खसरा का खतरा: कैसे पहचानें...कैसे बचें, क्या खाएं, टीका कब लगवाएं? यहां जानें

By: dilip chaturvedi

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Updated: 19 Mar 2018, 01:36 PM IST

स्वास्थ्य

खसरा एक बहुत ही संक्रामक रोग है, जो पैरामिक्सोवायरस परिवार के एक वायरस के कारण होता है। खसरा को 'रुबेलाÓ भी कहा जाता है। खसरा अनेक विकासशील देशों में बच्चों की मृत्यु का एक मुख्य कारण है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, हर घंटे 13 और प्रत्येक दिन 314 मौंतें खसरा की वजह से होती हैं। बता दें कि संक्रमित व्यक्ति जब खांसते या छींकते हैं, तो संक्रमण हवा में फैल जाता है। यह बचपन में होने वाला एक संक्रमण रोग है। खसरा, जो कि पहले बहुत आम बिमारी थी। अब खसरा वायरस वैक्सीन (टीका) से रोकी जा सकती है।
आमतौर पर संक्रमण लगभग 7 से 10 दिनों में ठीक हो जाता है। खसरा वायरस कई घंटों के लिए सतह पर रह सकता है। चूंकि संक्रमित कण हवा में फैल जाते हैं और सतहों पर होते हैं, इसलिए निकटता वाले व्यक्ति आसानी से संक्रमित हो सकते हैं। यूआईपी के तहत खसरा का टीकाकरण 2 खुराक में निर्धारित किया गया है। 9-12 महीनों में पहली खुराक और 16-24 महीने में दूसरी खुराक।


खसरा के लक्षण
वायरस के संपर्क में होने के 10 से 14 दिनों बाद खसरा के लक्षण दिखाई देते हैं। खसरे के लक्षणों में आमतौर पर शामिल
- सूखी खांसी।
- बहती नाक।
- गले में खराश।
- आंखों में सूजन
- गाल और मुंह के अंदरूनी हिस्से में लाल सतह पर नीले-सफेद केंद्रों के साथ छोटे सफेद स्पॉट (दाग) - जिसे कोपलिक स्पॉट भी कहते हैं।
-त्वचा पर एक प्रकार के चकत्ते (दाने) जो कि बड़े और सपाट ददोरे व धब्बों से बनते हैं और अक्सर एक -दूसरे में प्रवाह करते हैं।

ऐेसे फैलता है खसरा...
खसरे का कारण एक वायरस होता है (रुबेला वायरस), जो संक्रमित बच्चे या वयस्क के नाक और गले में प्रतिकृति करता है। जब कोई खसरे से पीडि़त व्यक्ति खांसी, छींक या बातचीत करता है, तो संक्रमित बूंदें हवा में फैल जाती हैं, जिसे दूसरे व्यक्ति सांस लेने के दौरान अंदर ले जाते हैं। संक्रमित बूंदें किसी सतह पर भी आ सकती हैं, जहां वे कई घंटे तक सक्रिय और संक्रामक रहती हैं। आप संक्रमित सतह को छूने के बाद अपनी उंगलियों को अपने मुंह या नाक में डालकर, या अपनी आंखें रगड़ कर वायरस से संक्रमित हो सकते हैं।

खसरे से ऐसे बचें...

सभी बच्चों को खसरा वायरस टीका टीका लगवाना अत्यंत आवश्यक है।
चूंकि दाने के टूटने या फटने के चार दिन पहले खसरा बेहद संक्रामक होता है, वे लोग जिन्हें खसरा है इस अवधि के दौरान काम पर न लौटें व अन्य लोगों के साथ संपर्क में न आएं।
जो लोग प्रतिरक्षित नहीं होते हैं (उदाहरण के लिए-भाई या बहन), उन्हें
संक्रमित व्यक्ति से दूर रहना चाहिए।


खसरे में ऐसे करें परहेज...
-काम-धंधे से कुछ दिनों के लिए छुट्टी लें और पूरी तरह आराम करें।
-दूसरों के संपर्क में ना आएं, क्योंकि यह बीमारी फैल सकती है।
- टीवी देखने से बचें जो कि आपकी आंखों के लिए हानिकारक हो सकता है।
- बाहर के खाने, जंक फूड, मसाले-दार खाने, व संसाधित खाद्य पदार्थ (जिनमे सोडियम की मात्रा अधिक होती है) से दूर रहें।
-कार्बोनेटेड पेय पदार्थ (कोल्ड ड्रिंक्स), कॉफी , तैलीय वसा युक्त भोजन को अवॉइड करें।


खसरे में क्या खाएं...
-खसरे के शुरुआती दिनों में पूरी तरह फल का सेवन करने की सलाह दी जाती है। खासकर कि नींबू व संतरे; जिनमे विटामिन सी और फाइबर होता है, सबसे ज्यादा फायदेमंद होते हैं।
-रोगी को मुलायम या नरम आहार पर भी रखा जा सकता है। फल जैसे, खरबूजा, चकोतरा व अंगूर बेहद फायदेमंद हैं।
- बिना मसाले वाला सूप व सम्पूर्ण आहार वाली दलिया भोजन में दी जानी चाहिए।
- अधिक से अधिक तरल पदार्थ लें (दिन में छह से आठ गिलास पानी)।


टीकाकरण...
विश्व स्वास्थ्य संगठन इस बात की अनुशंसा करता है कि राष्ट्रीय प्रतिरक्षण कार्यक्रमों में खसरा-युक्त टीका की दो खुराकों वाली टीकाकरण को शामिल किया जाए। खसरा-युक्त टीका निम्नलिखित किसी भी एक रूप में उपलब्ध है।

- खसरा, गलसुआ, और रुबेला (MMR) टीका
- खसरा, गलसुआ, रुबेला, और छोटी चेचक (चिकनपॉक्स) (MMRV) टीका
- खसरा-रुबेला (MR) टीका
- केवल-खसरा टीका

खसरा-युक्त टीके की पहली खुराक की अनुशंसा प्राय: 12 महीने की आयु में की जाती है। उन देशों में जहां खसरा प्रसार की दर अधिक है, खसरा-युक्त टीके की पहली खुराक की अनुशंसा 9 महीने की आयु में की जा सकती है। दूसरी खुराक देश के आधार पर अनेक महीनों या अनेक वर्षों बाद दी जा सकती है।

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