अस्पतालों को मिले बेबी फ्रेंडली हॉस्पिटल का दर्जा

By: Hussain Ali

Updated On:
25 Aug 2019, 08:45:00 AM IST

  • 59 प्रतिशत बच्चों को आज भी नहीं मिल पाता पैदा होते ही मां का दूध

इंदौर.मध्यप्रदेश में आज भी 59 प्रतिशत बच्चों को पैदा होते ही मां का दूध नहीं मिल पाता है। सिर्फ 41 प्रतिशत बच्चे हैं, जिन्हें एक घंटे के भीतर दूध मिल पाता है। छह माह तक सिर्फ मां का दूध फिर दो वर्ष से चार वर्ष तक मां के दूध के साथ अन्य आहार आज भी 40 प्रतिशत बच्चों को नहीं मिल पाता। ऐसे में अब इस क्षेत्र में काफी काम करने की जरूरत है ताकि प्रदेश में शिशु मृत्युदर में कमी लाई जा सके।

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शहर की सीनियर महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरजा पौराणिक ने कल एक कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट के सामने यह बात रखी। दरअसल शिशु रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ के साथ ही बच्चों के लिए काम करने वाले अस्पतालों ने कल एक निजी अस्पताल में कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में स्वास्थ्य मंत्री शामिल हुए। इस दौरान डॉ. अपूर्व पौराणिक ने सिलावट के सामने एक पत्र का वाचन किया, कहा कि प्रदेश में बेबी फ्रेंडली हॉस्पिटल शुरू होना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग इसकी नियमित मॉनिटरिंग करे। अस्पतालों को यह इजाजत दें कि वे शासन के नियमों पर खरे उतरें तो अपने यहां बेबी फ्रेंडली अस्पताल की नेम प्लेट लगा सकें। सरकार श्रेष्ठतम अस्पताल को पुरस्कार दें ताकि अधिक से अधिक अस्पताल इसमें शामिल हों और प्रोत्साहन मिले। बार-बार उल्लंघन करने वाले अस्पतालों को चेतावनी पत्र जारी करें। शिशु आहार के प्रचार-प्रसार के राष्ट्रीय नियम का पालन होना चाहिए। ब्रेस्ट फीडिंग प्रमोशन नेटवर्क संस्था है जो लघु प्रशिक्षण कोर्स चलाती है। हमारे यहां भी इस तरह के कोर्स चलने चाहिए। प्रदेश के समस्त जिला अस्पताल में मिल्क बैंक की स्थापना होना चाहिए। इसके बाद मंत्री ने संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में मातृ और शिशु मृत्युदर की स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में इसके लिए जो भी संभव प्रयास होगा हम वो करेंगे। मंत्री ने आश्वासन देते हुए कहा कि सभी मुद्दों पर जल्द काम शुरू होगा। भोपाल में मिल्क बैंक शुरू कर दिया है, इंदौर में भी करने जा रहे हैं।

Updated On:
25 Aug 2019, 08:45:00 AM IST

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