नगर निगम को 'पंजे' में लेने के प्रयास में कांग्रेस

By: Mohit Panchal

Updated On:
13 Aug 2019, 11:04:29 AM IST

  • विधानसभावार वार्डों के परिसीमन, को लेकर हो रहा मंथन, मोहल्लों को इधर-उधर करके लगा रहे हार-जीत का गणित

इंदौर। २० साल से विपक्ष की भूमिका निभा रही कांग्रेस अब इंदौर नगर निगम को अपने 'पंजेÓ में लेना चाहती है। मौजूदा स्थिति में तो वही हाल हो सकते हैं, जिसको देखते हुए पार्टी वार्डों पर मंथन कर रही है। विधानसभावार वार्डों के परिसीमन की रणनीति बनाई जा रही है, जिसमें मोहल्लों को इधर-उधर कर हार-जीत का गणित लगाया जा रहा है।

15 साल बाद प्रदेश में कांग्रेस का वनवास खत्म हुआ है। सत्ता में काबिज होने के बाद पार्टी का पूरा फोकस अब दिसंबर व जनवरी में होने वाले निगम व त्रिस्तरीय जिला पंचायत के चुनाव पर है। निगम चुनाव को लेकर तो शहर कांग्रेस ने मंथन शुरू कर दिया है। विधानसभावार मंत्री व विधायक की पसंद व क्षेत्र नेताओं की कमेटियां बना दी गई हैं, जो वार्डों का जोड़-घटाव कर रहे हैं।

बारीकी से मंथन हो रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा वार्ड जीत सकें। गौरतलब है, भाजपा ने मुस्लिम क्षेत्रों के वार्ड बना दिए थे ताकि आसपास के वार्डों को सुरक्षित किया जा सके। ऐसे में चंदन नगर, बड़वाली चौकी, साउथ तोड़ा, बंबई बाजार, गुलजार कॉलोनी, आजाद नगर और खजराना के दो वार्ड पूरी तरह से मुस्लिम बाहुल्य हो गए थे।

खजराना के एक वार्ड को छोड़कर सभी में कांग्रेस ने फतह हासिल की थी, लेकिन भाजपा ने ऐसा करके आसपास के सारे वार्डों को सुरक्षित कर लिया था। अब कांग्रेस मुस्लिम वार्डों का बिखराव करने के मूड में है। इसके अलावा कुछ भाजपाई मोहल्लों को मुस्लिम बाहुल्य वार्डों में डाल दिया जाएगा ताकि उनके वोटों का असर खत्म हो जाए। ये योजना से सभी विधानसभाओं में परिसीमन का काम चल रहा है।

गांव जुडऩे का असर
सरकार ने पिछले दिनों बांक व नैनोद गांव को नगर निगम की सीमा में जोड़ दिया है। दावे-आपत्ति के बाद में प्रस्ताव बनाकर जिला प्रशासन ने भोपाल भेज दिया है। बांक पंचायत बड़ी है जिसकी वजह से सिरपुर के वार्ड एक के एक-दो मोहल्ले लेकर वार्ड तैयार हो सका है। इधर, नैनोद को गांधी नगर व एयरपोर्ट से लगे वार्ड में जोडऩे की योजना है। दोनों ही क्षेत्र कांग्रेस का वोट बैंक है जिसकी सीधा असर वार्डों में नजर आएगा

विधानसभा से नहीं होंगे बाहर
शहर कांग्रेस ने योजना बनाई है कि परिसीमन में एक विधानसभा दूसरी को क्रॉस नहीं करेगी। बात रही वार्डों की तो उन्हें कम ज्यादा किया जा सकता है। ऐसा करने से विधायकों में टिकट को लेकर खींचतान नहीं मचेगी। देपालपुर, सांवेर और राऊ के क्षेत्रों वाले वार्ड भी पूरी तरह उन्हीं विधानसभा के होंगे।

अन्य क्षेत्र के मोहल्लों को शामिल नहीं किया जाएगा। सबका लक्ष्य सिर्फ प्रत्याशी को जिताने का होगा। पूर्व में कांग्रेस में फ्री फॉर ऑल हो चुका है। ऐसी परिस्थिति इस बार नहीं बने जिसको देखते हुए ये कसावट लाने का प्रयास किया जा रहा है।

Updated On:
13 Aug 2019, 11:04:29 AM IST

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