर्ट में याचिका लगाई है, जिसमें समिति इंटरविनर बनी है। मुंबई में फाइनेंस कंपनी पदाधिकारियों के साथ समिति पदाधिकारियों की बैठक हुई, उसमें भी प्रोजेक्ट पूरा करने की योजना पर बात हुई। डॉ. शर्मा के मुताबिक, रेरा व फाइनेंस कंपनी के पदाधिकारियों ने प्रोजेक्ट को लेकर सकारात्मक संकेत दिए है।

पिनेकल ड्रीम्स में इस समय करीब 22 लोगोंं ने रजिस्ट्री के बाद कब्जा मिलने पर वहां रहना शुरू कर दिया है। करीब 340 फ्लैट की मल्टी का काम अधूरा है, जबकि इतने ही फ्लैट की एक मल्टी और बनना है। डॉ. शर्मा के मुताबिक, समिति ने अपनी कार्ययोजना में कहा है कि जिन लोगों ने फ्लैट बुक किए है, उनसे 50 प्रतिशत राशि लेने के बाद कोर्ट की अनुमति लेकर रजिस्ट्री अनुबंध किया जाएगा। इसके बाद काम शुरू होगा और फिर शेष 50 प्रतिशत राशि लेकर इनकी रजिस्ट्री कर दी जाएगी और फ्लैट का काम पूरा होने पर इन्हें कब्जा दिया जाएगा। सारा काम समिति देखेगी और इसका सुपर विजन कोर्ट व रेरा की देखरेख में होगा ताकि पारदर्शिता बनी रही। रेरा व कंपनी के लोगों ने मौखिक रूप से कार्ययोजना को लेकर अपनी सहमति दी है लेकिन अधिकारिक रूप से अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। अगर समिति का यह काम मिल जाता है तो यह पीडि़तों की बहुत बड़ी जीत होगी।

 

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